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देश को मिल सकती हैं पहली महिला CJI, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के 9 जजों के नाम पर केंद्र की सहमति

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से भेजे गए  9 जजों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इन 9 जजों में तीन महिला जज भी शामिल हैं।

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इन नामों में से कोई एक आने वाले समय में भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश भी बन सकती हैं। कॉलेजियम ने जिन नामों की सिफारिश की है।

उनमें कर्नाटक हाई कोर्ट की जस्टिस बीवी नागारत्ना, तेलंगाना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश हिमा कोहली, गुजरात हाईकोर्ट की जस्टिस बेला त्रिवेदी भी हैं।

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इसके अलावा कर्नाटक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अभय श्रीनिवास ओका, गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश  विक्रम नाथ, सिक्किम हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश  जितेंद्र कुमार माहेश्वरी, सीटी रविकुमार (केरल हाई कोर्ट में न्यायाधीश) और एमएम सुंदरेश (केरल हाई कोर्ट में न्यायाधीश) शामिल हैं।

भारत की पहली महिला चीफ जस्टिस बन सकती हैं नागारात्ना

मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में 24 न्यायाधीश हैं। नौ जजों की नियुक्ति के बाद भी शीर्ष न्यायालय में एक पद खाली रहेगा। कॉलेजियम ने जिन नामों की सिफारिश की है उनमें जस्टिस नागारात्ना भारत की पहली महिला चीफ जस्टिस बन सकती हैं।

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हालांकि, वह 25 सितंबर से 29 अक्तूबर 2027 तक के लिए यह पद संभाल सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट में कॉलेजियम में मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, और जस्टिस उदय यू ललित, एएम खानविलकर, धनंजय वाई चंद्रचूड़ और एल नागेश्वर राव शामिल थे।

31 अगस्त को शपथ ले सकते हैं नए जज

सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किए गए नौ जज 31 अगस्त को शपथ ले सकते हैं। जस्टिस कोहली तेलंगाना हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश है और वो 1 सितंबर को रिटायर होने वाली है।

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अब रिकमेंडेशन हो जाने पर वो सुप्रीम कोर्ट की जज हो जाएंगी। तब उनकी सेवानिवृति की उम्र 65 वर्ष हो जाएगी। क्योंकि SC में जजों के रिटायर होने की उम्र 65 वर्ष तय की गई है।जबकि हाई कोर्ट्स में जजों के रिटायर होने की उम्र 62 वर्ष है।

बता दें कि, कॉलेजियम के द्वारा 9 जजों की नियुक्ति मामले में खास है कि, कोलेजियम की सिफारिश किए गए जजों में 3 महिला जजों को सुप्रीम कोर्ट में जज के पद पर नियुक्त किया गया है।

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इनमें से एक जस्टिस B V नागरत्ना है जो कि, देश की महिला CJI बन सकती है। वर्ष 2027 में देश की पहली महिला CJI बन जाएंगी।

2012 में जस्टिस नागरत्ना ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को विनियमित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए एक निर्णय दिया। जबकि किसी भी प्रसारण चैनल के लिए सूचना का सच्चा प्रसार एक आवश्यक आवश्यकता है।

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बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल 24 जज है। हाल ही में जस्टिस नवीन सिन्हा SC से सेवानिवृत्त हो जाने से एक संख्या और कम हो गई।

इन 9 जजों की नियुक्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट में कुंल जजों की संख्या 33 हो जाएगी। जो कि, मौजूदा जजेस की स्ट्रेंथ 34 से एक कम रह जाएगी।

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जहां 1978 में SC में जजों की संख्या 18 थी। 8 साल बाद 1986 में SC में 8 जज और नियुक्त किए गए, जिसके बाद जजों की संख्या को 26 हो गई।

वहीं 2009 में इनकी संख्या बढ़ कर 31 तक हो गई थी। इसके 10 साल बाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या को तीन और बढ़ा कर और बढ़ाया गया, जो कि तक 34 तक पहुंच गई थी।

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