Gold Sale Claim : 12 अरब डॉलर के सोने की बिक्री की खबर पर सरकार ने बताया सच

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) को लेकर हाल के दिनों में सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में एक बड़ा दावा तेजी से वायरल हुआ। इन रिपोर्ट्स में कहा गया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी मुद्रा भंडार पर संभावित दबाव को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेच दिया है। इस दावे ने निवेशकों, अर्थशास्त्रियों और आम नागरिकों के बीच चिंता पैदा कर दी, क्योंकि भारत का स्वर्ण भंडार देश की वित्तीय स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।

हालांकि अब केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देते हुए वायरल दावे को पूरी तरह गलत और भ्रामक करार दिया है। सरकार का कहना है कि RBI द्वारा 12 अरब डॉलर का सोना बेचने संबंधी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और आधिकारिक आंकड़े इसके बिल्कुल विपरीत तस्वीर पेश करते हैं।

PIB ने किया वायरल दावे का खंडन

सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेकिंग एजेंसी प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर वायरल खबरों का खंडन किया। PIB ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने स्वर्ण भंडार में किसी प्रकार की बड़ी कटौती नहीं की है। इसके उलट, RBI के गोल्ड रिजर्व की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है।

PIB द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 के अंत तक भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 13.92 प्रतिशत थी। इसके बाद यह आंकड़ा लगातार बढ़ता गया और 31 मार्च 2026 तक 16.70 प्रतिशत तक पहुंच गया। वहीं 22 मई 2026 तक यह हिस्सेदारी बढ़कर 16.85 प्रतिशत हो गई।

सरकार का कहना है कि यदि RBI ने वास्तव में इतनी बड़ी मात्रा में सोना बेचा होता, तो विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ने के बजाय घटती दिखाई देती। इसलिए 12 अरब डॉलर के सोने की बिक्री का दावा तथ्यों से मेल नहीं खाता।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

यह विवाद एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट में कुछ अनाम सूत्रों के हवाले से दावा किया गया था कि भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित रखने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेचा हो सकता है।

रिपोर्ट प्रकाशित होते ही सोशल मीडिया पर यह खबर तेजी से फैल गई। कई लोगों ने इसे भारत की आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। कुछ यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि क्या विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है और क्या RBI को मजबूरी में सोना बेचना पड़ा है।

हालांकि, रिपोर्ट में इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज या RBI का बयान मौजूद नहीं था। इसके बावजूद खबर ने व्यापक चर्चा को जन्म दिया। बाद में PIB ने हस्तक्षेप करते हुए आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर पूरे दावे को खारिज कर दिया।

RBI के पास कितना सोना मौजूद है?

भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश का स्वर्ण भंडार मजबूत स्थिति में बना हुआ है। RBI के पास वर्तमान में कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना मौजूद है।

इसमें से लगभग 312.32 मीट्रिक टन सोना इश्यू डिपार्टमेंट की परिसंपत्तियों (Assets) के रूप में रखा गया है, जबकि 568.20 मीट्रिक टन सोना बैंकिंग डिपार्टमेंट के तहत रखा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश का गोल्ड रिजर्व उसकी आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण स्तंभ होता है। वैश्विक आर्थिक संकट, मुद्रा अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के दौर में सोना एक सुरक्षित संपत्ति (Safe Haven Asset) के रूप में देखा जाता है। ऐसे में भारत द्वारा अपने स्वर्ण भंडार को मजबूत बनाए रखना आर्थिक दृष्टि से सकारात्मक संकेत माना जाता है।

गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में क्यों आई बढ़ोतरी?

RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ने से सोने की मांग में तेजी आई है।

इसके अलावा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई कमजोरी ने भी RBI के गोल्ड रिजर्व के मूल्यांकन को प्रभावित किया है। चूंकि सोने का मूल्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में निर्धारित होता है, इसलिए रुपये के कमजोर होने पर भारतीय मुद्रा में सोने की कुल वैल्यू और बढ़ जाती है।

यही कारण है कि RBI के स्वर्ण भंडार का कुल मूल्य पिछले कुछ महीनों में और अधिक मजबूत दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि गोल्ड रिजर्व की बढ़ती वैल्यू भारत की वित्तीय मजबूती को दर्शाती है।

विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की भूमिका

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता का प्रमुख संकेतक माना जाता है। इसमें विदेशी मुद्राएं, सरकारी बॉन्ड, विशेष आहरण अधिकार (SDR) और सोना शामिल होता है। सोना विदेशी मुद्रा भंडार का ऐसा हिस्सा है जो आर्थिक संकट के समय अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है।

भारत पिछले कुछ वर्षों में अपने गोल्ड रिजर्व को लगातार मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। RBI समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय बाजार से सोने की खरीद भी करता रहा है, जिससे देश की वित्तीय सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।

निवेशकों के लिए क्या है संदेश?

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार और स्वर्ण भंडार से जुड़ी खबरों को लेकर निवेशकों को केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करना चाहिए। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली अपुष्ट रिपोर्ट्स कई बार भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती हैं।

RBI और केंद्र सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि भारत ने अपना सोना बेचने के बजाय अपने स्वर्ण भंडार को मजबूत बनाए रखा है। ऐसे में 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेचने संबंधी दावे को तथ्यों के आधार पर खारिज किया जा चुका है।

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