
पुलिस आयुक्त Raghuveer Lal ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया बड़ा खुलासा
उत्तर प्रदेश के Kanpur में शिक्षा माफियाओं के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। थाना किदवई नगर पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाकर लोगों से ठगी करने वाले गैंग का भंडाफोड़ करते हुए दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी बिना परीक्षा कराए इंटरमीडिएट से लेकर पीएचडी तक की डिग्रियां बेचने का अवैध कारोबार चला रहे थे।
पूरे मामले का खुलासा पुलिस आयुक्त Raghuveer Lal ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
ऐसे चलता था फर्जी डिग्री का कारोबार
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मनीष उर्फ रवि और अर्जुन यादव के रूप में हुई है। ये लोग फर्जी यूनिवर्सिटी और संस्थानों के नाम पर इंटरमीडिएट, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी तक की फर्जी मार्कशीट, डिग्री, ग्रेड शीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार करते थे।
आरोपी सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों से छात्रों को अपने जाल में फंसाते थे। छात्रों से मोटी रकम लेकर बिना परीक्षा दिए डिग्री उपलब्ध कराने का झांसा दिया जाता था। पुलिस जांच में पता चला है कि कई राज्यों के छात्र इस गिरोह के संपर्क में थे।
भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज, नकली मुहरें, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। बरामद सामग्री में कई विश्वविद्यालयों के नाम से तैयार किए गए नकली प्रमाणपत्र भी शामिल हैं।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अब तक करीब 80 फर्जी माइग्रेशन सर्टिफिकेट जारी किए हैं। जांच में Telangana University समेत कई शिक्षण संस्थानों के नाम के दुरुपयोग की बात सामने आई है।
करोड़ों के लेन-देन के मिले सुराग
पुलिस को इस फर्जीवाड़े से जुड़े करोड़ों रुपये के लेन-देन के सुराग भी मिले हैं। बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
फर्जी अवार्ड शो के नाम पर भी ठगी
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी “GLOBAL BOOK OF EXCELLENCE AWARD UK LONDON” नाम से फर्जी अवार्ड कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को ठगते थे। आरोपी कई सेलिब्रिटीज को अवार्ड देने का दावा कर सोशल मीडिया और इंटरनेट पर प्रचार करते थे, जिससे लोगों में विश्वसनीयता बनाई जा सके।
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी मनीष ने पूछताछ में दुबई यात्रा करने की बात भी कबूली है। आशंका जताई जा रही है कि गिरोह के तार दूसरे राज्यों और विदेशों तक जुड़े हो सकते हैं।
गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
पुलिस आयुक्त Raghuveer Lal ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच अब एसआईटी और क्राइम ब्रांच संयुक्त रूप से कर रही है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में कई स्थानों पर दबिश दी जा रही है।
पुलिस का कहना है कि शिक्षा के नाम पर ठगी करने वाले ऐसे नेटवर्क के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा। अधिकारियों ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि किसी भी डिग्री या प्रमाणपत्र के लिए केवल मान्यता प्राप्त संस्थानों पर ही भरोसा करें।




