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दिल्ली-NCR में फिर बिगड़ी हवा, कई इलाकों में AQI 307 के पार; प्रदूषण से लोगों की बढ़ी परेशानी

दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर, AQI 370 पहुंचा; कई इलाकों में हवा गंभीर श्रेणी में

दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। हवा की गुणवत्ता खराब होने से लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 307 के पार पहुंचने की खबर है। यह स्तर ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। प्रदूषण बढ़ने के बीच बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए विशेष सावधानी बरतना जरूरी हो गया है।

दिल्ली का औसत AQI 370, कई इलाकों में स्थिति गंभीर

5 नवंबर की सुबह दिल्ली का औसत AQI 370 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है। वहीं राजधानी के 12 निगरानी केंद्रों पर AQI 400 के पार पहुंच गया। जहांगीरपुरी में 459, पंजाबी बाग में 448, नरेला में 434 और अलीपुर में 433 AQI दर्ज किया गया।

दिल्ली के आसपास भी हालात चिंताजनक हैं। नोएडा के सेक्टर-62 में AQI 425 यानी ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गया। गुरुग्राम में 322 और उत्तर प्रदेश के गजरौला में 390 AQI दर्ज किया गया। इससे साफ है कि प्रदूषण का असर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है।

GRAP-2 के तहत लागू हैं सख्त पाबंदियां

प्रदूषण बढ़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 2 नवंबर से दिल्ली-NCR में GRAP के दूसरे चरण के प्रतिबंध लागू किए हैं। इसके तहत प्रशासन को कई कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

  • सड़कों पर मशीनों से सफाई और पानी का छिड़काव बढ़ाना।
  • प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी रखना।
  • निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का सख्ती से पालन कराना।
  • निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाना।
  • सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करना और खुले में कचरा जलाने पर रोक लगाना।

इन उपायों का उद्देश्य हवा में धूल और प्रदूषण फैलाने वाले कणों को कम करना है।

पराली और वाहनों का धुआं बढ़ा रहे प्रदूषण

विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली की हवा खराब होने के पीछे कई कारण हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और आसपास के राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं प्रदूषण बढ़ा रही हैं।

भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के आकलन के मुताबिक, 4 नवंबर को दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान करीब 16.28 प्रतिशत रहा। वहीं स्थानीय परिवहन क्षेत्र का योगदान लगभग 18.17 प्रतिशत आंका गया।

6 और 7 नवंबर को और बिगड़ सकती है हवा

मौसम और वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान के अनुसार दिल्ली में 5 नवंबर को हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रह सकती है। इसके बाद 6 और 7 नवंबर को प्रदूषण ‘गंभीर’ स्तर तक पहुंचने की आशंका है। कम हवा की गति और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां प्रदूषक कणों को वातावरण में जमा कर सकती हैं।

लोगों को बरतनी होगी सावधानी

प्रदूषण के इस दौर में बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी परेशानी वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। जरूरी न हो तो प्रदूषित वातावरण में लंबे समय तक बाहर रहने से बचें। बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क पहनें और खुले में व्यायाम करने से परहेज करें। सांस लेने में परेशानी या लगातार खांसी होने पर डॉक्टर से सलाह लें।

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