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Digital Arrest : डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर साइबर ठगों ने व्यक्ति से ठगे पूरे पैंतीस लाख रुपये

साइबर ठगों का नया जाल: 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर 35 लाख रुपये की ठगी, एंटी टेरर अधिकारी बनकर डराया, पुलिस ने शुरू की जांच

बठिंडा: देशभर में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ठग अब लोगों को डराने और मानसिक दबाव में लाकर बड़ी रकम ऐंठने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। पंजाब के बठिंडा से सामने आए एक ताजा मामले में साइबर अपराधियों ने खुद को एंटी टेररिस्ट विंग का अधिकारी बताकर एक व्यक्ति को कथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ में फंसा लिया और उससे 35 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के लिए फंडिंग का डर दिखाकर रकम ट्रांसफर करवाई गई। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

फोन कॉल से शुरू हुआ ठगी का खेल

जानकारी के अनुसार, बठिंडा के सराभा नगर निवासी अशोक कुमार ने थाना साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले उनके पास एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को एंटी टेररिस्ट विंग का अधिकारी बताया और बेहद गंभीर लहजे में बात करते हुए कहा कि उनके बैंक खाते से करीब 2.5 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की गई है।

आरोपी ने दावा किया कि यह रकम कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल की गई है। इतना ही नहीं, उसने यह भी कहा कि इस पूरे लेन-देन में अशोक कुमार को 25 लाख रुपये कमीशन मिला है, जिसके चलते वह जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।

निजी जानकारी बताकर बढ़ाया भरोसा

शिकायत के अनुसार, ठग ने बातचीत के दौरान पीड़ित की निजी और संपत्ति से जुड़ी कुछ जानकारियां भी बताईं। इससे अशोक कुमार को लगा कि कॉल वास्तव में किसी सरकारी एजेंसी की ओर से किया गया है। इसी का फायदा उठाकर आरोपी ने उन्हें कानूनी कार्रवाई, गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त किए जाने का डर दिखाया।

इसके बाद ठग ने कहा कि यदि वह जांच में सहयोग करना चाहते हैं तो उन्हें तत्काल एक बताए गए बैंक खाते में 35 लाख रुपये जमा कराने होंगे। लगातार दबाव और गिरफ्तारी के डर के कारण पीड़ित ने आरोपी के बताए खाते में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी।

रकम मिलने के बाद भी नहीं रुके ठग

पीड़ित ने बताया कि 35 लाख रुपये जमा कराने के बाद भी साइबर ठगों की मांग खत्म नहीं हुई। कुछ समय बाद आरोपियों ने फिर संपर्क किया और अतिरिक्त रकम जमा कराने का दबाव बनाने लगे। तब उन्हें शक हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की शिकायत साइबर क्राइम पुलिस से की।

पुलिस ने दर्ज किया मामला

शिकायत के आधार पर थाना साइबर क्राइम सेल ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और साइबर अपराध से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी।

क्या होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’?

‘डिजिटल अरेस्ट’ कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। साइबर ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल या फोन पर घंटों तक डराते हैं। वे मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स, फर्जी पार्सल या आतंकवाद जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी देते हैं और जांच के नाम पर बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर कराने के लिए मजबूर करते हैं। इसी मानसिक दबाव का फायदा उठाकर लाखों रुपये की ठगी की जाती है।

ऐसे बचें साइबर ठगी से

  • किसी भी अनजान कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले व्यक्ति की बातों पर तुरंत भरोसा न करें।
  • पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसियां फोन पर पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश नहीं देतीं।
  • किसी के कहने पर बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें।
  • यदि कोई व्यक्ति गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे मांगता है तो तुरंत कॉल काट दें।
  • ऐसे मामलों की तुरंत नजदीकी साइबर थाना या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ठग अब लोगों को तकनीकी तरीके से नहीं, बल्कि मानसिक रूप से डराकर निशाना बना रहे हैं। इसलिए किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर घबराने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करना ही सबसे बड़ा बचाव है।

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