
गुवाहाटी: असम में अवैध विदेशियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने की कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार ने विधानसभा में अहम जानकारी साझा की है। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार को सदन में बताया कि असम समझौते के प्रावधानों के तहत अब तक 1,72,673 अवैध विदेशियों की पहचान की जा चुकी है। इनमें से 31,789 लोगों को राज्य से वापस भेजा गया है।

मुख्यमंत्री ने यह जानकारी असम गण परिषद (AGP) की विधायक दीप्तिमयी चौधरी के सवाल के लिखित जवाब में दी। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वापस भेजे गए लोग किन देशों के नागरिक थे।
470 लोगों को निर्वासित, 29,663 को सीमा पार भेजा गया
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बताया कि अब तक की गई कार्रवाई में 470 लोगों को निर्वासित किया गया है। इसके अलावा 29,663 लोगों को सीमा पार वापस भेजा गया, जबकि 1,572 लोगों को केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के तहत वापस भेजा गया। वहीं 84 लोगों को निष्कासित किया गया।
73 हजार से अधिक मामलों पर अब भी फैसला बाकी
राज्य के गृह विभाग का प्रभार भी संभाल रहे मुख्यमंत्री ने बताया कि 73,759 संदिग्ध अवैध विदेशियों के मामले अभी भी विदेशी न्यायाधिकरण (Foreigners Tribunals) में लंबित हैं। इन मामलों में न्यायाधिकरण के निर्णय के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
क्या कहता है असम समझौता?
असम समझौते के अनुसार 25 मार्च 1971 या उसके बाद असम में आए विदेशी नागरिकों की पहचान की जानी है। इसके बाद उनके नाम मतदाता सूची से हटाने और कानून के मुताबिक निर्वासन सहित अन्य आवश्यक कार्रवाई का प्रावधान है।
174 विदेशी नागरिक ट्रांजिट कैंप में
मुख्यमंत्री ने सदन को यह भी बताया कि फिलहाल 174 विदेशी नागरिक गोलपाड़ा स्थित ट्रांजिट कैंप में रखे गए हैं। इस केंद्र को पहले निरुद्ध केंद्र (Detention Centre) के नाम से जाना जाता था।
असम में लंबे समय से बड़ा राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दा
असम में अवैध घुसपैठ का मुद्दा कई दशकों से राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील रहा है। राज्य और केंद्र सरकार का कहना है कि अवैध प्रवास से राज्य की जनसांख्यिकी, संसाधनों और आंतरिक सुरक्षा पर असर पड़ा है। वहीं इस विषय पर समय-समय पर राजनीतिक और कानूनी बहस भी होती रही है।




