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Sujata Joins BJD : बीजेडी में शामिल सुजाता कार्तिकेयन, उत्तराधिकार को लेकर तेज हुई राजनीतिक चर्चाएं आज

भुवनेश्वर: ओडिशा की पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी सुजाता आर. कार्तिकेयन ने बीजू जनता दल (BJD) की औपचारिक सदस्यता ग्रहण कर राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। पार्टी अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की मौजूदगी में बीजेडी में शामिल हुईं सुजाता का स्वागत करते हुए पार्टी नेतृत्व ने उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव को संगठन और जनसेवा के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके राजनीतिक प्रवेश के साथ ही यह चर्चा भी तेज हो गई है कि भविष्य में उन्हें पार्टी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।

नवीन पटनायक ने जताया भरोसा

बीजेडी में शामिल होने के अवसर पर नवीन पटनायक ने कहा कि सुजाता कार्तिकेयन ने अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण, सामाजिक कल्याण और जनहित से जुड़े विभागों में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनका अनुभव पार्टी की नीतियों को मजबूत करने और महिलाओं के हित में चलाए जा रहे कार्यक्रमों को नई दिशा देने में सहायक होगा।

बीजेडी में शामिल होने के बाद क्या बोलीं सुजाता?

सदस्यता ग्रहण करने के बाद सुजाता कार्तिकेयन ने नवीन पटनायक का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें पिछले 24 वर्षों तक प्रशासनिक सेवा के माध्यम से ओडिशा की जनता की सेवा करने का अवसर मिला। अब राजनीति के जरिए वह राज्य और समाज के लिए नई भूमिका निभाने जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद और जनता के विश्वास के साथ वह पूरी निष्ठा एवं समर्पण से जनसेवा करती रहेंगी।

कौन हैं सुजाता आर. कार्तिकेयन?

सुजाता आर. कार्तिकेयन वर्ष 2000 बैच की ओडिशा कैडर की आईएएस अधिकारी रही हैं। उन्होंने लगभग 24 वर्षों तक ओडिशा सरकार के विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में सेवाएं दीं। प्रशासनिक क्षेत्र में उनकी पहचान एक अनुभवी, दक्ष और प्रभावी अधिकारी के रूप में रही है।

वह पूर्व आईएएस अधिकारी और बीजेडी के पूर्व वरिष्ठ नेता वी.के. पांडियन की पत्नी भी हैं। इसी कारण उनका नाम लंबे समय से ओडिशा की राजनीति और प्रशासन दोनों में चर्चा का विषय रहा है।

मिशन शक्ति को मजबूत बनाने में निभाई अहम भूमिका

सुजाता कार्तिकेयन ने अपने कार्यकाल के दौरान मिशन शक्ति विभाग में आयुक्त-सह-सचिव के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। यह योजना महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित की जाती है।

उनके कार्यकाल में मिशन शक्ति कार्यक्रम का विस्तार हुआ और यह ओडिशा सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में शामिल हो गया। बाद में उन्होंने राज्य के वित्त विभाग में भी वरिष्ठ अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दीं।

चुनाव के दौरान विवादों में भी आया नाम

साल 2024 के लोकसभा और ओडिशा विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने शिकायतों के आधार पर सुजाता कार्तिकेयन को सार्वजनिक संपर्क वाले विभाग से हटाकर गैर-सार्वजनिक विभाग में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। विपक्षी दलों, विशेष रूप से भाजपा ने आरोप लगाया था कि उनके पद का राजनीतिक प्रभाव के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि इस मामले में अलग-अलग राजनीतिक दलों के अपने-अपने दावे रहे।

वीआरएस के बाद शुरू हुई थीं राजनीतिक अटकलें

चुनाव के बाद सुजाता कार्तिकेयन कुछ समय तक चाइल्ड केयर लीव पर रहीं। बाद में मार्च 2025 में केंद्र सरकार ने उनके स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के आवेदन को मंजूरी दे दी। उस समय उन्होंने स्पष्ट कहा था कि उनका वीआरएस निजी कारणों से है और राजनीति में आने की कोई योजना नहीं है।

हालांकि उनके सेवानिवृत्त होने के बाद लगातार यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि वह भविष्य में राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं। अब बीजेडी की सदस्यता ग्रहण करने के साथ इन चर्चाओं पर विराम लग गया है।

वी.के. पांडियन की भूमिका भी रही चर्चा में

वी.के. पांडियन लंबे समय तक बीजेडी और ओडिशा सरकार में प्रभावशाली चेहरा माने जाते रहे। विपक्षी दलों ने उन पर बिना किसी निर्वाचित पद के सरकार और संगठन में प्रभाव रखने के आरोप लगाए थे। वहीं, नवीन पटनायक कई अवसरों पर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि पांडियन उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी नहीं हैं।

2024 के विधानसभा चुनाव में बीजेडी की हार के बाद वी.के. पांडियन ने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने की घोषणा कर दी थी और तब से वह सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय नहीं दिखाई दिए।

क्या नवीन पटनायक के कार्यालय से संभालेंगी जिम्मेदारी?

सुजाता कार्तिकेयन के बीजेडी में शामिल होने के बाद पार्टी के भीतर नई राजनीतिक संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके प्रशासनिक अनुभव का लाभ संगठन को मिल सकता है, विशेषकर महिला सशक्तिकरण और जनकल्याण से जुड़े क्षेत्रों में।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, भले ही उन्हें फिलहाल कोई बड़ा संगठनात्मक पद न मिले, लेकिन भविष्य में वे नवीन पटनायक के कार्यालय से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल सकती हैं। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए उत्तराधिकार को लेकर चल रही चर्चाओं को फिलहाल केवल राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जा रहा है।

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