
Onion Procurement Price Hike: केंद्र सरकार ने प्याज किसानों को बड़ी राहत देते हुए खरीद मूल्य में करीब 13 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। अब कीमत स्थिरीकरण कोष (Price Stabilization Fund) के तहत बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीद 21.25 रुपये प्रति किलोग्राम (2,125 रुपये प्रति क्विंटल) की दर से की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलेगा और बाजार में कीमतों को संतुलित रखने में भी मदद मिलेगी।

चालू सत्र में पांचवीं बार बढ़ी खरीद कीमत
सरकार ने मौजूदा खरीद सत्र में यह पांचवीं बार प्याज की खरीद कीमत बढ़ाई है। शुरुआत में खरीद मूल्य 12.70 रुपये प्रति किलो तय किया गया था। इसके बाद मांग और बाजार की स्थिति को देखते हुए इसे क्रमशः बढ़ाया गया।
ऐसे बढ़ी प्याज खरीद की कीमत
- शुरुआत: 12.70 रुपये प्रति किलो
- 22 मई: 15.80 रुपये प्रति किलो
- 13 जून: 16.50 रुपये प्रति किलो
- 20 जून: 17.30 रुपये प्रति किलो
- इसके बाद: 18.75 रुपये प्रति किलो
- अब नया रेट: 21.25 रुपये प्रति किलो
हालांकि, कीमत में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद सरकार अब तक केवल करीब 2,000 टन प्याज ही खरीद सकी है। यही वजह है कि किसानों को आकर्षित करने के लिए खरीद मूल्य में फिर इजाफा किया गया है।
उत्पादन लगभग पिछले साल के बराबर रहने का अनुमान
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक, इस वर्ष देश में 307.37 लाख टन प्याज उत्पादन का अनुमान है। यह पिछले वर्ष 307.67 लाख टन के उत्पादन के लगभग बराबर है। यानी उत्पादन में कोई बड़ी गिरावट नहीं दिख रही है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय का कहना है कि देश में प्याज की कुल उपलब्धता फिलहाल पर्याप्त है। हालांकि, मानसून और मौसमी परिस्थितियों के कारण आने वाले दिनों में कीमतों में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में पर्याप्त भंडार
सरकार के अनुसार, देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में प्याज का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इन राज्यों में भंडारण की स्थिति सामान्य बनी हुई है और स्टोर किए गए प्याज में किसी तरह की कमी नहीं देखी गई है।
देशभर की मंडियों में रोजाना 50 हजार टन से अधिक प्याज की आवक दर्ज की जा रही है। इसमें अकेले महाराष्ट्र से 30 हजार टन से ज्यादा प्याज बाजारों में पहुंच रहा है। मंडियों में औसत मॉडल कीमत करीब 18 रुपये प्रति किलो है, जबकि देशभर में औसत खुदरा कीमत लगभग 31 रुपये प्रति किलो बनी हुई है।
बेहतर गुणवत्ता वाला प्याज अभी भी स्टोर में
विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों और व्यापारियों ने बेहतर गुणवत्ता वाले प्याज को फिलहाल स्टोर करके रखा है। उम्मीद की जा रही है कि कम आपूर्ति वाले समय में इसे बाजार में उतारा जाएगा, जिससे बेहतर कीमत मिल सके।
वहीं, मानसून में देरी और कुछ इलाकों में सामान्य से कम बारिश के कारण कुछ कारोबारियों ने सट्टेबाजी के उद्देश्य से खरीद बढ़ा दी है। हालांकि, प्रमुख उपभोक्ता बाजारों में मौजूदा कीमतों पर वास्तविक मांग अभी भी सामान्य बनी हुई है।
जून में 1.5 लाख टन प्याज का हुआ निर्यात
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून महीने में भारत से करीब 1.50 लाख टन प्याज का निर्यात किया गया। हालांकि, आने वाले महीनों में निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इसकी बड़ी वजह पाकिस्तान और चीन से आने वाली सस्ती एवं ताजा फसलें हैं, जो खाड़ी देशों, श्रीलंका और सुदूर पूर्व के बाजारों में भारतीय प्याज को कड़ी प्रतिस्पर्धा दे रही हैं।
किसानों को मिलेगा बेहतर दाम
सरकार का मानना है कि खरीद मूल्य बढ़ाने से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। साथ ही, बफर स्टॉक मजबूत होने से भविष्य में प्याज की कीमतों में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।




