22 अप्रैल 2026, बुधवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इस दिन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पड़ रही है, जिसे स्कंद षष्ठी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान कार्तिकेय (स्कंद/मुरुगन) की पूजा-अर्चना के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन में साहस, शक्ति और सफलता की प्राप्ति होती है।
📅 तिथि और वार
पंचांग के अनुसार, 22 अप्रैल को वैशाख शुक्ल षष्ठी तिथि रहेगी। यह तिथि पूरे दिन प्रभावी रहेगी। बुधवार का दिन होने के कारण यह दिन बुद्धि और व्यापार के लिए भी शुभ माना जाता है।
🌙 स्कंद षष्ठी का महत्व
स्कंद षष्ठी भगवान कार्तिकेय को समर्पित होती है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं। दक्षिण भारत में इन्हें मुरुगन के नाम से भी पूजा जाता है। इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से शत्रुओं पर विजय और रोगों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।
🛕 पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाकर पूजा करें। उन्हें फूल, फल, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। स्कंद षष्ठी व्रत कथा का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। शाम के समय पुनः आरती कर व्रत का पारण किया जा सकता है।
⏰ शुभ और अशुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः लगभग 4:15 बजे से 5:00 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर लगभग 11:55 बजे से 12:45 बजे तक
- राहुकाल: दोपहर लगभग 12:00 बजे से 1:30 बजे तक (अशुभ समय)
- यमगंड काल: सुबह 7:30 बजे से 9:00 बजे तक
(समय स्थान के अनुसार थोड़ा बदल सकता है)
⭐ नक्षत्र, योग और करण
- नक्षत्र: पुनर्वसु नक्षत्र
- योग: शुभ योग
- करण: तैतिल करण
🙏 क्या करें और क्या न करें
क्या करें:
- भगवान कार्तिकेय की पूजा करें
- व्रत रखकर संयम और श्रद्धा बनाए रखें
- जरूरतमंदों को दान दें
क्या न करें:
- क्रोध और विवाद से बचें
- अशुभ समय में कोई बड़ा कार्य शुरू न करें
📿 निष्कर्ष
22 अप्रैल 2026 का दिन स्कंद षष्ठी व्रत के कारण अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं।




