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Chamba Landslide : चंबा में घर पर गिरा 10 टन विशाल पत्थर, लेंटर टूटा, बड़ा हादसा टला सुरक्षित

चंबा में आधी रात 10 टन का विशाल पत्थर घर पर गिरा, लेंटर चकनाचूर; बड़ा हादसा टला, 25 से ज्यादा मकानों को नुकसान

चंबा: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच अब भूस्खलन ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। मंगलवार देर रात करीब 12 से 12:30 बजे के बीच जिले के सरोल पंचायत की अपर घोलटी में एक भीषण भूस्खलन हुआ, जिसमें करीब 100 क्विंटल (लगभग 10 टन) से अधिक वजनी विशाल चट्टान सीधे एक रिहायशी मकान पर आ गिरी। हादसे में मकान का पक्का लेंटर पूरी तरह टूट गया और घर के अंदर रखा सामान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। राहत की बात यह रही कि उस समय परिवार के सदस्य घर के दूसरे कमरों में मौजूद थे, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

पीड़ित परिवार के मुखिया परविंदर कुमार ने बताया कि रात के समय अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। देखते ही देखते पहाड़ी से विशाल पत्थर लुढ़कता हुआ उनके मकान की छत पर आ गिरा। चट्टान इतनी बड़ी और भारी थी कि रास्ते में आने वाले पेड़, खेत और अन्य बाधाओं को तोड़ते हुए मकान तक पहुंची। इसके प्रभाव से मकान का लेंटर पूरी तरह ध्वस्त हो गया। यदि पत्थर कुछ फीट आगे गिरता तो घर के उन कमरों पर गिरता जहां परिवार के सदस्य मौजूद थे और जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता था।

घटना की जानकारी मिलते ही जिला परिषद उपाध्यक्ष लियाकत अली मौके पर पहुंचे और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि तत्काल राहत के रूप में पीड़ित परिवार को ₹25 हजार की आर्थिक सहायता उपलब्ध करा दी गई है। साथ ही राजस्व विभाग को आवश्यक दस्तावेज तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि राज्य सरकार की आपदा राहत नीति के तहत परिवार को सात लाख रुपये तक का मुआवजा दिलाया जा सके। प्रशासन की ओर से राहत किट भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें राशन, कपड़े और अन्य जरूरी सामग्री शामिल होगी।

उधर, लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण पूरे चंबा जिले में व्यापक तबाही देखने को मिली है। अचानक आई बाढ़ और पहाड़ियों से मलबा आने के कारण 25 से अधिक रिहायशी मकान और एक दुकान क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके अलावा कार, ट्रक और दोपहिया वाहनों समेत एक दर्जन से अधिक वाहन मलबे में दब गए। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है।

मंगलवार सुबह से जारी बारिश के कारण जिले के कई नाले और नदियां उफान पर हैं। सुल्तानपुर नाला विकराल रूप धारण कर चुका है, जिससे आसपास के रिहायशी इलाकों में भारी मात्रा में मलबा भर गया। तडोली नाले में तेज बहाव के साथ आए बड़े-बड़े पत्थरों ने एक दुकान को पूरी तरह तबाह कर दिया। वहीं उदयपुर-गोल्थी-नवोदय मार्ग पर भरियाड के पास हुए भूस्खलन के कारण कई वाहन मलबे के नीचे दब गए और सड़क पर आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई।

राज्य आपात अभियान केंद्र के अनुसार, भारी बारिश और भूस्खलन के चलते पूरे हिमाचल प्रदेश में 178 सड़कें बंद हैं। इनमें सबसे अधिक 58 सड़कें मंडी जिले में बंद हैं, जबकि कुल्लू में 42, चंबा में 30, सिरमौर में 26, शिमला में 16, लाहौल-स्पीति में तीन, कांगड़ा में दो और ऊना जिले में एक सड़क प्रभावित हुई है। इसके अलावा 107 जलापूर्ति परियोजनाएं और 62 बिजली ट्रांसफॉर्मर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।

शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड ने भी चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि सतलुज जलापूर्ति परियोजना में ट्रांसफॉर्मर खराब होने और जल स्रोतों में भारी गाद जमा होने के कारण अगले कुछ दिनों तक राजधानी शिमला में पानी की आपूर्ति प्रभावित रह सकती है। राज्य में 30 जून से शुरू हुए मानसून के बाद से अब तक भूस्खलन, बादल फटने और अचानक आई बाढ़ जैसी घटनाओं में 15 लोगों की जान जा चुकी है।

लगातार हो रही बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते भूस्खलन को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की अपील की है। साथ ही मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी गई है।

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