
उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या एक बार फिर दीपों की रोशनी से जगमगाने जा रही है। गुरुवार, 5 नवंबर से यहां पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हो रही है। इस बार का आयोजन धार्मिक आस्था के साथ भारतीय और अंतरराष्ट्रीय संस्कृति का अनूठा संगम बनने जा रहा है। सरयू के घाटों से लेकर श्रीराम जन्मभूमि परिसर तक विशेष सजावट की गई है। दीपोत्सव में देश-विदेश के कलाकार रामायण के प्रसंगों को अलग-अलग सांस्कृतिक अंदाज में प्रस्तुत करेंगे।
7 नवंबर को मुख्य आयोजन, 30 लाख दीपों से रोशन होंगे 56 घाट
दीपोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण 7 नवंबर को होने वाला मुख्य कार्यक्रम रहेगा। इस दिन राम की पैड़ी के 56 घाटों पर करीब 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने की तैयारी है। दीपों की कतारें सरयू नदी के तट को रोशनी से भर देंगी। इस आयोजन में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और कर्मचारी जुटे हुए हैं।
इसके साथ ही श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर को भी दीपों से सजाया जाएगा। मंदिर परिसर के अलग-अलग पांच जोन में करीब एक लाख दीप जलाने की योजना है। इसके लिए लगभग एक हजार स्वयंसेवकों को जिम्मेदारी दी गई है।
पांच देशों की रामलीला से दिखेगी अंतरराष्ट्रीय संस्कृति
इस बार दीपोत्सव को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने के लिए पांच देशों की रामलीला मंडलियों को शामिल किया जा रहा है। दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, नेपाल, लाओस और थाईलैंड के कलाकार रामकथा के अलग-अलग प्रसंगों का मंचन करेंगे।
इसके अलावा भारत के असम, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और केरल सहित कई राज्यों के कलाकार भी अपनी लोक परंपराओं, वेशभूषा, संगीत और नृत्य के माध्यम से सांस्कृतिक विविधता पेश करेंगे। आयोजन में करीब 2,500 कलाकारों की प्रस्तुतियां 12 मंचों पर होंगी।
2100 ड्रोन शो और लेजर प्रोजेक्शन होंगे खास
दीपोत्सव में आधुनिक तकनीक का भी शानदार इस्तेमाल किया जाएगा। रामायण के प्रसंगों पर आधारित लेजर शो, प्रोजेक्शन मैपिंग और आकाशीय प्रस्तुतियां दर्शकों को आकर्षित करेंगी। 2,100 स्वदेशी ड्रोन की मदद से आसमान में रामायण से जुड़े दृश्य और आकृतियां प्रदर्शित करने की योजना है।
राम की पैड़ी पर पांच 3D रामायण दृश्यों का अनुभव कराने के लिए ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) तकनीक भी इस्तेमाल की जाएगी। दर्शक मोबाइल के जरिए निर्धारित स्थानों को स्कैन कर इन दृश्यों को देख सकेंगे।
2147 आचार्य करेंगे सरयू की महाआरती
7 नवंबर को सरयू तट पर 2,147 आचार्यों द्वारा सामूहिक महाआरती की जाएगी। यह आयोजन शाम करीब 5:20 से 5:50 बजे तक प्रस्तावित है। पिछले वर्ष 2,128 आचार्यों ने एक साथ आरती कर रिकॉर्ड बनाया था। इस बार इसमें संख्या बढ़ाने की तैयारी है।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं पर जोर
दीपोत्सव में देशभर से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में प्रशासन ने यातायात, पार्किंग, पेयजल, सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। अतिरिक्त बसों और विशेष ट्रेनों की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है।
अयोध्या का यह दीपोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि रामकथा, लोक संस्कृति और आधुनिक तकनीक के जरिए भारतीय विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का बड़ा मंच बन रहा है।




