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8 से 12 फरवरी 2027 तक होगा आयोजन
भारत के प्रतिष्ठित रक्षा एवं एयरोस्पेस प्रदर्शनी Aero India का 16वां संस्करण वर्ष 2027 में कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित येलहंका एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन 8 से 12 फरवरी 2027 तक चलेगा और इसे अब तक का सबसे बड़ा एयरो इंडिया शो बनाने की तैयारी की जा रही है।
एशिया का सबसे बड़ा एयरोस्पेस और रक्षा आयोजन
Aero India एशिया का सबसे बड़ा द्विवार्षिक (Biennial) एयरोस्पेस और रक्षा प्रदर्शनी है। इसका आयोजन भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग (Department of Defence Production) के तहत किया जाता है। इस बार आयोजन की नोडल एजेंसी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) होगी, जबकि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) सहयोगी एजेंसी के रूप में कार्य करेगी।
क्या होगा खास?
Aero India 2027 में दुनिया भर की प्रमुख रक्षा और एयरोस्पेस कंपनियां अपनी नवीनतम तकनीकों, लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, रक्षा प्रणालियां और अत्याधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन करेंगी। आयोजन में शामिल होंगे—
- शानदार एयर डिस्प्ले और एरोबेटिक प्रदर्शन
- आधुनिक लड़ाकू विमानों की स्टैटिक प्रदर्शनी
- रक्षा कंपनियों के बीच B2B और B2G बैठकें
- स्टार्टअप, MSME और नवाचार प्रदर्शनी
- अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग और निवेश के अवसर
‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
Aero India 2027 का मुख्य उद्देश्य भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण (Defence Manufacturing) का प्रमुख केंद्र बनाना और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना है। यह आयोजन भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ तकनीकी सहयोग, संयुक्त उत्पादन और निर्यात के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। सरकार का लक्ष्य रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात में लगातार वृद्धि करना है।
भारतीय वायुसेना की ताकत का होगा प्रदर्शन
इस एयर शो में भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक विमान जैसे LCA Tejas, Su-30MKI, Rafale, Light Combat Helicopter (Prachand) और अन्य स्वदेशी प्लेटफॉर्म आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। इसके अलावा विदेशी कंपनियां भी अपने आधुनिक सैन्य विमान और रक्षा प्रणालियां प्रदर्शित करेंगी।
वैश्विक रक्षा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण मंच
विशेषज्ञों के अनुसार Aero India केवल एयर शो नहीं, बल्कि वैश्विक रक्षा उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मंच है। यहां अरबों रुपये के रक्षा सौदे, तकनीकी साझेदारियां और निवेश समझौते होने की संभावना रहती है, जिससे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी।




