
हरदोई – रंजना होटल में तीन अधिवक्ताओं पर जानलेवा हमला
हरदोई में कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। शहर के रंजना होटल में तीन अधिवक्ताओं पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस की कार्यशैली से नाराज़ अधिवक्ताओं ने सड़क पर उतरकर चक्का जाम कर दिया। अधिवक्ताओं का आरोप है कि घटना के मुख्य आरोपी रंजना होटल के मालिक अनुराग शुक्ला और उनके अन्य कर्मचारियों की अब तक गिरफ्तारी नहीं की गई है, जिससे अधिवक्ता समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त है।
हरदोई शहर में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब रंजना होटल में तीन अधिवक्ताओं पर जानलेवा हमला किए जाने के विरोध में बड़ी संख्या में अधिवक्ता सड़क पर उतर आए। अधिवक्ताओं ने शहर की प्रमुख सड़कों को जाम कर दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं का कहना है कि हमले के बाद भी शहर कोतवाल ने किसी भी नामजद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की है।
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस निर्दोष लोगों को गिरफ्तार कर रही है, जबकि असली आरोपियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी को लेकर अधिवक्ताओं ने शहर कोतवाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए “पुलिस मुर्दाबाद” के नारे भी लगाए। अधिवक्ताओं का कहना है कि हरदोई शहर में अपराध और गुंडागर्दी अपने चरम पर है, लेकिन पुलिस प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रही है।
प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने साफ ऐलान किया है कि जब तक रंजना होटल के मालिक अनुराग शुक्ला सहित सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक अधिवक्ताओं की हड़ताल जारी रहेगी। अधिवक्ताओं ने न्याय की मांग को लेकर कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया है, जिससे न्यायिक कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
सड़क जाम और बढ़ते हंगामे की सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकार नगर भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों ने अधिवक्ताओं से बातचीत कर उन्हें शांत कराने की कोशिश की, लेकिन अधिवक्ता अपनी मांगों पर अड़े रहे।
एडिशनल एसपी हरदोई:
एडिशनल एसपी ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और सभी तथ्यों के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
फिलहाल हरदोई में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। अधिवक्ताओं के उग्र प्रदर्शन और चक्का जाम के चलते आम जनता को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले में कब तक ठोस कार्रवाई कर अधिवक्ताओं का गुस्सा शांत कर पाता है।




