
कानपुर: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। इसी बीच कानपुर में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की जनसभा के दौरान मंच व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी की महिला नगर अध्यक्ष रुखसाना वारसी और अन्य महिला पदाधिकारियों के मुख्य मंच पर नजर नहीं आने के बाद इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सामने आए वीडियो में महिला पदाधिकारी मुख्य मंच के बगल में बनाए गए एक अलग मंच पर खड़ी दिखाई दे रही हैं, जबकि मुख्य मंच पर पार्टी के पुरुष पदाधिकारी मौजूद नजर आते हैं।
यह जनसभा AIMIM प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी की मौजूदगी में आयोजित की गई थी। कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय, प्रदेश, जिला और महानगर स्तर के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे थे। ऐसे में मंच की व्यवस्था लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।
मुख्य मंच से अलग दिखाई दीं महिला पदाधिकारी
कार्यक्रम के दौरान रुखसाना वारसी अपनी महिला पदाधिकारियों के साथ मुख्य मंच के बगल में बनाए गए दूसरे मंच पर दिखाई दीं। दूसरी ओर मुख्य मंच पर पार्टी के कई पुरुष नेता और पदाधिकारी मौजूद थे। सामने आए वीडियो को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि महिला नगर अध्यक्ष को मुख्य मंच पर स्थान क्यों नहीं दिया गया।
कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों के मुताबिक, महिला पदाधिकारियों वाले दूसरे मंच के आसपास भी कार्यकर्ताओं की भीड़ दिखाई दे रही थी। भीड़ और धक्का-मुक्की के बीच महिला पदाधिकारी वहां खड़ी नजर आईं। हालांकि, मंच की यह व्यवस्था किस कारण से की गई थी, इसको लेकर पार्टी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया।
इस वजह से सोशल मीडिया और कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, केवल वीडियो के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि महिला पदाधिकारियों को जानबूझकर मुख्य मंच से अलग रखा गया था। इसके पीछे कार्यक्रम की सुरक्षा, मंच की क्षमता या अन्य व्यवस्थागत कारण भी हो सकते हैं।
महिला राजनीतिक भागीदारी पर AIMIM का रुख
कानपुर की जनसभा में मंच व्यवस्था को लेकर चर्चा इसलिए भी अहम हो गई है क्योंकि AIMIM लगातार राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे को उठाती रही है। पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी अलग-अलग मौकों पर मुस्लिम समुदाय, पिछड़े वर्ग और महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।
सितंबर 2023 में संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान ओवैसी ने विधेयक का विरोध किया था। उस समय उन्होंने कहा था कि इसमें मुस्लिम और ओबीसी महिलाओं के लिए अलग प्रतिनिधित्व का प्रावधान नहीं है। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं की संसद में कम राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा उठाते हुए अधिक समावेशी प्रतिनिधित्व की मांग की थी।
ओवैसी और AIMIM का उस समय तर्क था कि केवल महिलाओं के लिए आरक्षण पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन वर्गों की महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए जिनकी संसद में संख्या कम है। इस मुद्दे पर पार्टी का रुख 2023 में संसद के भीतर भी सामने आया था।
कानपुर की तस्वीर से फिर छिड़ी बहस
अब कानपुर की जनसभा में महिला पदाधिकारियों की मंच व्यवस्था को लेकर सामने आई तस्वीर ने इसी व्यापक बहस को स्थानीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। सवाल यह है कि क्या यह केवल कार्यक्रम की व्यवस्थागत मजबूरी थी या पार्टी की स्थानीय आयोजन व्यवस्था में महिलाओं को मुख्य मंच पर पर्याप्त स्थान नहीं मिला।
फिलहाल AIMIM की ओर से इस विशेष मंच व्यवस्था को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इसलिए वायरल वीडियो और कार्यक्रम की तस्वीरों के आधार पर लगाए जा रहे सवालों को पार्टी के जवाब के संदर्भ में देखना जरूरी होगा।
ओवैसी का जनसभा में दिखा अलग अंदाज
कानपुर की इसी जनसभा के दौरान असदुद्दीन ओवैसी का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। उन्होंने मंच से शादीशुदा पुरुषों को अपनी पत्नी से प्यार का इजहार करने की सलाह दी और दिन में कई बार पत्नी से “आई लव यू” कहने की बात कही। उनके इस अंदाज का वीडियो भी सामने आया, जिस पर सोशल मीडिया पर चर्चा हुई।

कुल मिलाकर कानपुर की AIMIM जनसभा में एक तरफ ओवैसी का राजनीतिक संबोधन और दूसरी तरफ मंच की व्यवस्था चर्चा में रही। महिला नगर अध्यक्ष और अन्य महिला पदाधिकारियों के अलग मंच पर नजर आने के बाद महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठे हैं। अब इस व्यवस्था पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक सफाई आती है या नहीं, इस पर सबकी नजर है।




