
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का संगठनात्मक विस्तार तेज़ी से हो रहा है। संघ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मई और जून 2026 के दौरान राज्य में 30,650 नए लोगों ने स्वयंसेवक के रूप में पंजीकरण कराया। इनमें सबसे अधिक संख्या युवाओं की बताई जा रही है। संगठन का दावा है कि ऑनलाइन माध्यम से भी बड़ी संख्या में लोग संघ से जुड़ रहे हैं।

संघ के आंकड़ों के अनुसार, मई में 22,171 और जून में 8,479 नए सदस्य जुड़े। इससे पहले जनवरी से अप्रैल के बीच सदस्यता की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी थी। संगठन का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में सदस्यता अभियान को व्यापक स्तर पर चलाया गया, जिसका असर अब आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।
छह महीनों में सदस्यता का आंकड़ा
| महीना | नए सदस्य |
|---|---|
| जनवरी | 563 |
| फरवरी | 332 |
| मार्च | 697 |
| अप्रैल | 1,339 |
| मई | 22,171 |
| जून | 8,479 |
बंगाल में तीन प्रांतों के जरिए बढ़ाया जा रहा विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पश्चिम बंगाल को संगठनात्मक रूप से तीन प्रांतों में विभाजित किया है। इनमें दक्षिण बंगाल (मुख्यालय- कोलकाता), मध्य बंगाल (मुख्यालय- वर्धमान) और उत्तर बंगाल (मुख्यालय- सिलीगुड़ी) शामिल हैं। संघ का कहना है कि अब शाखाओं का विस्तार केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर तक भी किया जा रहा है।
लगातार बढ़ी शाखाओं की संख्या
संघ के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2013 में पश्चिम बंगाल में शाखाओं की संख्या करीब 800 थी। यह 2021 तक बढ़कर लगभग 3,000 पहुंची। 2024 में शाखाओं की संख्या करीब 4,550 थी, जो अब बढ़कर लगभग 5,500 के आसपास बताई जा रही है।
देशभर में भी बढ़ा संगठन का दायरा
संघ के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर भी संगठन का विस्तार जारी है। वर्ष 2025 में जहां 55,740 स्थानों पर शाखाएं लगती थीं, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 55,683 बताई गई है। इसी तरह शाखाओं की कुल संख्या 83,139 से बढ़कर 88,949, मिलन की संख्या 32,147 से बढ़कर 32,606 और मंडलियों की संख्या 12,091 से बढ़कर 13,211 हो गई है।
हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों में शाखा स्थानों को लेकर दिए गए 2025 और 2026 के आंकड़ों (55,740 और 55,683) में अंतर दिखाई देता है। इस संबंध में संगठन की ओर से अलग से कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
नोट: यह रिपोर्ट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े सूत्रों और उपलब्ध संगठनात्मक आंकड़ों पर आधारित है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है।




