
नई दिल्ली: पेट्रोल में मिलाए जाने वाले एथेनॉल का इस्तेमाल अब केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। केंद्र सरकार इसे घरेलू रसोई तक पहुंचाने की तैयारी में है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ऐसी नई ‘क्लीन कुकिंग पॉलिसी’ तैयार कर रहा है, जिसके तहत एथेनॉल को एलपीजी के विकल्प के रूप में खाना पकाने के ईंधन के तौर पर अपनाया जा सकेगा। इस नीति का उद्देश्य स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना, एलपीजी पर निर्भरता कम करना और देश के आयातित ईंधन बिल में कमी लाना है।

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस नई नीति का मसौदा अंतिम चरण में है और इसे सितंबर 2026 तक तैयार किया जा सकता है। यदि यह योजना लागू होती है, तो देश में घरेलू ईंधन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
सरकार क्यों ला रही है नई योजना?
भारत हर साल बड़ी मात्रा में एलपीजी और कच्चे तेल का आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर भारी खर्च होता है। दूसरी ओर, देश में एथेनॉल का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार चाहती है कि अतिरिक्त उपलब्ध एथेनॉल का उपयोग घरेलू ईंधन के रूप में किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे तीन बड़े फायदे होंगे—
- एलपीजी पर निर्भरता कम होगी।
- कच्चे तेल के आयात पर खर्च घटेगा।
- स्वच्छ और हरित ईंधन को बढ़ावा मिलेगा।
एथेनॉल एटीएम लगाने की तैयारी
नई योजना का सबसे खास हिस्सा ‘एथेनॉल एटीएम’ हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल एटीएम लगाने के निर्देश दे सकती है।
इन एटीएम के जरिए लोग अपनी जरूरत के अनुसार एथेनॉल खरीद सकेंगे और विशेष एथेनॉल चूल्हों में इसका इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे सिलेंडर बुकिंग और रिफिल की झंझट भी काफी हद तक कम हो सकती है।
सब्सिडी भी मिल सकती है
सरकार इस योजना को सफल बनाने के लिए सब्सिडी देने पर भी विचार कर रही है। माना जा रहा है कि शुरुआती चरण में—
- एथेनॉल चूल्हों पर सब्सिडी दी जा सकती है।
- एथेनॉल ईंधन की कीमत नियंत्रित रखी जा सकती है।
- वितरण नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए विशेष सहायता दी जा सकती है।
इससे आम लोगों के लिए नई तकनीक अपनाना आसान होगा।
पहले से हो रहा है परीक्षण
इस दिशा में सरकार पहले ही कदम बढ़ा चुकी है। अप्रैल 2026 में जानकारी सामने आई थी कि घरेलू उपयोग के लिए विशेष एथेनॉल स्टोव का परीक्षण किया जा रहा है। इन चूल्हों की सुरक्षा, ईंधन दक्षता और उपयोग में आसानी की जांच की जा रही है।
यदि परीक्षण सफल रहता है, तो जल्द ही इन्हें बाजार में उतारा जा सकता है।
भारत में एथेनॉल की कमी नहीं
देश में एथेनॉल उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत की वार्षिक एथेनॉल उत्पादन क्षमता 20 अरब लीटर से अधिक हो चुकी है। वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 4 अरब लीटर अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की संभावना है।
सरकार के E20 ब्लेंडिंग कार्यक्रम में हर साल लगभग 11 अरब लीटर एथेनॉल का उपयोग होता है। वहीं शराब, दवा और रसायन उद्योग लगभग 3 से 3.5 अरब लीटर एथेनॉल की खपत करते हैं।
इसके बाद भी देश में लगभग 7 अरब लीटर एथेनॉल अतिरिक्त उपलब्ध रहने का अनुमान है।
निर्यात की भी तैयारी
घरेलू जरूरत पूरी होने के बाद भारत अतिरिक्त एथेनॉल का निर्यात भी कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों को एथेनॉल निर्यात करने की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है।
इससे भारतीय एथेनॉल उद्योग को नया बाजार मिलेगा और किसानों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की उम्मीद है।
किसानों को भी होगा फायदा
एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। यदि घरेलू स्तर पर इसकी मांग बढ़ती है, तो किसानों की फसलों की मांग भी बढ़ेगी। इससे कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा हो सकता है।
क्या बदल सकती है देश की रसोई?
यदि सरकार की यह योजना सफल होती है, तो आने वाले वर्षों में भारतीय रसोई में एलपीजी के साथ-साथ एथेनॉल भी एक प्रमुख ईंधन बन सकता है। इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, आयातित ईंधन पर खर्च घटेगा और भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा सकेगा।
हालांकि, नई नीति लागू होने से पहले सुरक्षा मानकों, एथेनॉल स्टोव की उपलब्धता, कीमत और वितरण व्यवस्था जैसे कई पहलुओं पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन चुनौतियों का समाधान हो जाता है, तो यह योजना देश के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।




