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कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी के बाद चर्चा में आया सरनेम, जानिए मच्छर नाम का असली मतलब

कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी के बाद चर्चा में आया ‘मच्छर’ सरनेम, जानिए क्या है इसका असली मतलब

फ्लाईदुबई की उड़ान में गंभीर संकट के दौरान अपनी सूझबूझ और साहस से 174 लोगों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार इन दिनों दुनियाभर में चर्चा में हैं। सह-पायलट के कथित हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिसके बाद यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू करने में मदद की। विमान को बाद में सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया। इस घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने कैप्टन स्मित के साहस की सराहना की है।

लेकिन उनकी बहादुरी के साथ उनका सरनेम भी सोशल मीडिया और इंटरनेट सर्च में चर्चा का विषय बन गया है। सवाल उठ रहा है कि आखिर ‘मच्छार’ या ‘मच्छर’ जैसा सरनेम कहां से आया और इसका मतलब क्या है?

गुजरात में मिलता है ‘मच्छार’ सरनेम

दरअसल, ‘मच्छार’ कोई नया या केवल कैप्टन स्मित से जुड़ा हुआ नाम नहीं है। यह गुजरात में पाया जाने वाला एक स्थापित सरनेम है। विभिन्न रिपोर्टों और समाजशास्त्रीय संदर्भों के अनुसार यह नाम नागर ब्राह्मणों के अलावा ब्रह्मक्षत्रिय और लोहाना समुदायों में भी मिलता है। इसलिए केवल सरनेम के आधार पर किसी व्यक्ति की जाति या समुदाय तय करना उचित नहीं होगा।

गुजरात की सरनेम परंपरा में कई ऐसे नाम मिलते हैं जो हिंदी भाषी लोगों को पहली नजर में काफी अलग लग सकते हैं। इनमें मच्छार के अलावा हाथी, घोड़ा, मंकड़, मंकोड़ी, पोपट, विंछी और शियाल जैसे नाम भी शामिल हैं। कुछ नामों का संबंध जानवरों या कीड़ों से दिखाई देता है, जबकि इनके वास्तविक ऐतिहासिक स्रोत अलग-अलग हो सकते हैं।

क्या ‘मच्छार’ का मतलब सिर्फ मच्छर है?

आम हिंदी में ‘मच्छर’ का अर्थ mosquito होता है, इसलिए कैप्टन स्मित का सरनेम सुनते ही लोगों के मन में यही अर्थ आता है। हालांकि सरनेम की ऐतिहासिक उत्पत्ति को लेकर एक ही निश्चित कहानी उपलब्ध नहीं है।

गुजराती सरनेम परंपरा पर 1942 में प्रोफेसर विनोदिनी नीलकंठ की किताब ‘गुजराती अटकनो इतिहास’ में भी चर्चा मिलती है। इसमें बताया गया है कि कई गुजराती उपनाम जगहों, पेशों, व्यक्तिगत विशेषताओं, उपनामों और कभी-कभी मजाक या उपहास से निकले हो सकते हैं। ‘मच्छार’ के मामले में भी अलग-अलग संभावनाएं बताई गई हैं, लेकिन किसी एक व्याख्या को अंतिम और प्रमाणित उत्पत्ति नहीं माना जा सकता।

एक संभावना इसे ‘मत्सर’ जैसे पुराने शब्द से जोड़ती है, जिसका संबंध ईर्ष्या या जलन से है। दूसरी संभावना किसी ऐसे स्थान से जुड़ी हो सकती है जहां मच्छरों की बहुतायत रही हो। इसके अलावा गुजरात में किसी व्यक्ति के शारीरिक गुण, व्यवहार या किसी मजाकिया उपनाम से भी पीढ़ियों बाद पारिवारिक सरनेम बनने की परंपरा रही है।

‘मच्छार’ का एक और अर्थ भी बताया गया

मुंबई के लेखक और पत्रकार सौरभ शाह ने ‘मच्छार’ शब्द के एक अन्य अर्थ की ओर भी ध्यान दिलाया है। उनके अनुसार गुजराती भाषा के ‘भगवद् गोमंडल कोश’ में ‘मच्छार’ के अर्थों में जोश या जुनून का उल्लेख मिलता है। उन्होंने इसी संदर्भ में मंकड़, हाथी, घोड़ा और मंकोड़ी जैसे अन्य सरनेमों का भी जिक्र किया।

यानी ‘मच्छार’ सरनेम की कहानी केवल उसके शाब्दिक अर्थ तक सीमित नहीं है। इसके पीछे गुजरात की पुरानी भाषा, स्थानीय परंपराओं और परिवारों के उपनामों की लंबी कहानी जुड़ी हुई है।

पीएम मोदी से बातचीत के बाद फिर चर्चा में आए स्मित

कैप्टन स्मित मच्छार फिलहाल इलाज के दौर से गुजर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे बातचीत कर उनके साहस की सराहना की। बातचीत के दौरान स्मित ने उस भयावह घटना का जिक्र किया और बताया कि संकट की घड़ी में उन्होंने खुद को संभालते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोलने का फैसला किया।

इस घटना ने ‘मच्छार’ जैसे एक अनोखे गुजराती सरनेम को देशभर में चर्चा में ला दिया है। हालांकि इस नाम की सटीक ऐतिहासिक उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग मत हैं, लेकिन इतना स्पष्ट है कि यह गुजरात की विविध और दिलचस्प नामकरण परंपरा का हिस्सा है।

कैप्टन स्मित मच्छार के मामले में अब इस सरनेम को लोग सिर्फ उसके शाब्दिक अर्थ से नहीं, बल्कि उस साहस और जिम्मेदारी से भी जोड़कर देख रहे हैं, जिसके कारण 174 यात्रियों की जान बची।

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