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अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा, गोलियों की गूंज से काबुल एयरपोर्ट थर्राया


नई दिल्ली। अफगानिस्तान  (Afghanistan) पर एक बार फिर तालिबान (Taliban) का कब्जा हो गया है। देश में अफरा-तफरी का माहौल है। राष्ट्रपति अशरफ गनी (Ashraf Ghani) देश छोड़कर भाग चुके हैं।

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एयरपोर्ट के रनवे पर हजारों लोगों की भीड़

राष्ट्रपति भवन पर तालिबानी लड़ाके तैनात हैं। बैंकों के आगे लंबी कतारें हैं। एयरपोर्ट के रनवे पर हजारों लोग इस उम्मीद में इधर-उधर भाग रहे हैं कि, शायद किसी फ्लाइट में जगह मिल जाए और वे देश छोड़ दें।

हर शख्स की तलाशी ले रहे तालिबानी

तालिबान ने काबुल (Kabul), कंधार और मजार-ए-शरीफ जैसे बड़े शहरों में हर चौराहे पर चेकपोस्ट बना दी है। इन पर तालिबानी लड़ाके तैनात हैं, जो यहां से गुजरने वाले हर शख्स की तलाशी लेने के बाद ही उसे आगे जाने दे रहे हैं।

गोलियों की गूंज से काबुल एयरपोर्ट थर्राया, 7 की मौत

दोपहर के वक्त अचानक गोलियों की गूंज से काबुल एयरपोर्ट थर्रा उठा। अभी तक की जानकारी के अनुसार, सात लोगों की मौत हो चुकी है। ताजा हालात बहुत ही भयावाह है। वहां के लोग किसी भी तरह से काबुल छोड़कर निकलना चाहते हैं।

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सड़कों पर बख्तरबंद गाड़ियां, कार और बस की तरह हर कहीं चलती नजर आ रही हैं। तालिबान के लड़ाके खुली जीप में सड़कों पर जीत का जश्न मना रहे हैं। इन सब के बीच अफगानिस्तान के आम लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि, आखिर जाएं तो कहां जाएं।

काबुल में कई जगह गोलीबारी और लूटपाट

काबुल में कई जगह गोलीबारी और लूटपाट की खबरें हैं। सरकारी एजेंसियों के दफ्तरों में लूटपाट हुई है। तालिबान का कहना है कि, हमारे नाम पर अराजक तत्वों ने लूटपाट की है। संवेदनशील दस्तावेज जला दिए गए हैं। लूटमार करने वाले लोगों को तालिबानी लड़ाकों ने गोलियां भी चलाई हैं।

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देश छोड़ने के बाद राष्ट्रपति गनी ने सोशल मीडिया पर लिखा, अनगिनत लोग मारे जाते और हमें काबुल शहर की तबाही देखनी पड़ती तो उस 60 लाख आबादी के शहर में बड़ी मानवीय त्रासदी हो जाती.

खून की नदियां बहने से बचाने के लिए मैंने सोचा कि देश से बाहर जाना ही ठीक है. ऐसी भी खबरें थीं कि उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने भी देश छोड़ दिया है, लेकिन बाद में उन्होंने साफ किया कि, वो देश में ही हैं.

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अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा तो हो गया, लेकिन अब आगे क्या होगा? भारत पर इसका क्या असर होगा? और अफगानियों पर इसका क्या असर होगा? आइए समझते हैं…

अब आगे क्या…?

पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई (Hamid Karzai) ने घोषणा की है कि, सत्ता के हस्तांतरण के लिए एक परिषद का गठन किया जा रहा है.

तालिबान ने कैबिनेट पोर्टफोलियो को लेकर फैसला कर लिया

करजई, शांतिवार्ता के प्रतिनिधि अध्यक्ष अब्दुल्ला अब्दुल्ला और हेस्ब-ए-इस्लामी पार्टी के नेता गुलबुद्दीन हिकमतयार मिलकर सत्ता के हस्तांतरण पर काम कर रहे हैं. मुल्ला बारादर नेतृत्व संभाल सकते हैं. तालिबान ने पहले से ही कैबिनेट पोर्टफोलियो को लेकर फैसला कर लिया है.

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तालिबान का कहना है कि, अफगानिस्तान में कोई अंतरिम सरकार नहीं होगी. ऐसी खबरें थीं कि, तालिबान अभी अंतरिम सरकार का गठन कर सकता है.

