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योगी कैबिनेट के दो बड़े फैसले, पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण, 18 शहरों में इलेक्ट्रिक बसें

योगी कैबिनेट के दो बड़े फैसले: पूर्व अग्निवीरों को 20% आरक्षण, 18 शहरों में चलेंगी 1725 इलेक्ट्रिक बसें

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और शहरी परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में दो अहम फैसले लिए हैं। 9 अक्टूबर 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में पूर्व अग्निवीरों को राज्य सरकार के कुछ विभागों की भर्तियों में 20 प्रतिशत आरक्षण देने और प्रदेश के 18 शहरों में 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इन फैसलों से एक ओर सैन्य सेवा पूरी कर चुके युवाओं को सरकारी नौकरी पाने में मदद मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर शहरों में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बढ़ाने की योजना को गति मिलेगी।

पूर्व अग्निवीरों को चार विभागों की भर्तियों में मिलेगा आरक्षण

योगी कैबिनेट ने पूर्व अग्निवीरों की भर्ती नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत पुलिस, वन, कारागार और परिवहन विभाग की भर्तियों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इस निर्णय का उद्देश्य सैन्य सेवा पूरी करने के बाद युवाओं को राज्य सरकार की नौकरियों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

अग्निवीर योजना के तहत सेना में भर्ती होने वाले युवाओं की सेवा अवधि पूरी होने के बाद रोजगार एक महत्वपूर्ण विषय रहता है। ऐसे में राज्य सरकार का यह कदम उनके अनुभव और प्रशिक्षण का उपयोग सरकारी सेवाओं में करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

अधिकतम आयु सीमा 25 से बढ़ाकर 28 वर्ष

पूर्व अग्निवीरों को भर्ती प्रक्रिया में राहत देने के लिए अधिकतम आयु सीमा में भी बदलाव किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, निर्धारित भर्तियों के लिए उनकी अधिकतम आयु सीमा 25 वर्ष से बढ़ाकर 28 वर्ष कर दी गई है। इससे पात्र अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए तीन वर्ष की अतिरिक्त आयु सीमा का लाभ मिलेगा।

इसके अलावा, पूर्व अग्निवीरों को संबंधित भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और शारीरिक परीक्षा से छूट देने का प्रावधान बताया गया है। उन्हें मेडिकल परीक्षण से गुजरना होगा। अभ्यर्थियों को उनकी मूल श्रेणी के अनुसार आरक्षण का लाभ भी मिलेगा।

हालांकि, इन सुविधाओं का लाभ किन पदों, किन शर्तों और किस प्रक्रिया के तहत मिलेगा, इसके लिए संशोधित भर्ती नियमावली और संबंधित विभागों के आधिकारिक निर्देश महत्वपूर्ण होंगे। अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पहले पात्रता संबंधी शर्तों की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए।

18 शहरों में 1725 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी

कैबिनेट बैठक में शहरी परिवहन को मजबूत बनाने के लिए 18 शहरों में कुल 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इस योजना में लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर और आगरा सहित प्रदेश के कई प्रमुख शहर शामिल हैं।

योजना के तहत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की तैयारी है। नोएडा के साथ जेवर क्षेत्र को भी इसमें शामिल किया गया है।

इन बसों के शुरू होने से यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन के अधिक विकल्प मिलने की उम्मीद है। खासकर नौकरी, पढ़ाई और रोजमर्रा के काम के लिए यात्रा करने वाले लोगों को इससे फायदा हो सकता है। हालांकि, वास्तविक सुविधा बसों के रूट, फेरे, उपलब्धता और संचालन शुरू होने की तारीख पर निर्भर करेगी।

निजी ऑपरेटर संभालेंगे संचालन, किराया सरकार तय करेगी

इलेक्ट्रिक बसों का संचालन ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट मॉडल के तहत निजी ऑपरेटरों के माध्यम से किया जाएगा। बसों की खरीद, चार्जिंग उपकरणों की व्यवस्था, चालकों और तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती तथा रखरखाव की जिम्मेदारी निजी ऑपरेटरों पर होगी। इसके लिए 12 वर्ष की अवधि का अनुबंध प्रस्तावित है।

बसों का किराया राज्य सरकार तय करेगी। वहीं, डिपो निर्माण के लिए संबंधित नगर निगम और नोएडा प्राधिकरण जरूरत के अनुसार निशुल्क भूमि उपलब्ध कराएंगे। निजी ऑपरेटरों को निर्धारित प्रदर्शन मानकों के आधार पर संचालन और रखरखाव शुल्क दिया जाएगा।

फिलहाल, रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 15 नगर निगमों में 743 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो रही हैं। नई योजना के तहत 1725 अतिरिक्त बसों का संचालन शहरी परिवहन नेटवर्क को और व्यापक बनाने की दिशा में कदम है।

रोजगार और परिवहन पर सरकार का फोकस

योगी कैबिनेट के दोनों फैसले अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े हैं, लेकिन इनका सीधा संबंध युवाओं और शहरी नागरिकों की जरूरतों से है। पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण और भर्ती प्रक्रिया में राहत से सरकारी रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, इलेक्ट्रिक बसों की योजना से शहरों में सार्वजनिक परिवहन को विस्तार देने का लक्ष्य है।

अब इन फैसलों का वास्तविक लाभ संशोधित भर्ती नियमावली के क्रियान्वयन और इलेक्ट्रिक बसों के चरणबद्ध संचालन पर निर्भर करेगा। आने वाले समय में संबंधित विभागों के दिशा-निर्देश और बसों के रूट संबंधी घोषणाएं इन योजनाओं की आगे की स्थिति स्पष्ट करेंगी।

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