
नई दिल्ली: पंजाबी सिनेमा के सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सतलुज’ ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज होते ही चर्चा का विषय बन गई है। फिल्म सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब के उथल-पुथल भरे दौर की उन सच्ची घटनाओं को सामने लाती है, जो लंबे समय तक इतिहास के पन्नों में दबकर रह गईं।

इंडिया टीवी को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार, ‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह के जीवन से प्रेरित है। फिल्म न्याय, मानवाधिकार, साहस और सच्चाई की लड़ाई को बेहद संवेदनशील अंदाज में पर्दे पर पेश करती है।
सच्ची घटनाओं से प्रेरित है फिल्म
फिल्म की कहानी पंजाब के उस दौर पर आधारित है, जब राज्य हिंसा, अस्थिरता और सामाजिक उथल-पुथल से गुजर रहा था। उस समय कई ऐसे परिवार और लोग थे, जिनकी पीड़ा कभी मुख्यधारा की चर्चा का हिस्सा नहीं बन सकी। ‘सतलुज’ उन्हीं अनकही कहानियों को दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास करती है।
जसवंत सिंह के संघर्ष को मिली नई पहचान
फिल्म में मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह के संघर्ष और न्याय की लड़ाई को प्रमुखता से दिखाया गया है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी पीड़ितों की आवाज उठाने का साहस दिखाया। फिल्म उनके इसी संघर्ष को सिनेमाई रूप में पेश करती है।
मनोरंजन के साथ मजबूत सामाजिक संदेश
‘सतलुज’ केवल ऐतिहासिक घटनाओं का पुनर्पाठ नहीं है, बल्कि यह दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि इतिहास की उन घटनाओं को याद रखना क्यों जरूरी है, जिनसे समाज ने बड़े सबक सीखे हैं। फिल्म न्याय, इंसाफ और मानवीय संवेदनाओं के महत्व को प्रभावी ढंग से सामने लाती है।
रिलीज होते ही चर्चा में आई फिल्म
जी5 पर रिलीज के बाद फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा हो रही है। दर्शक इसकी गंभीर कहानी, दमदार प्रस्तुति और संवेदनशील विषय की सराहना कर रहे हैं। खास बात यह है कि फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ समाज के सामने इतिहास के एक कम चर्चित अध्याय को भी उजागर करती है।
इतिहास को समझने का नया नजरिया
‘सतलुज’ यह संदेश देती है कि इतिहास केवल तारीखों और घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि उन लोगों की कहानी भी है जिन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। फिल्म दर्शकों को अतीत से सीख लेने और न्याय व मानवाधिकार के मूल्यों को याद रखने की प्रेरणा देती है।




