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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास तीन व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। इस घटनाक्रम ने दुनिया भर के निवेशकों और ऊर्जा बाजारों की चिंता बढ़ा दी है।
ब्रेंट और WTI क्रूड में जोरदार उछाल
ताजा कारोबार में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर करीब 76.5 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड लगभग 72.7 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। विश्लेषकों का कहना है कि मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने से आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण बाजार में तेजी आई है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाली तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या जहाजों पर हमला वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को सीधे प्रभावित करता है।
हमलों के बाद बढ़ी आपूर्ति बाधित होने की आशंका
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान से जुड़े हमलों में हॉर्मुज के पास तीन व्यावसायिक जहाज निशाना बने, जिसके बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इसके साथ ही ईरानी तेल पर प्रतिबंधों को भी कड़ा किया गया, जिससे वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर पेट्रोल और डीजल की लागत, परिवहन खर्च और महंगाई पर पड़ सकता है। हालांकि घरेलू ईंधन कीमतों में बदलाव का फैसला तेल विपणन कंपनियां और सरकारी नीतियों के आधार पर किया जाता है।
आगे क्या है बाजार की नजर?
ऊर्जा बाजार की नजर अब मध्य-पूर्व की स्थिति पर टिकी हुई है। यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है या हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं तनाव कम होने की स्थिति में बाजार में कुछ राहत मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।




