
बिहार का मिथिला मखाना अब 20 से अधिक देशों के बाजारों में अपनी पहचान बना चुका है। राज्य सरकार ने 2030-31 तक निर्यात बढ़ाकर 30 हजार मीट्रिक टन करने और खेती का रकबा दोगुना करने की योजना बनाई है। इससे किसानों की आय बढ़ाने और बिहार को अंतरराष्ट्रीय मखाना कारोबार का प्रमुख केंद्र बनाने की उम्मीद है।
पटना। बिहार के मखाने की मांग देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी तेजी से बढ़ रही है। अपनी गुणवत्ता और विशिष्ट पहचान के कारण मिथिला मखाना विदेशी बाजारों में जगह बना रहा है। राज्य के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को बताया कि बिहार का मखाना 20 से अधिक देशों तक पहुंच चुका है। सरकार अब इसके निर्यात को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी में जुटी है। इसके तहत वित्त वर्ष 2030-31 तक मखाना का निर्यात बढ़ाकर 30 हजार मीट्रिक टन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
राज्य सरकार का मानना है कि मखाना उत्पादन और निर्यात में बढ़ोतरी से किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा। साथ ही, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और कारोबार से जुड़े क्षेत्रों में भी नए अवसर पैदा होंगे।
पांच साल तक चलेगा ‘मखाना से समृद्धि अभियान’
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के मुताबिक, बिहार सरकार वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए ‘मखाना से समृद्धि अभियान’ चला रही है। इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य मखाना की खेती का क्षेत्रफल बढ़ाना, उत्पादन में सुधार करना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिहार की हिस्सेदारी को मजबूत करना है।
सरकार की योजना के अनुसार, मखाना की खेती का रकबा वित्त वर्ष 2025-26 के लगभग 41 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर 2030-31 तक 82 हजार हेक्टेयर किया जाएगा। यानी अगले पांच वर्षों में खेती का क्षेत्रफल दोगुना करने की तैयारी है। इसके साथ ही उत्पादन क्षमता बढ़ाने और किसानों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
देश के कुल उत्पादन में बिहार की 80 से 85 प्रतिशत हिस्सेदारी
मखाना उत्पादन के मामले में बिहार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। कृषि मंत्री के अनुसार, देश में उत्पादित होने वाले कुल मखाने में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 80 से 85 प्रतिशत है। इस मजबूत स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार अब मखाना को स्थानीय कृषि उत्पाद से आगे बढ़ाकर अंतरराष्ट्रीय कारोबार के महत्वपूर्ण उत्पाद के रूप में स्थापित करना चाहती है।
मिथिला मखाना को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई (GI) टैग प्राप्त है। इससे इस उत्पाद की क्षेत्रीय पहचान को मजबूती मिलती है। कृषि विभाग कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से मिथिला मखाना को वैश्विक बाजार में विशिष्ट पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रहा है।
20 से अधिक देशों में पहुंचा मखाना, 2.2 करोड़ डॉलर की आय
कृषि मंत्री के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 20 से अधिक देशों को 7,200 मीट्रिक टन से अधिक मखाना और उससे बने उत्पादों का निर्यात किया। इससे करीब 2.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर की आय हुई।
अमेरिका, पश्चिम एशिया और अफ्रीका सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मखाने की मांग बढ़ रही है। इसी क्रम में इस वर्ष जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाने की खेप अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ग्रीस तक पहुंची है। इन बाजारों में बढ़ती पहुंच को बिहार के मखाना कारोबार के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पहली बार समुद्री मार्ग से ऑस्ट्रेलिया भेजी गई 18 टन की खेप
बिहार के मखाना निर्यात के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) के बिहटा औद्योगिक क्षेत्र से जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाने की 18 मीट्रिक टन की खेप पहली बार समुद्री मार्ग से ऑस्ट्रेलिया भेजी गई।
यह उपलब्धि बिहार के मखाना उत्पादकों और निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर खोल सकती है। समुद्री मार्ग से बड़ी खेप भेजे जाने से अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने और विदेशी बाजारों तक पहुंच बढ़ाने की संभावनाएं बनती हैं।
किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का जोर
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि मखाना की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, जीआई टैग के माध्यम से इसकी पहचान मजबूत करने और किसानों की बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने से उनकी आय बढ़ाने के नए अवसर पैदा होंगे।
सरकार के सामने अब उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ निर्यात के निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने की चुनौती भी होगी। इसके लिए खेती का विस्तार, गुणवत्ता पर ध्यान, प्रसंस्करण सुविधाओं का विकास और विदेशी बाजारों में मांग के अनुरूप आपूर्ति महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कुल मिलाकर, बिहार सरकार का ‘मखाना से समृद्धि अभियान’ राज्य के पारंपरिक कृषि उत्पाद को वैश्विक बाजार में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप उत्पादन और निर्यात में वृद्धि होती है, तो इससे बिहार के किसानों, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों को लाभ मिलने की संभावना है।




