भारतीय खेल जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अनुभवी खेल प्रशासक, पूर्व ओलंपियन और भारत के दिग्गज निशानेबाज रणधीर सिंह का निधन हो गया है। करीब 79 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय खेल जगत, ओलंपिक समुदाय और शूटिंग स्पोर्ट्स से जुड़े खिलाड़ियों में शोक की लहर दौड़ गई है। रणधीर सिंह केवल एक सफल शूटर ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने भारतीय और एशियाई खेल प्रशासन में भी अहम भूमिका निभाई थी।
रणधीर सिंह उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों में शामिल रहे, जिन्होंने मैदान के साथ-साथ खेल प्रशासन में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई। वे एशियाई खेलों में निशानेबाजी में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी थे। इसके अलावा उन्होंने कई दशकों तक भारतीय ओलंपिक आंदोलन को मजबूती देने का काम किया। उनके योगदान को भारतीय खेल इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा।

लंबे समय से खराब चल रही थी तबीयत
जानकारी के अनुसार, रणधीर सिंह पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। बताया जा रहा है कि निधन से पहले वे कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे थे। स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आने के बाद उन्होंने इस साल की शुरुआत में ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था।
उनके निधन की खबर सामने आते ही देशभर के खिलाड़ियों, खेल संगठनों और खेल प्रेमियों ने गहरा दुख जताया। सोशल मीडिया पर भी कई दिग्गज खिलाड़ियों और खेल प्रशासकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और भारतीय खेलों में उनके योगदान को याद किया।
पांच बार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व
पंजाब के पटियाला से संबंध रखने वाले रणधीर सिंह खेलों से जुड़े परिवार से आते थे। उन्हें बचपन से ही शूटिंग में रुचि थी और उन्होंने जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित कर दी। वे पांच बार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल रहे।
उन्होंने 1968, 1972, 1976, 1984 और 1988 ओलंपिक खेलों में भारत की ओर से निशानेबाजी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। उस दौर में शूटिंग खेल आज की तरह सुविधाओं और तकनीकी संसाधनों से लैस नहीं था, लेकिन इसके बावजूद रणधीर सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया।
उनकी पहचान एक अनुशासित, शांत और तकनीकी रूप से मजबूत शूटर के रूप में होती थी। लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना उनकी फिटनेस, मानसिक मजबूती और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
एशियाई खेलों में रचा इतिहास
रणधीर सिंह के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 1978 बैंकॉक एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक शामिल है। उन्होंने ट्रैप शूटिंग स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया था। वे एशियाई खेलों में निशानेबाजी में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने।
उस दौर में भारत के लिए शूटिंग में पदक जीतना बेहद बड़ी उपलब्धि माना जाता था। रणधीर सिंह की इस सफलता ने देश में शूटिंग खेल को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। बाद के वर्षों में जिन भारतीय निशानेबाजों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की, उनके लिए रणधीर सिंह प्रेरणा स्रोत बने।
अर्जुन अवॉर्ड से हुए सम्मानित
भारतीय खेलों में उनके उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उनके शानदार खेल करियर और देश के लिए उपलब्धियों की मान्यता था।
रणधीर सिंह का नाम उन खिलाड़ियों में गिना जाता है जिन्होंने अपने प्रदर्शन से भारत की खेल संस्कृति को मजबूत किया। वे हमेशा युवा खिलाड़ियों को अनुशासन, धैर्य और निरंतर मेहनत का संदेश देते थे।
खेल प्रशासन में निभाई बड़ी भूमिका
खिलाड़ी के रूप में सफल करियर के बाद रणधीर सिंह ने खेल प्रशासन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के सबसे प्रभावशाली प्रशासकों में शामिल रहे। उन्होंने 1987 से 2012 तक इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव के रूप में कार्य किया।
करीब 25 वर्षों तक इस पद पर रहते हुए उन्होंने भारतीय खेलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में काम किया। ओलंपिक, एशियाई खेलों और कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की भागीदारी को बेहतर बनाने में उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती है।
वे खिलाड़ियों के हितों को प्राथमिकता देने वाले प्रशासक माने जाते थे। खेल संगठनों के बीच तालमेल बढ़ाने और भारतीय खिलाड़ियों को बेहतर अवसर दिलाने के लिए उन्होंने लगातार काम किया।
IOC और OCA में भी निभाई जिम्मेदारी
रणधीर सिंह की पहचान केवल भारतीय खेल प्रशासन तक सीमित नहीं रही। वे 2001 से 2014 तक इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) के सदस्य भी रहे। IOC जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संगठन में भारत का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
इसके अलावा सितंबर 2024 में वे ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) के अध्यक्ष चुने गए थे। नई दिल्ली में आयोजित OCA की 44वीं जनरल असेंबली में उन्हें चार साल के कार्यकाल के लिए अध्यक्ष बनाया गया था। वे इस पद तक पहुंचने वाले पहले भारतीय बने थे।
उनकी नियुक्ति को भारतीय खेलों के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना गया था। हालांकि स्वास्थ्य कारणों से वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके और उन्हें समय से पहले पद छोड़ना पड़ा।
शूटिंग स्पोर्ट्स के विकास में अहम योगदान
रणधीर Singh ने केवल खिलाड़ी और प्रशासक के रूप में ही नहीं, बल्कि भारतीय शूटिंग के संरक्षक के रूप में भी काम किया। उन्होंने देश में शूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और युवा प्रतिभाओं को आगे लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के पदाधिकारियों ने भी उनके निधन पर गहरा दुख जताया। NRAI के महासचिव राजीव भाटिया ने कहा कि रणधीर सिंह ने शूटिंग खेल और ओलंपिक आंदोलन के विकास में अमूल्य योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि रणधीर सिंह का करियर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा रहेगा। एक खिलाड़ी, प्रशासक और मार्गदर्शक के रूप में उनका योगदान भारतीय खेल इतिहास का अहम हिस्सा रहेगा।
खेल जगत ने दी श्रद्धांजलि
रणधीर सिंह के निधन के बाद देशभर से शोक संदेश आने लगे। कई पूर्व ओलंपियन, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और खेल प्रशासकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
खेल जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि रणधीर सिंह ने भारतीय खेलों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने भारतीय खेल प्रशासन को वैश्विक मंच पर मजबूत पहचान दिलाई।
उनकी सादगी, नेतृत्व क्षमता और खिलाड़ियों के प्रति सकारात्मक सोच के कारण वे सभी के बीच सम्मानित थे। युवा खिलाड़ियों के लिए वे हमेशा प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
हमेशा याद किया जाएगा योगदान
रणधीर सिंह का निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने जीवन के कई दशक भारतीय खेलों के विकास के लिए समर्पित कर दिए। खिलाड़ी से लेकर अंतरराष्ट्रीय खेल प्रशासक तक का उनका सफर बेहद प्रेरणादायक रहा।
भारत के लिए एशियाई खेलों में पहला शूटिंग गोल्ड जीतने से लेकर अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों में भारत की मजबूत आवाज बनने तक, रणधीर सिंह ने हर भूमिका को पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाया।
भारतीय खेल इतिहास में उनका नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा। उनकी उपलब्धियां और योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।
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