भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) फ्रेंचाइजी लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) की कप्तानी छोड़ दी है। फ्रेंचाइजी ने शनिवार को आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि उसने पंत के कप्तानी छोड़ने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। इस फैसले के बाद क्रिकेट जगत में कई सवाल उठने लगे हैं। खासकर तब, जब आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने इस घटनाक्रम के लिए सीधे तौर पर एलएसजी के मालिक संजीव गोयनका को जिम्मेदार ठहराया है।

एलएसजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में कहा कि ऋषभ पंत ने टीम की कप्तानी से हटने का अनुरोध किया था, जिसे फ्रेंचाइजी ने सम्मानपूर्वक स्वीकार कर लिया। टीम के क्रिकेट निदेशक टॉम मूडी ने कहा, “ऋषभ पंत ने इस अनुरोध के साथ फ्रेंचाइजी से संपर्क किया था। हमने उनके निर्णय का सम्मान करते हुए इसे स्वीकार कर लिया है।”
हालांकि कप्तानी छोड़ने के पीछे की वास्तविक वजह को लेकर अब भी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में इसे लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी बने थे पंत
ऋषभ पंत 2025 में दिल्ली कैपिटल्स से अलग होने के बाद लखनऊ सुपर जायंट्स में शामिल हुए थे। मेगा ऑक्शन में एलएसजी ने उन्हें रिकॉर्ड 27 करोड़ रुपये की बोली लगाकर अपनी टीम में शामिल किया था। इसके साथ ही वह आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी बन गए थे।
उस समय एलएसजी के मालिक संजीव गोयनका ने पंत को खरीदने के फैसले को भविष्य की रणनीति बताया था। प्रसिद्ध पॉडकास्ट होस्ट राज शमानी के साथ बातचीत में गोयनका ने कहा था कि वह ऐसे खिलाड़ी की तलाश में थे जो लंबे समय तक टीम का चेहरा बन सके।
गोयनका ने कहा था, “अगर मैं भारतीय टीम के किसी मैच विनर को खरीदना चाहता था तो मेरे पास चार विकल्प थे—ऋषभ पंत, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल और युजवेंद्र चहल। लेकिन मेगा ऑक्शन में आपको अगले 10 साल के बारे में सोचना होता है। ऋषभ युवा हैं और उनके पास एक्स-फैक्टर भी है। यही वजह थी कि हमने उन पर बड़ा निवेश किया।”
कप्तानी में नहीं मिला अपेक्षित परिणाम
हालांकि मैदान पर पंत और एलएसजी का सफर उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। 2025 सीजन में टीम सातवें स्थान पर रही और प्लेऑफ में जगह बनाने में नाकाम रही। कप्तान के रूप में पंत का व्यक्तिगत प्रदर्शन भी अपेक्षाओं से काफी नीचे रहा।
उन्होंने 14 मैचों में केवल 269 रन बनाए। पूरे सीजन में उनके बल्ले से सिर्फ एक शतक और एक अर्धशतक निकला। इसके बावजूद फ्रेंचाइजी ने उन पर भरोसा बनाए रखा और 2026 सीजन में भी कप्तानी की जिम्मेदारी सौंपी।
लेकिन हालात नहीं बदले। 2026 सीजन में एलएसजी का प्रदर्शन और भी खराब रहा। टीम अंक तालिका में आखिरी स्थान पर रही। पंत ने 14 मैचों में 312 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट लगभग 138 रहा। पूरे सीजन के दौरान उनके बल्लेबाजी क्रम में भी कई बार बदलाव किए गए, लेकिन टीम को इसका कोई खास फायदा नहीं मिला।
संजीव गोयनका और पंत की कथित बहस बनी चर्चा का विषय
पंत के कप्तानी छोड़ने के फैसले को लेकर चर्चाओं की सबसे बड़ी वजह अप्रैल 2026 में सामने आई एक घटना मानी जा रही है। एक अप्रैल को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मुकाबले के बाद सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें संजीव गोयनका और ऋषभ पंत के बीच तीखी बातचीत होती दिखाई दे रही थी।
