
अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार और प्रतिबंधों से बचने में कथित मदद करने के आरोप में भारत और तुर्किये से जुड़ी कंपनियों तथा कुछ लोगों पर बड़ा प्रतिबंध लगाया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, भारत में सक्रिय एक नेटवर्क पर आरोप है कि उसने फर्जी समुद्री पंजीकरण और प्रमाणपत्रों के जरिए ईरान का तेल ले जाने वाले प्रतिबंधित जहाजों को अपनी पहचान छिपाकर कारोबार जारी रखने में मदद की। इस कार्रवाई से भारत से जुड़ी कई कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ गई हैं।
यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत उठाया गया है। अमेरिका का कहना है कि इस अभियान का मकसद ईरान की तेल से होने वाली कमाई और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क को कमजोर करना है।
चंडीगढ़ के दंपती पर अमेरिका ने लगाए गंभीर आरोप
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस कार्रवाई के केंद्र में भारत के चंडीगढ़ से जुड़े सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीत शाहिद हैं। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि दोनों ने फर्जी समुद्री रजिस्ट्रेशन और प्रमाणन सेवाओं का नेटवर्क तैयार किया था।
आरोप है कि यह नेटवर्क उन देशों के नाम पर जहाजों का पंजीकरण करता था, जिनकी सरकारों से उसे ऐसी अनुमति नहीं मिली थी। इसके लिए कथित तौर पर वेबसाइट और संस्थाएं बनाई गई थीं, जो जहाजों के रजिस्ट्रेशन, नाविकों के प्रमाणपत्र और अन्य समुद्री सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा करती थीं। अमेरिकी विभाग के अनुसार, यह गतिविधि कम से कम 2014 से चल रही थी।
भारत की नौ कंपनियां प्रतिबंधों के दायरे में
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने दंपती से जुड़ी नौ भारतीय संस्थाओं को प्रतिबंधित सूची में शामिल किया है। इनमें प्रमुख नाम हैं:
- Oceaniek Technologies India
- Aryavart Ship Management Private Limited
- Precept Trends Private Limited
- Polynesia Maritime Private Limited
- Alexarya Finserv Private Limited
- Alexarya Media and Entertainment Private Limited
- Viharaboating Private Limited
- Aryavart Maritime and Educational Trust
इसके अलावा अश्वनी कुमार धीमान और ईश्वरिंदर सिंह को भी इस कार्रवाई में नामित किया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ये लोग संबंधित कंपनियों के संचालन में भूमिका निभाते थे।
तुर्किये की कंपनी पर भी कार्रवाई
अमेरिका ने तुर्किये की कंपनी Fugo Ground Services Inc को भी प्रतिबंधित किया है। उस पर आरोप है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रही ईरानी एयरलाइंस को ग्राउंड हैंडलिंग और अन्य सेवाएं उपलब्ध करा रही थी।
इन एयरलाइंस में ईरान एयर टूर, सहा एयरलाइंस, सेपेहरान एयरलाइंस, वारेष एयरलाइंस, तबान एयरलाइंस और अता एयरलाइंस शामिल हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय का कहना है कि चेतावनियों के बावजूद कंपनी इन सेवाओं को जारी रखे हुए थी।
प्रतिबंध लगने के बाद क्या होगा?
अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत संबंधित व्यक्तियों और कंपनियों की अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में आने वाली संपत्तियां और वित्तीय हित ब्लॉक किए जा सकते हैं। अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों को सामान्य तौर पर इनके साथ कारोबार करने से रोक दिया जाता है, जब तक संबंधित लेनदेन को विशेष अनुमति न मिले।
इसका असर अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, भुगतान और कारोबारी साझेदारियों पर भी पड़ सकता है। अमेरिका ने समुद्री कारोबार से जुड़ी कंपनियों को फर्जी जहाज पंजीकरण और संदिग्ध दस्तावेजों की जांच करने की चेतावनी दी है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या होगा असर?
इस घटनाक्रम के बाद भारत से जुड़ी कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि, यह कार्रवाई संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों पर लगाए गए अमेरिकी आरोपों के आधार पर हुई है। इसे भारत सरकार या भारत के आधिकारिक तौर पर ईरान को तेल प्रतिबंधों से बचाने के समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अमेरिका का संदेश साफ है कि ईरान के तेल और विमानन कारोबार को प्रतिबंधों से बचाने में मदद करने वाले नेटवर्क पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।




