
नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गुरुवार को दिल्ली के भारत मंडपम में शताब्दी समारोह आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समारोह को संबोधित करते हुए UPSC की एक सदी लंबी यात्रा, बदलते भारत और भविष्य की प्रशासनिक चुनौतियों पर विस्तार से बात की। इस दौरान उन्होंने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के साहस और सूझबूझ का भी विशेष रूप से उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कैप्टन स्मित ने जिस साहस का परिचय दिया, वह पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने एक हालिया विमान घटना का जिक्र करते हुए कहा कि इजरायल के प्रधानमंत्री ने भी इस घटना के संदर्भ में कहा कि एक हिंदुस्तानी ने 9/11 जैसी घटना होने से बचा लिया।
विमान में संकट के बीच कैप्टन स्मित ने दिखाई हिम्मत
जानकारी के मुताबिक, दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान में उस समय गंभीर स्थिति पैदा हो गई, जब विमान के को-पायलट पर विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश करने का आरोप लगा। विमान में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे और स्थिति तेजी से गंभीर हो गई।
बताया गया कि भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। इसी दौरान को-पायलट ने कथित तौर पर उन पर धारदार हथियार से हमला किया। इसके बावजूद कैप्टन स्मित ने उसका सामना किया और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की।
इसके बाद विमान में मौजूद यात्रियों ने को-पायलट को काबू में करने में मदद की। आगे की प्रक्रिया में अन्य पायलटों ने विमान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब में उतारा। इस घटना में कैप्टन स्मित की भूमिका को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी विशेष प्रशंसा की।
प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने कैप्टन स्मित के पिता भूपेंद्र भाई, उनकी मां गीता बहन और पत्नी सोनल से भी बातचीत की। उन्होंने देशवासियों से कैप्टन स्मित के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करने की अपील की।
100 साल में बदला देश, कायम रहा UPSC पर भरोसा
UPSC के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने आयोग की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 100 वर्षों की यात्रा के दौरान देश में कई पीढ़ियां बदलीं, सरकारें बदलीं, तकनीक बदली और परीक्षा का स्वरूप भी समय के साथ बदला, लेकिन UPSC पर लोगों का भरोसा कायम रहा।
उन्होंने कहा कि UPSC सिर्फ एक भर्ती संस्था नहीं है, बल्कि देश के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली संस्था है। समारोह के दौरान UPSC की 100 वर्षों की यात्रा से जुड़े अवसर पर एक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया गया। इसके अलावा 100 महत्वपूर्ण केस लॉ का संग्रह भी लॉन्च किया गया।
‘भारत का भविष्य इंतजार कर रहा है’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आने वाले वर्षों को भारत के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है और अगले 20 से 25 वर्ष देश के भविष्य के लिए बेहद अहम होंगे।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को ऐसे प्रशासनिक नेतृत्व की जरूरत है, जो ‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘नागरिक प्रथम’ की भावना के साथ काम करे। उन्होंने ‘नागरिक देवो भवः’ को प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण मंत्र बताया।
AI के दौर में बदलनी होगी सिविल सर्विस की कार्यशैली
प्रधानमंत्री मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि AI कुछ ही समय में हजारों दस्तावेजों को प्रोसेस कर सकता है। ऐसे में बदलती तकनीक और परिस्थितियों के अनुरूप सिविल सर्विसेज में भी नई सोच और नई कार्यशैली की आवश्यकता होगी।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रशासनिक अधिकारियों के सामने पहले से अलग तरह की चुनौतियां होंगी। इसलिए ऐसे युवाओं का चयन जरूरी है, जो केवल पब्लिक ऑफिस नहीं, बल्कि पब्लिक सर्विस की भावना से आकर्षित हों।
गांव-कस्बों से बढ़ी युवाओं की भागीदारी
प्रधानमंत्री ने UPSC में बदलती सामाजिक भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब आयोग की शुरुआत हुई थी, तब बड़े शहरों और संपन्न परिवारों के युवाओं के लिए अवसर अपेक्षाकृत अधिक थे। आज गांवों और कस्बों से आने वाले युवा भी UPSC तक पहुंच रहे हैं।
उन्होंने महिला भागीदारी में वृद्धि का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, UPSC के इतिहास में अब तक चार महिला चेयरपर्सन रही हैं, जिनमें से तीन की नियुक्ति 2014 के बाद हुई।

समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने UPSC की 100 वर्षों की यात्रा को प्रशासनिक विरासत से जोड़ते हुए कहा कि आने वाले दौर में आयोग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होगी। वहीं, कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी का उल्लेख समारोह के सबसे प्रमुख और भावनात्मक प्रसंगों में रहा।




