अल-नीनो की दस्तक से बढ़ी सूखे की आशंका, WMO की चेतावनी से मानसून पर चिंता
वैश्विक मौसम को लेकर WMO की बड़ी चेतावनी
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने वैश्विक जलवायु परिस्थितियों को लेकर नई चेतावनी जारी की है। संगठन के मुताबिक आने वाले महीनों में अल-नीनो (El Niño) की स्थिति विकसित होने की संभावना बढ़ रही है, जिसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ सकता है। भारत समेत एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई क्षेत्रों में कम बारिश और सूखे जैसी परिस्थितियां बनने का खतरा जताया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अल-नीनो प्रभाव मजबूत होता है तो वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी और चरम मौसम घटनाओं की आशंका भी बढ़ सकती है।
क्या है अल-नीनो?
अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से के समुद्री सतह तापमान के सामान्य से अधिक गर्म होने पर विकसित होती है। इसका असर दुनिया भर के मौसम चक्र पर पड़ता है।
जब अल-नीनो सक्रिय होता है, तब कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होती है जबकि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं।
भारत के मानसून पर क्या पड़ेगा असर?
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून कृषि और जल संसाधनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अल-नीनो की स्थिति बनने पर मानसून की रफ्तार और बारिश की मात्रा प्रभावित हो सकती है।
हालांकि केवल अल-नीनो के आधार पर मानसून का अंतिम आकलन नहीं किया जाता। भारतीय मौसम विभाग (IMD) अन्य महासागरीय और वायुमंडलीय कारकों पर भी नजर रखता है। फिर भी अल-नीनो की स्थिति किसानों और नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
सूखे का क्यों बढ़ जाता है खतरा?
अल-नीनो के दौरान:
- कई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा होती है।
- मिट्टी में नमी की कमी हो सकती है।
- जलाशयों और नदियों का जलस्तर प्रभावित हो सकता है।
- फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
- गर्मी की लहरें अधिक तीव्र हो सकती हैं।
इसी वजह से अल-नीनो वर्षों में सूखे का जोखिम बढ़ जाता है।
किसानों के लिए बढ़ी चिंता
भारत की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है और खेती का बड़ा हिस्सा मानसूनी बारिश पर आधारित है। यदि बारिश सामान्य से कम होती है तो धान, मक्का, दालों और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञ किसानों को मौसम विभाग की सलाह और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों के निर्देशों पर नजर बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।
आने वाले महीनों पर रहेगी नजर
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ महीनों में प्रशांत महासागर की परिस्थितियों और मानसूनी गतिविधियों की लगातार निगरानी की जाएगी। अल-नीनो का प्रभाव कितना मजबूत होगा और इसका भारत के मानसून पर कितना असर पड़ेगा, इसकी स्पष्ट तस्वीर आगे के मौसम आंकड़ों से सामने आएगी।
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