
दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA ब्लॉक ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ बड़ी रैली आयोजित की। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे सवाल उठाए। रैली का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया और कथित वोट चोरी रहा। विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।
रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए। नेताओं ने एकजुट होकर चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा का मुद्दा उठाया।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ियों के जरिए मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया जाना चाहिए और कथित वोट चोरी के मामले में कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए भी कहा कि इस मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी। राहुल गांधी ने अपने भाषण में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा को विपक्ष की लड़ाई का प्रमुख मुद्दा बताया।
SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की नाराजगी
INDIA ब्लॉक के नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं और इससे पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
विपक्षी दलों ने मांग की कि SIR प्रक्रिया की समीक्षा हो, मतदाता सूची में नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए और जिन लोगों के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, उन्हें दोबारा शामिल करने का उचित अवसर मिले।
रैली में शामिल कुछ लोगों ने भी दावा किया कि दस्तावेज होने के बावजूद उनके परिवार के सदस्यों के नाम मतदाता सूची में नहीं मिले। हालांकि, ऐसे मामलों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
खड़गे और ममता बनर्जी ने भी सरकार को घेरा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में युवाओं, महिलाओं और दलितों के वोट प्रभावित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेगा।
वहीं, ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और उसकी नीतियों पर सवाल उठाए। अन्य विपक्षी नेताओं ने भी अपने संबोधन में चुनाव आयोग की जवाबदेही, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और मतदाताओं के अधिकारों का मुद्दा उठाया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, भाजपा ने भी किया पलटवार
रैली और मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। मार्च मिंटो रोड से रामलीला मैदान की ओर निकाला गया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के अनुमान में रैली में करीब 50 हजार लोग शामिल हुए, जबकि आयोजकों और अन्य रिपोर्टों में इससे अधिक संख्या का दावा किया गया।
दूसरी ओर, भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए रैली पर सवाल उठाए। भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर राजनीतिक माहौल बिगाड़ने और संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाने का आरोप लगाया।

चुनाव आयोग की भूमिका पर बहस तेज
SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद जारी है। चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाने के लिए पुनरीक्षण जरूरी है तथा इसमें दोहराए गए और अपात्र नामों को हटाने की प्रक्रिया शामिल है। आयोग ने यह भी कहा है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हटे हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।
रामलीला मैदान की इस रैली के बाद साफ है कि SIR और मतदाता सूची का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि विपक्ष की मांगों पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।




