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राजधानी लखनऊ में घटा क्राइम, CP डीके ठाकुर ने बढ़ाया प्रदेश का मान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के लिए दशकों से अपराध एक बड़ी समस्या रही है. यही वजह थी कि, योगी सरकार ने सरकार बनते ही दावा किया कि, अपराध में कमी लाना उनकी प्राथमिकता रहेगी. वहीं यूपी में एक सर्वे के मुताबिक राजधानी लखनऊ में अपराध में कमी देखी गई है.

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राजधानी में क्राइम ग्राफ में भारी कमी

सर्वे के मुताबिक, राजधानी लखनऊ में पिछले कुछ सालों में क्राइम ग्राफ में भारी गिरावट दर्ज की गई है.

CP लखनऊ डीके ठाकुर ने बढ़ाया प्रदेश का मान

वहीं सर्वे के मुताबिक, सीपी लखनऊ डीके ठाकुर की एक्टिव कार्यप्रणाली ने कमिश्नरेट पुलिस लखनऊ का पूरे प्रदेश में मान बढ़ाया है.

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बता दें कि, सीपी लखनऊ ठीके ठाकुर ने राजधानी में अपराध पर लगाम लगाने के लिए कई अभियान चलाए. जिससे अब अपराध में कमी देखने को मिली है.

अपराध रोकने के लिए डीके ठाकुर की एक्टिव कार्यप्रणाली

वहीं सीपी डीके ठाकुर का कहना है कि, प्रदेश में अपराध को रोकने के लिए ऐसे अभियान चलाकर अपराधियों पर कार्रवाई की जाएगी. जिससे प्रदेश सुरक्षित हो सके.

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प्रदेश में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं- सीएम योगी

बता दें कि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कई मौकों पर बताया कि, इस प्रदेश में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है और सरकार ने भी तमाम कोशिशें कीं ताकि अपराध पर अंकुश लग सके.

एनकाउंटर में बड़े-बड़े अपराधियों को मार गिराया

योगी सरकार ने ताबड़तोड़ एनकाउंटर में बड़े-बड़े अपराधियों को मार गिराया गया. सालों से अपनी दबंगई के चलते राजनीति तक में पैठ बना चुके मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे अपराधियों को यूपी सरकार ने पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया.

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कौन हैं सीपी डीके ठाकुर ?

एटीएस के एडीजी डीके ठाकुर साल 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। इसे पहले वह राजधानी लखनऊ के एसएसपी रह चुके हैं।

बीएसपी चीफ मायावती के शासनकाल में ठाकुर लखनऊ के एसएसपी और डीआईजी के पद पर तैनात थे। उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में भी काम किया है।

पुलिस अधिकारियों में डीके ठाकुर की अलग पहचान

बताया जाता है कि, पुलिस अधिकारियों में ठाकुर की अलग पहचान है। जब वह लखनऊ में तैनात थे तब लोगों की शिकायतों को सुनने के लिए 10 बजे से शाम पांच बजे तक उपलब्ध रहते थे।

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राजधानी में अपने सवा साल से ज्यादा के कार्यकाल में उन्होंने क्राइम और लॉ एंड ऑर्डर पर शानदार काम किया था। वह नियमित रूप से दफ्तर में बैठकर सालों से लंबित मामलों को निपटाते थे।

उन्होंने राजधानी में 6 नए थानों का प्रस्ताव भी तैयार किया था। शासन से आदेश मिलने के बाद पीजीआई, गौतमपल्ली, जानकीपुरम, पारा चौकी, विभूति खंड और इंदिरानगर की स्थापना कराई थी। साथ ही उन्होंने ऐंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट में भी थाने की तर्ज पर काम शुरू कराया।

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