इस सवाल के जवाब में तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने बताया कि, अली अहमद जलानी एक अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए स्वीकार्य उम्मीदवार नहीं थे. अंतरिम सरकार की कोई बात ही नहीं है. ये सारी बातें झूठी हैं.

भारत पर इसका क्या असर होगा?

अफगानिस्तान में तालिबान के आने से उसके संबंध भारत से खराब हो सकते हैं, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति हामिज करजई और डॉ. अब्दुल्ला के आने से अच्छे रिश्ते बने रहने की उम्मीद भी है. हालांकि, पाकिस्तान और तालिबान के बीच मजबूत रिश्तों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता.

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भारत के साथ संबंधों को लेकर जब जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि, हम भारत समेत सभी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की उम्मीद करते हैं. हम अफगानिस्तान की बेहतरी के लिए काम करेंगे. भले ही पहले संबंध अच्छे नहीं रहे हैं, लेकिन अब हम बेहतर संबंध बनाने की कोशिश करेंगे.

अच्छे संबंधों का आह्वान

तालिबान और पाकिस्तान के बीच अच्छे संबंध हैं तो ऐसे में भारत से संबंध कैसे बेहतर होंगे? इस पर जबीउल्लाह ने कहा, “भारत और पाकिस्तान के बीच ऐसे मुद्दे हैं, जिनका समाधान उन दोनों को करना है. अफगानिस्तान दोनों देशों से जुड़ा हुआ है. हम चाहते हैं कि सभी देशों के बीच अच्छे संबंध हों.”

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कई अफगानी हैं जो पाकिस्तान में रहते हैं

उन्होंने आगे कहा कि, पाकिस्तान हमारा पड़ोसी है और हममें से कई लोगों के लिए दूसरा घर है. कई अफगानी हैं जो पाकिस्तान में रहते हैं. हम बस चाहते हैं कि सभी देशों के साथ अच्छे संबंध बनें.

तालिबान खुद को दुनिया के हिसाब से ढालने की कोशिश कर रहे

ऐसा लग रहा है कि, तालिबान खुद को दुनिया के हिसाब से ढालने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन भारत को एक ऐसे देश की सरकार के तालमेल बैठाना होगा, जहां तालिबान का दबदबा होगा. लेकिन उससे भी ज्यादा चिंता इस बात की होगी कि भारत ने अफगानिस्तान में जो निवेश किया है, उसका क्या होगा.

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इसके अलावा पाकिस्तान और चीन के गठजोड़ की वजह से अफगानिस्तान उन दोनों देशों के करीब जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो ये भारत के लिए चिंता की बात होगी.

अफगानियों पर क्या होगा इसका असर?

तालिबान के आते ही लोगों में खौफ पैदा हो गया है. लोग अफगानिस्तान से भागने की कोशिश में लगे हैं. कई ऐसे वीडियो आए हैं, जिनमें तालिबान की बर्बरता भी दिखाई दे रही है.

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तालिबान के लड़ाके लोगों के घरों पर भी कब्जा कर रहे हैं. एक वीडियो में दिख रहा था कैसे तालिबान के लड़ाके गजनी के गवर्नर में तोड़फोड़ कर उसे हथिया रहे थे.

लोगों में भय का माहौल

तालिबान के नेताओं की ओर से अपने लड़ाकों को बिना अनुमति के किसी भी घर में घुसने की मनाही है, लेकिन उसके बावजूद लोगों में डर है.

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कई लोगों को तालिबान की बर्बरता का सामना करना पड़ रहा है. लोगों को ये भी डर है कि अब वहां शरिया कानून लागू कर दिया जाएगा और मध्यकालीन प्रथाएं लागू कर दी जाएंगी. 

तालिबान से डरी हुई है मीडिया

मीडिया भी तालिबान से डर गई है. कई मीडिया हाउस बंद हो चुके हैं तो कई ने कुछ दिनों के लिए अपने ऑपरेशन को रोक दिया है. चिंता ये भी है कि, तालिबान फिर से सांस्कृतिक गतिविधियों, म्यूजिक, डांस और यहां तक कि फिल्मों पर भी फिर से प्रतिबंध लगा सकता है.

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तालिबान की वापसी के साथ ही महिलाओं, विपक्षी खेमे के राजनेताओं, सरकारी अधिकारी-कर्मचारी और पत्रकारों में ज्यादा खौफ दिख रहा है.

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