
नई दिल्ली। कॉमेडियन समय रैना और चार अन्य कॉमेडियन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग व्यक्तियों को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक और असंवेदनशील टिप्पणियों से जुड़े मामलों में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है। यह मामला लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ से जुड़ा था।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए समय रैना के अलावा विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर को राहत दी। अदालत ने इन लोगों की ओर से दिव्यांग समुदाय के लिए जागरूकता बढ़ाने और सहायता जुटाने की दिशा में किए गए प्रयासों को भी महत्वपूर्ण माना।
क्या था पूरा विवाद?
विवाद ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ के एक एपिसोड में दिव्यांग लोगों और स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी जैसी गंभीर बीमारी को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद शुरू हुआ था। इन टिप्पणियों को लेकर काफी विरोध हुआ और दिव्यांग समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। इसके बाद समय रैना समेत कई लोगों के खिलाफ अलग-अलग जगहों पर एफआईआर दर्ज हुई थीं।
मामले में क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया था। याचिका में दिव्यांग लोगों के प्रति संवेदनशीलता और उनकी गरिमा बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया गया था।
कोर्ट ने पहले क्या निर्देश दिए थे?
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में समय रैना और अन्य कॉमेडियनों को दिव्यांग लोगों के लिए काम करने तथा स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए फंड जुटाने की दिशा में कार्यक्रम आयोजित करने को कहा था। अदालत ने उन्हें अपने कार्यक्रमों में दिव्यांग व्यक्तियों को शामिल करने और उनकी उपलब्धियों को सामने लाने के लिए भी कहा था।
बाद में अदालत ने निर्देशों के पालन से जुड़े विवाद में कॉमेडियनों पर 3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
दिव्यांगों के लिए किए प्रयासों की तारीफ
सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपियों की ओर से किए गए सकारात्मक प्रयासों को ध्यान में रखा। रिपोर्टों के अनुसार, समय रैना ने दिव्यांगों के लिए शतरंज टूर्नामेंट और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए तथा सहायता जुटाने की कोशिश की। इन पहलों को अदालत ने सकारात्मक बदलाव की दिशा में उठाया गया कदम माना।
हालांकि, अदालत की ओर से एफआईआर रद्द किए जाने के बावजूद ऑनलाइन और मनोरंजन सामग्री में दिव्यांग लोगों की गरिमा और सम्मान से जुड़े व्यापक सवाल महत्वपूर्ण बने हुए हैं। अदालत इस बात पर भी विचार कर रही है कि डिजिटल और मनोरंजन क्षेत्र में दिव्यांग व्यक्तियों के सम्मान की रक्षा के लिए किस तरह के दिशानिर्देश बनाए जा सकते हैं।
इस फैसले से समय रैना समेत पांचों कॉमेडियनों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। साथ ही यह मामला यह भी दिखाता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।




