
नई दिल्ली: भारतीय मनोरंजन जगत में जब भी पौराणिक कथाओं पर आधारित सबसे सफल प्रस्तुतियों का जिक्र होता है, तो सबसे पहले रामानंद सागर की ‘रामायण’ का नाम लिया जाता है। वर्ष 1987 में दूरदर्शन पर प्रसारित इस धारावाहिक ने न केवल टीवी इतिहास के सारे रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था और भावनाओं से भी गहरा जुड़ाव बनाया। अब लगभग 36 साल बाद निर्देशक नितेश तिवारी इसी कालजयी महाकाव्य को बड़े पर्दे पर अभूतपूर्व पैमाने पर पेश करने जा रहे हैं। रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश जैसे सितारों से सजी ‘रामायण’ अपने कथित 4,000 करोड़ रुपये के संयुक्त बजट को लेकर चर्चा में है, जिसे भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में गिना जा रहा है।

1987 में 7 करोड़ की लागत से बनी थी ऐतिहासिक ‘रामायण’
रामानंद सागर द्वारा निर्मित और निर्देशित ‘रामायण’ उस दौर का सबसे बड़ा टेलीविजन प्रोजेक्ट माना जाता था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पूरे धारावाहिक को बनाने में लगभग 7 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। कुल 76 एपिसोड वाले इस शो पर औसतन 9 लाख रुपये प्रति एपिसोड की लागत आई थी।
धारावाहिक की लोकप्रियता इतनी जबरदस्त थी कि रविवार सुबह प्रसारण के समय सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था। लोग टीवी के सामने परिवार सहित बैठकर इसे देखते थे और शो में भगवान राम, माता सीता तथा हनुमान का किरदार निभाने वाले कलाकारों को वास्तविक देवी-देवताओं की तरह सम्मान देते थे।
कमाई ने बदल दी दूरदर्शन और निर्माताओं की किस्मत
सिर्फ लोकप्रियता ही नहीं, कमाई के मामले में भी ‘रामायण’ ने नया इतिहास रचा। उस समय प्रति एपिसोड लगभग 40 लाख रुपये तक का राजस्व मिलने की बात सामने आई थी। कुल मिलाकर धारावाहिक ने लगभग 31.4 करोड़ रुपये की कमाई की, जो 1980 के दशक के हिसाब से बेहद बड़ी उपलब्धि थी। इस सफलता ने भारतीय टेलीविजन उद्योग को नई दिशा दी और पौराणिक धारावाहिकों की लोकप्रियता को नई ऊंचाई पर पहुंचाया।
36 साल में 571 गुना बढ़ गया बजट
यदि रामानंद सागर की 7 करोड़ रुपये की ‘रामायण’ की तुलना नितेश तिवारी की नई फिल्म से की जाए, तो अंतर बेहद बड़ा दिखाई देता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दो भागों में बन रही फिल्म ‘रामायण’ का संयुक्त बजट लगभग 4,000 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। इस हिसाब से नई फिल्म का बजट 1987 के टीवी धारावाहिक से करीब 571 गुना अधिक है।
तकनीक, वीएफएक्स और वैश्विक प्रस्तुति पर बड़ा दांव
जहां रामानंद सागर की ‘रामायण’ सीमित संसाधनों, साधारण सेट और प्रैक्टिकल इफेक्ट्स के बावजूद अपनी कहानी, संवाद और अभिनय के दम पर अमर बन गई, वहीं नितेश तिवारी की फिल्म आधुनिक तकनीक, हाई-एंड वीएफएक्स और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विजुअल प्रोडक्शन पर आधारित होगी।
फिल्म में भगवान राम की भूमिका रणबीर कपूर, माता सीता की भूमिका साई पल्लवी और रावण का किरदार यश निभा रहे हैं। संगीत में ए.आर. रहमान और हंस जिमर जैसे बड़े नाम भी जुड़े हैं, जिससे इस परियोजना की भव्यता और बढ़ गई है।
55 से अधिक देशों में पहुंची थी रामानंद सागर की ‘रामायण’
1987 की ‘रामायण’ सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही। इसका प्रसारण दुनिया के 55 से अधिक देशों में हुआ और इसने भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई। सीमित तकनीकी संसाधनों के बावजूद इसकी लोकप्रियता कई दशकों तक बनी रही।
कोविड लॉकडाउन में फिर बना रिकॉर्ड
साल 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर ‘रामायण’ का दोबारा प्रसारण किया गया। दोबारा टेलीकास्ट होने के बावजूद धारावाहिक ने व्यूअरशिप के नए रिकॉर्ड बना दिए और करोड़ों लोगों ने इसे फिर से देखा। इसने साबित कर दिया कि रामानंद सागर की प्रस्तुति आज भी दर्शकों के दिलों में उतनी ही मजबूत जगह रखती है।
दिवाली 2026 पर रिलीज होगी नई ‘रामायण’
नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही ‘रामायण: पार्ट 1’ दिवाली 2026 के मौके पर दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जबकि दूसरा भाग अगले वर्ष आने की योजना है। हाल ही में जारी टीजर और ट्रेलर ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा बटोरी है। फिल्म के विजुअल्स और स्केल की सराहना हुई है, वहीं कुछ दर्शकों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
निष्कर्ष
रामानंद सागर की ‘रामायण’ और नितेश तिवारी की आगामी फिल्म दो अलग-अलग दौर की प्रस्तुतियां हैं। एक ओर 1987 का धारावाहिक सीमित बजट, सादगी और भावनात्मक प्रस्तुति के कारण इतिहास बन गया, वहीं दूसरी ओर 2026 की फिल्म आधुनिक तकनीक, विशाल निवेश और वैश्विक स्तर की सिनेमाई प्रस्तुति के साथ नया अध्याय लिखने की तैयारी में है। दोनों के बीच 571 गुना बजट का अंतर भारतीय मनोरंजन उद्योग में पिछले चार दशकों के दौरान आए तकनीकी और आर्थिक बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश करता है।




