
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन के दौरान जेलेंस्की ने पुतिन को ‘पेशेंट जीरो’ बताया। उन्होंने दावा किया कि रूस-यूक्रेन युद्ध का असर अब केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अस्थिरता और नए सुरक्षा जोखिम पैदा कर रहा है।
जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के देशों से रूस पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि रूस की युद्ध से होने वाली कमाई को रोकना जरूरी है, ताकि उसकी सैन्य गतिविधियों को कमजोर किया जा सके और युद्ध को आगे बढ़ने से रोका जा सके।
जेलेंस्की ने पुतिन को ‘पेशेंट जीरो’ क्यों कहा?
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को युद्ध की सोच के फैलाव का मुख्य केंद्र बताते हुए ‘पेशेंट जीरो’ शब्द का इस्तेमाल किया। आम तौर पर ‘पेशेंट जीरो’ शब्द का इस्तेमाल किसी बीमारी या संक्रमण के शुरुआती मामले के लिए किया जाता है। जेलेंस्की ने इसी रूपक का इस्तेमाल करते हुए कहा कि युद्ध और हिंसा की विचारधारा पुतिन के नेतृत्व में फैल रही है।
जेलेंस्की के मुताबिक, पुतिन लगातार ऐसे लोगों और देशों की तलाश में रहते हैं जो रूस की सैन्य गतिविधियों में मदद कर सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस का लक्ष्य केवल यूक्रेन के किसी इलाके पर कब्जा करना नहीं है, बल्कि युद्ध को व्यापक स्तर पर फैलाने की क्षमता हासिल करना भी है।
जेलेंस्की ने कहा कि पुतिन को जितनी अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, दुनिया के लिए खतरा उतना ही बढ़ता जाएगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस पर दबाव बढ़ाने और युद्ध को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।
‘युद्ध यूक्रेन तक सीमित नहीं रहा’
जेलेंस्की ने अपने संबोधन में कहा कि रूस की सैन्य गतिविधियों का प्रभाव अब यूक्रेन की सीमाओं से बाहर दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, जहां भी युद्ध फैलता है, वहां दर्द, अस्थिरता, नए जोखिम और संकट पैदा होते हैं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इस दौरान रूस की युद्ध क्षमता को कमजोर करने के लिए उसकी आर्थिक आय पर रोक लगाने की बात भी कही। उनका कहना था कि अगर रूस की युद्ध मशीन को आर्थिक संसाधन मिलते रहेंगे, तो संघर्ष को लंबे समय तक जारी रखने की उसकी क्षमता बनी रहेगी।
रूस पर 47 देशों के नागरिकों के इस्तेमाल का आरोप
जेलेंस्की ने अपने भाषण में रूस पर एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि रूस यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध में 47 देशों के नागरिकों का इस्तेमाल कर रहा है।
जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन को युद्धबंदियों के रूप में केवल उत्तर कोरिया के नागरिक ही नहीं मिलते, बल्कि कई दूसरे देशों के नागरिक भी उसके कब्जे में आए हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को समय-समय पर अलग-अलग देशों से अपने नागरिकों को वापस भेजने के अनुरोध मिलते रहते हैं।
जेलेंस्की ने जिन देशों का नाम लिया, उनमें घाना, नेपाल, ताजिकिस्तान, भारत, यमन, केन्या, जिम्बाब्वे, क्यूबा, बेलारूस, सूडान और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि इन देशों के कुछ नागरिक विभिन्न तरीकों से रूस पहुंचे और बाद में युद्ध में शामिल हुए।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि युद्ध के मैदान में ऐसे लोगों की भी मौत हुई है जो रूस के नागरिक नहीं हैं। उनके मुताबिक, इससे पता चलता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध का प्रभाव कई देशों के नागरिकों तक पहुंच चुका है।
ट्रंप भी युद्ध में हो रही मौतों पर जता चुके हैं चिंता
रूस-यूक्रेन युद्ध में लगातार हो रही मौतों का मुद्दा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी उठा चुके हैं। ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि इस युद्ध में हर महीने करीब 25 हजार लोगों की मौत हो रही है। उन्होंने युद्ध को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
इस पृष्ठभूमि में संयुक्त राष्ट्र महासभा में जेलेंस्की का बयान खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यूक्रेन लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस पर दबाव बढ़ाने की मांग करता रहा है, जबकि युद्ध को समाप्त करने के लिए अलग-अलग स्तर पर कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं।

जेलेंस्की के भाषण का मुख्य संदेश यही रहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष को केवल दो देशों के बीच का युद्ध मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस की युद्ध क्षमता और आर्थिक संसाधनों पर दबाव बढ़ाने तथा संघर्ष को और फैलने से रोकने के लिए सामूहिक कदम उठाने की अपील की।




