
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए चरण में पहुंच गया है। चुनाव आयोग की ओर से ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने वैकल्पिक नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प आयोग को भेज दिए हैं। यह कदम आगामी उपचुनावों को देखते हुए उठाया गया है।
चुनाव आयोग ने गुरुवार को जारी अपने अंतरिम आदेश में टीएमसी के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को मौजूदा पार्टी नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। आयोग ने दोनों पक्षों से 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक तीन-तीन वैकल्पिक नाम और तीन-तीन स्वतंत्र चुनाव चिन्हों के विकल्प देने को कहा था। आयोग इन विकल्पों में से किसी एक नाम और चुनाव चिन्ह को संबंधित गुट के लिए मंजूर कर सकता है।
ममता गुट ने देर रात भेजे विकल्प
रिपोर्टों के मुताबिक, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग के निर्देश का जवाब गुरुवार रात करीब 11:36 बजे ईमेल के जरिए भेजा। हालांकि, गुट ने आयोग के अंतरिम आदेश पर कड़ा विरोध भी दर्ज कराया है। ममता गुट का कहना है कि वह आयोग के आदेश को स्वीकार करने के साथ-साथ अपनी आपत्ति भी दर्ज करा रहा है।
ममता बनर्जी ने वर्ष 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। पार्टी का ‘फूल और घास’ वाला चुनाव चिन्ह लंबे समय से उसकी चुनावी पहचान का अहम हिस्सा रहा है। ऐसे में इस चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगना पार्टी के भीतर चल रहे विवाद को और महत्वपूर्ण बना देता है।
आखिर क्यों बदला टीएमसी का नाम और चिन्ह?
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक अधिकार को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। एक ओर ममता बनर्जी का गुट खुद को पार्टी का वास्तविक नेतृत्वकर्ता मानता है, जबकि दूसरे पक्ष ने संगठनात्मक ढांचे और पार्टी के पदाधिकारियों को लेकर अलग दावा किया है।
चुनाव आयोग के अनुसार उसके सामने पार्टी पर अधिकार को लेकर दो प्रतिद्वंद्वी दावे हैं। इसी वजह से आयोग ने अंतिम फैसला होने तक दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह के साथ उपचुनाव लड़ने की व्यवस्था की है। आयोग ने यह भी कहा है कि अंतिम फैसला बाद में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत किया जाएगा।
उपचुनाव से पहले बढ़ी चुनौती
यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले सामने आया है। इन दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव प्रस्तावित हैं। दोनों गुटों की ओर से उम्मीदवार उतारे जाने के कारण चुनाव आयोग के लिए पार्टी नाम और चिन्ह को लेकर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी हो गया था।
आयोग ने फिलहाल यह व्यवस्था अंतरिम तौर पर लागू की है। इसका मतलब है कि अभी यह अंतिम फैसला नहीं है कि पार्टी का मूल नाम और चुनाव चिन्ह किस गुट को मिलेगा। आयोग को दोनों पक्षों के दावों, दस्तावेजों और संगठनात्मक स्थिति पर आगे विचार करना है।
दूसरे गुट ने भी दिए तीन नाम
ममता गुट के अलावा दूसरे गुट ने भी आयोग के निर्देश के तहत तीन वैकल्पिक नाम और चुनाव चिन्ह भेजे हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस गुट ने ‘नेशनलिस्ट तृणमूल कांग्रेस’, ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘वेस्ट बंगाल तृणमूल कांग्रेस’ नाम सुझाए हैं। चुनाव चिन्ह के लिए ब्लैकबोर्ड, लिफाफा और मशाल के विकल्प दिए गए हैं।
अब चुनाव आयोग को दोनों पक्षों की ओर से भेजे गए विकल्पों में से चुनाव नियमों के अनुसार नाम और चिन्ह तय करने होंगे। इसके बाद आगामी उपचुनावों में दोनों गुट अलग-अलग पहचान के साथ मैदान में उतरेंगे।
अंतिम फैसला अभी बाकी
टीएमसी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चुनाव आयोग का मौजूदा आदेश अंतरिम है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय अलग प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि स्थायी रूप से ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ चिन्ह किस पक्ष के पास रहेगा।

आने वाले दिनों में आयोग की सुनवाई और दोनों पक्षों की ओर से पेश किए जाने वाले दस्तावेज इस विवाद की दिशा तय करेंगे। फिलहाल इतना तय है कि पश्चिम बंगाल के आगामी उपचुनावों में दोनों गुटों को अपने पारंपरिक नाम और चुनाव चिन्ह के बिना मैदान में उतरना होगा।




