
नई दिल्ली: भारत और नेपाल के बीच दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) समझौते के तहत होने वाले ड्यूटी फ्री व्यापार को लेकर अब नया विवाद सामने आया है। भारत के खाद्य तेल उद्योग ने आरोप लगाया है कि नेपाल से शुल्क-मुक्त रिफाइंड खाद्य तेल का आयात असामान्य रूप से तेजी से बढ़ रहा है, जिससे घरेलू रिफाइनिंग उद्योग, तिलहन किसानों और सरकारी राजस्व पर गंभीर असर पड़ रहा है। उद्योग संगठन इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) ने केंद्र सरकार से इस पूरे मामले की तत्काल समीक्षा करने और SAFTA नियमों के दुरुपयोग की जांच कराने की मांग की है।

आईवीपीए के अनुसार, नेपाल में पाम ऑयल और सोयाबीन जैसी तिलहनी फसलों का उत्पादन बेहद सीमित है। इसके बावजूद पिछले कुछ वर्षों में वहां से भारत आने वाले रिफाइंड खाद्य तेल के आयात में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। उद्योग का कहना है कि यह बढ़ोतरी सामान्य व्यापारिक मांग के अनुरूप नहीं बल्कि SAFTA के तहत मिलने वाली शुल्क छूट का लाभ उठाने का परिणाम हो सकती है।
दो साल में 17 गुना बढ़ा आयात
एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023 में नेपाल से भारत ने 47,295 टन रिफाइंड खाद्य तेल का आयात किया था। वर्ष 2024 में यह बढ़कर 1,24,056 टन पहुंच गया, जबकि 2025 में यह आंकड़ा सीधे 8.04 लाख टन के पार निकल गया। यानी केवल दो वर्षों में आयात लगभग 17 गुना बढ़ गया।
उद्योग का अनुमान है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहे तो निकट भविष्य में नेपाल से खाद्य तेल आयात 10 लाख टन के करीब पहुंच सकता है। ऐसा होने पर नेपाल भारत को रिफाइंड खाद्य तेल की आपूर्ति करने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल हो जाएगा।
घरेलू उद्योग और किसानों पर असर
आईवीपीए का कहना है कि भारतीय रिफाइनर जब अन्य देशों से कच्चा या रिफाइंड खाद्य तेल आयात करते हैं तो उन्हें निर्धारित आयात शुल्क और सेस का भुगतान करना पड़ता है। वहीं SAFTA के तहत नेपाल से आने वाले रिफाइंड खाद्य तेल पर कोई आयात शुल्क नहीं लगता। इससे भारतीय उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर हो रही है।
एसोसिएशन का मानना है कि इसका सीधा असर देश के तिलहन किसानों पर भी पड़ रहा है क्योंकि घरेलू उत्पादन और प्रोसेसिंग को नुकसान पहुंचने से किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना कम हो सकती है।
सरकार को हर साल हजारों करोड़ का नुकसान
उद्योग संगठन का दावा है कि नेपाल से बढ़ते शुल्क-मुक्त आयात के कारण केंद्र सरकार को हर साल 2,000 से 2,500 करोड़ रुपये तक के राजस्व का नुकसान हो सकता है। यदि इस स्थिति पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो घरेलू खाद्य तेल उद्योग पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
SAFTA नियमों की जांच की मांग
आईवीपीए के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने कहा कि भारत हमेशा से क्षेत्रीय व्यापार सहयोग का समर्थक रहा है, लेकिन व्यापारिक व्यवस्था, टैरिफ नीति और घरेलू वैल्यू एडिशन के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि SAFTA के तहत लागू Rules of Origin (RoO) और CAROTAR 2020 के प्रावधानों के अनुसार विस्तृत जांच कराई जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि केवल उन्हीं उत्पादों को शुल्क छूट मिले जो वास्तव में निर्धारित मूल-उद्गम नियमों को पूरा करते हैं।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक
भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक देश है। घरेलू मांग और उत्पादन के बीच बड़े अंतर को पूरा करने के लिए देश बड़ी मात्रा में पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और अन्य खाद्य तेलों का आयात करता है। सरकार किसानों के हितों की रक्षा और घरेलू उद्योग को समर्थन देने के लिए अधिकांश देशों से आने वाले खाद्य तेल पर आयात शुल्क लगाती है, लेकिन SAFTA सदस्य देशों के लिए अलग व्यवस्था लागू है। ऐसे में उद्योग संगठन का कहना है कि मौजूदा स्थिति की समीक्षा कर व्यापार और घरेलू हितों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक हो गया है।




