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G20 व्यापार वार्ता में बड़ा पेच, क्यों अटकी सहमति?

अतिरिक्त उत्पादन, अमेरिकी टैरिफ, अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद और बंधुआ मजदूरी जैसे मुद्दों पर G20 देशों के बीच मतभेद बरकरार रहे।

G20 Trade Talks: G20 देशों के व्यापार मंत्रियों की बैठक में वैश्विक व्यापार से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन बाजार में जरूरत से ज्यादा उत्पादन और कम कीमत वाले सामान की बढ़ती आपूर्ति को लेकर सदस्य देशों के बीच कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। अमेरिका ने इस समस्या को लेकर अपने व्यापारिक साझेदारों पर सवाल उठाए हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि कई क्षेत्रों में मांग से अधिक उत्पादन के कारण कीमतों में गिरावट आ रही है और इससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा मुश्किल हो रही है।

बैठक के बाद अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि अतिरिक्त उत्पादन के मुद्दे पर भले ही आम सहमति नहीं बनी, लेकिन बातचीत रचनात्मक रही। उन्होंने कहा कि लगभग सभी देशों ने माना है कि यह ऐसी समस्या है जिस पर कार्रवाई की आवश्यकता है।

अमेरिका ने अतिरिक्त उत्पादन को बताया बड़ी चुनौती

अमेरिका लंबे समय से वैश्विक बाजार में जरूरत से ज्यादा उत्पादन और उससे पैदा होने वाली प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंता जताता रहा है। अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, जब किसी देश में घरेलू मांग की तुलना में किसी उत्पाद का उत्पादन बहुत अधिक होता है, तो कंपनियां अतिरिक्त सामान को दूसरे देशों के बाजारों में कम कीमत पर बेच सकती हैं। इससे वैश्विक कीमतों पर दबाव पड़ता है और दूसरे देशों के उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है।

ग्रीर ने कहा कि मौजूदा व्यापार व्यवस्था ऐसे मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है। अमेरिका का आरोप है कि कई व्यापारिक साझेदारों की औद्योगिक नीतियों के कारण उत्पादन क्षमता जरूरत से अधिक बढ़ी है।

चीन पर अमेरिका की खास नजर

अमेरिकी प्रशासन इस समस्या के लिए सबसे ज्यादा चीन को जिम्मेदार मानता है। चीन के स्टील उत्पादन को लेकर अमेरिका पहले से ही चिंताएं जताता रहा है। इसके अलावा अमेरिकी प्रशासन ने ऑटोमोबाइल, बैटरी, पेपर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भी अतिरिक्त उत्पादन की समस्या का उल्लेख किया है।

अमेरिका का कहना है कि इन क्षेत्रों में अधिक उत्पादन और कम कीमत वाले सामान की उपलब्धता से अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिस्पर्धात्मक दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की जांच केवल चीन तक सीमित नहीं है। नॉर्वे से लेकर बांग्लादेश तक कई देशों के खिलाफ अतिरिक्त उत्पादन और व्यापार से जुड़े मामलों की जांच शुरू की गई है।

अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद में भी नहीं निकला रास्ता

G20 बैठक के दौरान अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहे व्यापार विवाद को लेकर भी कोई बड़ी सफलता सामने नहीं आई। दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर तनाव लगातार बढ़ा है।

अमेरिकी प्रशासन ने कनाडा से आने वाले कुछ उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए हैं। इसके जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क लगाया है। हाल में दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ा, जब अमेरिका ने कनाडा से आने वाले कुछ सामानों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने माना कि कई महत्वपूर्ण मुद्दे अभी भी लंबित हैं और उनका समाधान आसान नहीं है। दूसरी ओर, कनाडा के व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने दोनों देशों से सहयोग के जरिए विवादों का समाधान निकालने की अपील की।

बंधुआ मजदूरी से बने सामान पर भी मतभेद

G20 बैठक में बंधुआ मजदूरी से बने सामान के अंतरराष्ट्रीय व्यापार का मुद्दा भी उठा। इस पर भी सदस्य देशों के बीच साझा सहमति नहीं बन सकी।

ग्रीर ने कहा कि कुछ G20 देश ऐसे सामान के आयात पर रोक लगाने के लिए प्रतिबद्ध नहीं होना चाहते। अमेरिका का कहना है कि बंधुआ मजदूरी से बने उत्पादों को वैश्विक बाजार में जगह नहीं मिलनी चाहिए।

आगे की राह चुनौतीपूर्ण

G20 की बैठक से यह संकेत मिला कि वैश्विक व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अतिरिक्त उत्पादन, टैरिफ और श्रम मानकों जैसे संवेदनशील विषयों पर मतभेद अभी कायम हैं।

फिलहाल G20 देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने पर जोर है। हालांकि, बड़े व्यापारिक हितों और अलग-अलग देशों की औद्योगिक नीतियों के कारण इन मुद्दों पर व्यापक सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

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