इन तस्वीरों ने क्रिकेट प्रशंसकों को 2024 की उस घटना की याद दिला दी, जब सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ हार के बाद गोयनका और तत्कालीन कप्तान केएल राहुल के बीच मैदान पर हुई बातचीत ने विवाद का रूप ले लिया था।
हालांकि एलएसजी ने अगले ही दिन एक वीडियो जारी कर इन अटकलों को खारिज करने की कोशिश की। फ्रेंचाइजी ने वीडियो के साथ संदेश लिखा था, “हर कहानी जो आप देखते हैं, वह सच नहीं होती।”
वीडियो में संजीव गोयनका और ऋषभ पंत एक-दूसरे को गले लगाते नजर आए थे। लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि वायरल तस्वीरों में मैदान पर दर्शकों की मौजूदगी दिखाई दे रही थी, जबकि फ्रेंचाइजी द्वारा जारी वीडियो का माहौल अलग नजर आ रहा था।
यहीं से दोनों के रिश्तों को लेकर अटकलें और तेज हो गई थीं।
ललित मोदी ने साधा गोयनका पर निशाना
ऋषभ पंत के कप्तानी छोड़ने के बाद आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट लिखकर संजीव गोयनका की आलोचना की है। उन्होंने दावा किया कि पंत को मजबूर होकर यह फैसला लेना पड़ा।
ललित मोदी ने लिखा, “यह लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए दुखद दिन है। टीम के मालिक ने ऐसे हालात पैदा कर दिए कि एक खिलाड़ी को इस्तीफा देना पड़ा। सार्वजनिक रूप से किसी खिलाड़ी का अपमान स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।”
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि संजीव गोयनका लगातार मीडिया में यह कहते रहे थे कि वह ऋषभ पंत को अगले 10 से 15 वर्षों तक अपनी टीम में बनाए रखना चाहते हैं। लेकिन अब हालात ऐसे बन गए कि खिलाड़ी ने कप्तानी छोड़ना ही बेहतर समझा।
मोदी ने आगे कहा, “एक बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी खिलाड़ी को ऐसी फ्रेंचाइजी के लिए खेलने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए जहां उसका कार्य वातावरण बेहतर न हो? खिलाड़ियों के अधिकारों और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।”
खिलाड़ियों के लिए ‘शिकायत बॉक्स’ की मांग
ललित मोदी ने अपने पोस्ट में एक नई व्यवस्था लागू करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि आईपीएल में खिलाड़ियों के लिए एक स्वतंत्र शिकायत तंत्र होना चाहिए, जहां वे टीम मालिकों या प्रबंधन के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि यदि जांच में कोई मालिक दोषी पाया जाता है तो उस पर खिलाड़ियों से सीधे बातचीत करने पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। मोदी के अनुसार, ऐसे कदम खिलाड़ियों की मानसिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।
एलएसजी की चुप्पी और भविष्य की चुनौती
फिलहाल लखनऊ सुपर जायंट्स ने ललित मोदी के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। फ्रेंचाइजी का कहना है कि उसका पूरा ध्यान आगामी सीजन के लिए टीम के पुनर्निर्माण पर है।
हालांकि पंत के कप्तानी छोड़ने के बाद कई बड़े सवाल सामने खड़े हो गए हैं। क्या यह फैसला केवल टीम के खराब प्रदर्शन का परिणाम है या इसके पीछे प्रबंधन और खिलाड़ी के बीच रिश्तों में आई खटास भी एक कारण है? इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।
लेकिन इतना जरूर है कि आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी और देश के सबसे चर्चित क्रिकेटरों में से एक ऋषभ पंत का कप्तानी छोड़ना एलएसजी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। आने वाले दिनों में फ्रेंचाइजी नए कप्तान की तलाश करेगी, जबकि क्रिकेट प्रेमियों की नजर इस बात पर रहेगी कि पंत और एलएसजी का रिश्ता आगे किस दिशा में बढ़ता है।
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