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शेयर बाजार में दिनभर उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी लगभग सपाट बंद

शेयर बाजार में सपाट क्लोजिंग, सेंसेक्स 73,598 और निफ्टी 22,749 पर बंद

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 27 अक्टूबर को कारोबारी सत्र के दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों के बीच सतर्कता बनी रही। दिन के दौरान बाजार ने कई बार संभलने की कोशिश की, लेकिन आईटी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली तथा कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दबाव के कारण प्रमुख सूचकांक बढ़त कायम नहीं रख सके। अंत में सेंसेक्स और निफ्टी मामूली गिरावट के साथ लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए।

बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 8.08 अंक यानी 0.01 प्रतिशत फिसलकर 73,598.67 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 73,762.98 का ऊपरी स्तर और 73,179.41 का निचला स्तर छुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 भी 3.45 अंक यानी 0.02 प्रतिशत गिरकर 22,749.75 अंक पर आ गया। इससे साफ रहा कि बाजार में किसी एक दिशा में मजबूत तेजी या बड़ी गिरावट नहीं आई।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी

जहां बड़ी कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला, वहीं व्यापक बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अच्छी खरीदारी हुई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में लगभग 2.7 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

इससे संकेत मिला कि निवेशकों ने चुनिंदा छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में खरीदारी जारी रखी। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अलग-अलग कंपनियों के नतीजों और कारोबारी संभावनाओं को देखते हुए निवेशकों की प्रतिक्रिया अलग-अलग हो सकती है।

इन शेयरों में दिखी तेजी

कारोबार के दौरान भारती एयरटेल, ट्रेंट, मारुति सुजुकी और पावर ग्रिड जैसे शेयरों में मजबूती देखने को मिली। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स भी प्रमुख तेजी वाले शेयरों में शामिल रहा। रियल्टी, फार्मा और ऑटो सेक्टर में खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया।

दूसरी ओर, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), एक्सिस बैंक, टीसीएस, एशियन पेंट्स और एचडीएफसी बैंक जैसे शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। बैंकिंग और आईटी शेयरों में बिकवाली ने सेंसेक्स और निफ्टी की बढ़त को सीमित रखा।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

बाजार पर दबाव की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रहीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 116 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ था। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव पड़ सकता है।

इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से पहले भी निवेशक सतर्क नजर आए। ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक संकेतों को लेकर अनिश्चितता के कारण बाजार में बड़े दांव लगाने से बचने की प्रवृत्ति दिखाई दी।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, कंपनियों के तिमाही नतीजों, विदेशी निवेश के रुझान और वैश्विक बाजारों पर रहेगी। सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय करने में इन कारकों की अहम भूमिका हो सकती है।

हालांकि, एक दिन की सपाट क्लोजिंग से बाजार के अगले रुझान का निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता। निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय कंपनियों के मूलभूत प्रदर्शन, जोखिम और अपने निवेश लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है।

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