Kerala Monsoon Entry- केरल में मानसून की एंट्री, भारत में सबसे पहले यहीं क्यों आता है? जानिए पूरा विज्ञान

केरल में मानसून की एंट्री, लेकिन भारत में सबसे पहले यहीं क्यों पहुंचता है? जानिए कैसे बनता है मानसून और कितने प्रकार का होता है

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केरल पहुंचा मानसून, अब उत्तर भारत को राहत का इंतजार

उत्तर भारत इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। कई राज्यों में तापमान 48 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। ऐसे में लोगों को मानसून का बेसब्री से इंतजार है। मौसम विभाग के अनुसार 4 जून को मानसून ने केरल में दस्तक दे दी है और अब यह धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों की ओर बढ़ेगा।

हर साल मानसून की शुरुआत सबसे पहले केरल से होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मानसून भारत में सबसे पहले केरल ही क्यों पहुंचता है? इसके पीछे भूगोल, समुद्री हवाओं और मौसम विज्ञान का बड़ा विज्ञान छिपा हुआ है।

सबसे पहले केरल में ही क्यों आता है मानसून?

भारत में आने वाला मुख्य मानसून दक्षिण-पश्चिम मानसून कहलाता है। यह हिंद महासागर और अरब सागर से नमी लेकर भारत की ओर बढ़ता है।

केरल भारत के दक्षिण-पश्चिमी छोर पर स्थित है और अरब सागर के सबसे निकट है। जब समुद्र से आने वाली नम हवाएं भारतीय तट से टकराती हैं, तो सबसे पहले केरल का पश्चिमी तटीय क्षेत्र इनके संपर्क में आता है।

इसके अलावा पश्चिमी घाट पर्वतमाला भी मानसूनी बादलों को ऊपर उठने पर मजबूर करती है, जिससे भारी वर्षा होती है और मानसून की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है।

मानसून कैसे बनता है?

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गर्मी के मौसम में भारतीय उपमहाद्वीप की जमीन तेजी से गर्म हो जाती है। इससे उत्तर भारत और आसपास के क्षेत्रों में निम्न दबाव (Low Pressure) का क्षेत्र बनता है।

दूसरी ओर हिंद महासागर का तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है। दबाव के अंतर के कारण समुद्र से नमी से भरी हवाएं जमीन की ओर बहने लगती हैं। यही हवाएं बादलों का निर्माण करती हैं और वर्षा कराती हैं।

मानसून बनने की प्रक्रिया

  1. जमीन तेजी से गर्म होती है।
  2. निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है।
  3. समुद्र से नम हवाएं जमीन की ओर बढ़ती हैं।
  4. हवाएं पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती हैं।
  5. जलवाष्प संघनित होकर बादलों में बदलती है।
  6. वर्षा शुरू हो जाती है।

भारत में मानसून कितने प्रकार का होता है?

1. दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon)

यह भारत का प्रमुख मानसून है और जून से सितंबर तक सक्रिय रहता है।

  • देश की लगभग 75 प्रतिशत वार्षिक वर्षा इसी से होती है।
  • इसकी शुरुआत केरल से होती है।
  • कृषि और जल संसाधनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

2. उत्तर-पूर्व मानसून (Northeast Monsoon)

यह अक्टूबर से दिसंबर के बीच सक्रिय होता है।

  • मुख्य रूप से दक्षिण भारत को प्रभावित करता है।
  • विशेषकर Tamil Nadu, Andhra Pradesh और Kerala के कुछ हिस्सों में बारिश कराता है।
  • इसे रिट्रीटिंग मानसून भी कहा जाता है।

मानसून की दो प्रमुख शाखाएं

अरब सागर शाखा

यह शाखा अरब सागर से होकर आती है और सबसे पहले केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र और गुजरात को प्रभावित करती है।

बंगाल की खाड़ी शाखा

यह शाखा बंगाल की खाड़ी से होकर पूर्वोत्तर भारत पहुंचती है और फिर उत्तर भारत की ओर बढ़ती है।

उत्तर भारत में कब पहुंचेगा मानसून?

मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार मानसून केरल से आगे बढ़ते हुए अगले कुछ दिनों में कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचेगा। इसके बाद मध्य भारत और फिर उत्तर भारत में प्रवेश करेगा।

सामान्य परिस्थितियों में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और आसपास के क्षेत्रों में मानसून जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के पहले सप्ताह के बीच पहुंचता है।

किसानों और आम लोगों के लिए क्यों जरूरी है मानसून?

भारत की कृषि का बड़ा हिस्सा आज भी वर्षा पर निर्भर है। अच्छी मानसूनी बारिश से:

  • खेती को फायदा मिलता है।
  • जलाशय भरते हैं।
  • भूजल स्तर सुधरता है।
  • गर्मी से राहत मिलती है।
  • बिजली उत्पादन में मदद मिलती है।

निष्कर्षhttps://images.openai.com/static-rsc-4/FxyZurW20vrvLS6bma-Tcx5EFXToDaKC3JtBDG7OiyE_83bJRGOAhZXYLU47AAep_M6Fb3gWOoBeaItXbsEA6Qi3GB_ZxAaPwjoWVijYHi3Mc1m9BY2T6bN1KJVsOXeqKZWhaWzrlvxem5pfRDQPUCXtRqtjPKW44S6A7QzeZg_tsYgfn0vCPxUrA4ZsF9P_?purpose=fullsize

केरल में मानसून की एंट्री केवल एक मौसमीय घटना नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए राहत और उम्मीद का संकेत होती है। अरब सागर के करीब होने और पश्चिमी घाट की भौगोलिक स्थिति के कारण मानसून सबसे पहले केरल पहुंचता है। इसके बाद यही मानसून धीरे-धीरे पूरे देश में फैलकर गर्मी से राहत और जीवनदायिनी वर्षा लेकर आता है।

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