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Mainpuri Rape Case : मैनपुरी में 14 वर्षीय दलित किशोरी से दुष्कर्म मामले में दोषी को उम्रकैद, एक लाख रुपये जुर्माना

मैनपुरी में 14 वर्षीय दलित किशोरी को मिला इंसाफ, दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद; एक लाख रुपये का जुर्माना

मैनपुरी, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में नाबालिग दलित किशोरी से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। विशेष पॉक्सो अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी महावीर यादव को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, मामले में शामिल दूसरे आरोपी नवीचंद्र यादव को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण बरी कर दिया गया। यह फैसला नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की अहमियत को रेखांकित करता है।

खेत में गई थी किशोरी, तभी हुई वारदात

प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, घटना मैनपुरी के कुरावली थाना क्षेत्र की है। पीड़िता नौवीं कक्षा में पढ़ती थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 15 सितंबर 2025 को किशोरी अपने मवेशियों के लिए चारा जुटाने के सिलसिले में खेत की ओर गई थी। इसी दौरान दोनों आरोपियों पर उसे पकड़ने और उसके साथ यौन अपराध करने का आरोप लगा।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि घटना के संबंध में पीड़िता को चुप रहने के लिए धमकाया गया था। डर के कारण किशोरी शुरुआत में अपने परिवार को पूरी बात नहीं बता सकी। बाद में परिवार को घटना से जुड़े कथित वीडियो की जानकारी मिली, जिसके बाद पुलिस से शिकायत की गई।

शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की जांच

पीड़िता के परिवार की शिकायत पर कुरावली थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच के दौरान संबंधित साक्ष्य जुटाए, बयान दर्ज किए और चिकित्सकीय जांच समेत जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कीं। जांच के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अपना फैसला सुनाया।

मुख्य आरोपी को उम्रकैद, एक लाख रुपये का जुर्माना

विशेष पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश जहेंद्र पाल सिंह ने महावीर यादव को नाबालिग से दुष्कर्म के अपराध में दोषी ठहराया। उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।

रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने दूसरे आरोपी नवीचंद्र यादव को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण बरी कर दिया। यानी अदालत ने दोनों आरोपियों के संबंध में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अलग-अलग निर्णय दिया। अभियोजन पक्ष की पैरवी अतिरिक्त जिला सरकारी अधिवक्ता शैलेंद्री राजपूत ने की।

नाबालिगों के खिलाफ अपराधों में साक्ष्य की अहम भूमिका

यह मामला एक बार फिर बताता है कि यौन अपराधों की शिकायतों में समय पर पुलिस को सूचना देना, पीड़ित को सुरक्षा उपलब्ध कराना और जांच के दौरान साक्ष्यों को सुरक्षित रखना कितना महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में पॉक्सो कानून बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने के लिए बनाया गया है।

अदालत का फैसला पीड़िता के मामले में न्यायिक कार्रवाई का महत्वपूर्ण पड़ाव है। हालांकि, दूसरे आरोपी को बरी किए जाने की बात भी खबर का जरूरी हिस्सा है, क्योंकि आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि न्यायालय के सामने प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी मानकों के आधार पर होती है।

नोट: यह समाचार प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर नए शब्दों और संरचना में तैयार किया गया है। पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली कोई व्यक्तिगत जानकारी शामिल नहीं की गई है।

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