
नई दिल्ली: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को दिए गए पद्म श्री सम्मान को वापस लेने की मांग उठी है। हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस सम्मान को वापस लेने और मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की अपील की है। संगठन ने अंसारी के एक हालिया बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि उनकी टिप्पणी से हिंदू दक्षिणपंथी विचारधारा और सांप्रदायिकता को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ है। इस मुद्दे पर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
अमित शाह को पत्र लिखकर क्या मांग की गई?
हिंदू सेना ने अपने ज्ञापन में हामिद अंसारी के सार्वजनिक बयानों और उनके विचारों पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि पद्म श्री जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पाने वाले व्यक्तियों से देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जिम्मेदार रुख की अपेक्षा की जाती है।
हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने मांग की है कि गृह मंत्रालय इस मामले की समीक्षा करे और अंसारी को दिया गया पद्म श्री सम्मान वापस लेने पर विचार किया जाए। संगठन ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया है।
हालांकि, ये हिंदू सेना की ओर से लगाए गए आरोप और सरकार से की गई मांगें हैं। इन्हें किसी आधिकारिक जांच में साबित हुए तथ्यों के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। इस मांग पर केंद्र सरकार की ओर से किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि भी उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।
आखिर हामिद अंसारी ने ऐसा क्या कहा था?
इस विवाद की पृष्ठभूमि में हामिद अंसारी का वह संबोधन है, जिसमें उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की एक पुरानी टिप्पणी का उल्लेख किया था। यह कार्यक्रम संविधान विशेषज्ञ, वरिष्ठ अधिवक्ता और लेखक एजी नूरानी की स्मृति में आयोजित किया गया था।
अंसारी ने नूरानी की वर्ष 2019 में प्रकाशित पुस्तक The RSS: A Menace to India का हवाला देते हुए नेहरू के उस कथन का जिक्र किया, जिसमें भारत के लिए साम्यवाद की तुलना में हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को खतरा बताया गया था।
अंसारी ने अपने भाषण में नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बीच अंतर पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में ऐसी प्रवृत्तियां सामने आई हैं, जो नागरिक राष्ट्रवाद की स्थापित अवधारणा को चुनौती देती हैं। उनके अनुसार, चुनावी बहुमत को धार्मिक बहुमत के रूप में प्रस्तुत करने और राजनीतिक सत्ता पर एकाधिकार की कोशिशों से जुड़े सवालों पर विचार करना जरूरी है।
भाजपा ने भी की थी टिप्पणी की आलोचना
हामिद अंसारी के बयान के बाद भाजपा नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी थी। पार्टी की ओर से उनकी टिप्पणी पर सवाल उठाए गए और इसे राजनीतिक विचारधारा से जोड़कर देखा गया। इस घटनाक्रम ने राष्ट्रवाद, धार्मिक पहचान और सांप्रदायिकता को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया।
पद्म श्री सम्मान वापस लेने का फैसला कौन करेगा?
पद्म श्री देश के प्रमुख नागरिक सम्मानों में से एक है। किसी व्यक्ति से यह सम्मान वापस लेने की मांग उठने और सरकार की ओर से औपचारिक निर्णय लिए जाने के बीच अंतर है। इस मामले में हिंदू सेना ने गृह मंत्री से हस्तक्षेप करने की अपील की है, लेकिन मांग किए जाने भर से सम्मान स्वतः वापस नहीं हो जाता।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक बयानबाजी और नागरिक सम्मान की समीक्षा की मांग को लेकर चर्चा में है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार या संबंधित मंत्रालय इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है या नहीं।




