नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अप्रत्याशित और करारी हार के बाद राजनीतिक गलियारों में हार के कारणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी की चुनावी पराजय पर बड़ा बयान दिया है। ओवैसी ने दावा किया कि भ्रष्टाचार, कुशासन, मुस्लिम समुदाय की उपेक्षा और SIR विवाद ऐसे चार प्रमुख कारण रहे, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस की जड़ों को कमजोर कर दिया और जनता का भरोसा पार्टी से उठ गया।

ANI को दिए एक इंटरव्यू में ओवैसी ने कहा कि ममता बनर्जी सरकार आम लोगों की समस्याओं से पूरी तरह कट चुकी थी। सरकार जनता की अपेक्षाओं और भावनाओं को समझने में विफल रही, जिसका सीधा असर चुनावी नतीजों में देखने को मिला।
भ्रष्टाचार ने बढ़ाई जनता की नाराजगी
ओवैसी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे। विभिन्न घोटालों और विवादों ने सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि जनता में यह धारणा बन गई थी कि सत्ता में बैठे लोग जवाबदेही से बच रहे हैं, जिसके कारण मतदाताओं में नाराजगी बढ़ी और इसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ा।
कुशासन बना बड़ा चुनावी मुद्दा
AIMIM प्रमुख ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक व्यवस्था लगातार कमजोर होती गई। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था, विकास और जनकल्याण से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। जनता को लगा कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने में असफल रही है, जिससे तृणमूल कांग्रेस के प्रति असंतोष बढ़ता गया।
मुस्लिम समुदाय की अनदेखी का आरोप
ओवैसी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी का बड़ा हिस्सा निवास करता है, लेकिन सरकार उनकी सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक समस्याओं को दूर करने में नाकाम रही। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय को केवल चुनावी वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया, जबकि उनके वास्तविक मुद्दों पर गंभीरता से काम नहीं किया गया। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा कि मुस्लिमों को समान अधिकारों वाले नागरिक के रूप में सम्मान और अवसर मिलना चाहिए।
SIR विवाद ने बढ़ाया असंतोष
ओवैसी ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से जुड़े विवाद को भी चुनावी हार का एक महत्वपूर्ण कारण बताया। उनका कहना था कि इस मुद्दे ने जनता के बीच भ्रम और असंतोष पैदा किया। उन्होंने दावा किया कि इस विवाद का राजनीतिक नुकसान तृणमूल कांग्रेस को उठाना पड़ा और चुनाव में इसका असर साफ दिखाई दिया।
OBC प्रमाणपत्र विवाद पर भी उठाए सवाल
AIMIM प्रमुख ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें वर्ष 2010 के बाद जारी किए गए करीब पांच लाख OBC प्रमाणपत्रों को रद्द कर दिया गया था। ओवैसी ने दावा किया कि इनमें लगभग तीन लाख प्रमाणपत्र मुस्लिम समुदाय के लोगों से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के पास इस समस्या के समाधान के लिए पर्याप्त समय था, लेकिन उसने प्रभावी कदम नहीं उठाए। इससे प्रभावित वर्गों में नाराजगी बढ़ी और सरकार के प्रति भरोसा कमजोर हुआ।
चुनाव में BJP की ऐतिहासिक जीत
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 294 में से 206 सीटों पर जीत दर्ज की। बाद में फलता विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी भाजपा ने जीत हासिल की, जिससे उसकी कुल सीटों की संख्या बढ़कर 207 हो गई। दूसरी ओर, पिछले चुनाव में 212 सीटें जीतने वाली तृणमूल कांग्रेस इस बार महज 80 सीटों पर सिमट गई। चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर भी असंतोष देखने को मिला और कई विधायक बगावती रुख अपनाते नजर आए।
ओवैसी का मानना है कि भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलता, मुस्लिम समुदाय की नाराजगी और SIR समेत कई विवादों ने मिलकर तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर दिया। हालांकि, TMC की ओर से अभी तक ओवैसी के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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