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Trump Tariff Warning : डिजिटल टैक्स पर ट्रंप की चेतावनी, यूरोप पर टैरिफ संकट गहराया अब

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डिजिटल सर्विस टैक्स (Digital Services Tax) को लेकर यूरोपीय देशों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि कोई देश अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर डिजिटल सर्विस टैक्स लागू करता है, तो अमेरिका उस देश से आयात होने वाले सभी उत्पादों पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा। ट्रंप की इस चेतावनी के बाद अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दी चेतावनी

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए यूरोपीय देशों की प्रस्तावित डिजिटल टैक्स नीति की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने वाले किसी भी टैक्स का जवाब अमेरिका कड़े व्यापारिक कदमों से देगा।

उन्होंने लिखा कि यदि कोई देश अमेरिकी डिजिटल कंपनियों पर टैक्स लगाता है, तो उस देश से अमेरिका भेजे जाने वाले सभी उत्पादों पर तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लागू किया जाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि यह नीति किसी भी मौजूदा या भविष्य के व्यापार समझौते से ऊपर मानी जाएगी।

यूरोप में डिजिटल टैक्स को लेकर बढ़ी चर्चा

हाल के महीनों में कई यूरोपीय देश बड़ी बहुराष्ट्रीय टेक कंपनियों पर डिजिटल सर्विस टैक्स लगाने की योजना पर विचार कर रहे हैं। इन देशों का मानना है कि वैश्विक डिजिटल कंपनियां उनके बाजारों से भारी कमाई करती हैं, इसलिए उन्हें स्थानीय स्तर पर भी उचित कर का भुगतान करना चाहिए।

हालांकि, अमेरिका का आरोप है कि इस तरह के टैक्स विशेष रूप से अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाते हैं और इससे निष्पक्ष वैश्विक व्यापार प्रभावित होता है।

क्या होता है डिजिटल सर्विस टैक्स?

डिजिटल सर्विस टैक्स (DST) वह कर है, जो किसी देश में ऑनलाइन विज्ञापन, डिजिटल मार्केटप्लेस, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, सर्च इंजन और अन्य इंटरनेट आधारित सेवाओं से होने वाली कमाई पर लगाया जाता है।

आमतौर पर यह टैक्स केवल उन बड़ी वैश्विक कंपनियों पर लागू होता है, जिनका वार्षिक कारोबार और डिजिटल राजस्व एक निश्चित सीमा से अधिक होता है। इनमें प्रमुख रूप से मेटा, अल्फाबेट (गूगल) और अमेज़न जैसी अमेरिकी टेक कंपनियां शामिल हैं।

अमेरिका क्यों कर रहा है विरोध?

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि डिजिटल सर्विस टैक्स निष्पक्ष कर व्यवस्था के बजाय अमेरिकी टेक कंपनियों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने का माध्यम बनता जा रहा है। अमेरिका का तर्क है कि यदि किसी देश को अंतरराष्ट्रीय कर व्यवस्था में बदलाव चाहिए, तो यह फैसला वैश्विक सहमति के आधार पर होना चाहिए, न कि अलग-अलग देशों द्वारा एकतरफा टैक्स लागू करके।

यूरोपीय देशों का क्या है पक्ष?

दूसरी ओर, कई यूरोपीय देशों का मानना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कर नियम पारंपरिक व्यापार मॉडल पर आधारित हैं और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप नहीं हैं। उनका कहना है कि बड़ी टेक कंपनियां स्थानीय बाजारों से भारी मुनाफा कमाने के बावजूद अपेक्षाकृत कम कर चुकाती हैं, इसलिए डिजिटल सर्विस टैक्स जैसी व्यवस्था आवश्यक है।

बढ़ सकता है व्यापारिक तनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका वास्तव में 100 प्रतिशत टैरिफ लागू करता है, तो इससे दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप आयात-निर्यात महंगा होने, वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने और कई उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ने की आशंका है।

आने वाले समय में यह विवाद केवल डिजिटल टैक्स तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापक व्यापारिक वार्ताओं और आर्थिक संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है।

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