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कल का पंचांग, 17 April 2026- शुक्रवार को वैशाख अमावस्या पर सुबह करीब 6 घंटे रहेगा अशुभ ‘आडल योग’, जानें पूजा का मुहूर्त ?

Kal Ka Panchang: कल 17 अप्रैल 2026 को वैशाख अमावस्या है, जिस दिन अशुभ ‘आडल योग’ भी बन रहा है. यहां पर आप शुक्रवार के शुभ मुहूर्त, योग, करण और ग्रहों की विशेष स्थिति आदि के बारे में पंचांग के जरिए जान सकते हैं l

Kal Ka Panchang 17 April 2026: द्रिक पंचांग के अनुसार, 17 अप्रैल 2026 को वैशाख अमावस्या है. इस दिन अमावस्या तिथि सुबह से लेकर शाम 05:21 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रहने वाली है. वहीं, नक्षत्र रेवती प्रात: काल से लेकर दोपहर 12:02 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद दिन के अंत तक नक्षत्र अश्विनी रहने वाला है. आइए अब जानें 17 अप्रैल 2026, वार शुक्रवार के पंचांग के बारे में.

सूर्योदय, सूर्यास्त और चन्द्रास्त

  • सूर्योदय- सुबह 05 बजकर 54 मिनट पर
  • सूर्यास्त- शाम 06 बजकर 48 मिनट पर
  • चन्द्रास्त- शाम 06 बजकर 49 मिनट पर

योग

वैधृति योग से दिन का आरंभ होगा, जो सुबह 07:21 मिनट तक रहेगा. इसके बाद अगले दिन की सुबह तक विष्कुम्भ योग रहने वाला है

वैशाख अमावस्या विशेष: 17 अप्रैल 2026 का पंचांग, अशुभ ‘आडल योग’ और पूजा का शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, और जब यह वैशाख मास में पड़ती है तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में 17 अप्रैल, शुक्रवार को वैशाख अमावस्या मनाई जाएगी। इस दिन पितरों का तर्पण, दान-पुण्य और स्नान करने से विशेष फल प्राप्त होता है। हालांकि इस बार अमावस्या पर सुबह के समय अशुभ ‘आडल योग’ का प्रभाव भी देखने को मिलेगा, जिससे शुभ कार्यों के लिए सावधानी जरूरी है।


📅 17 अप्रैल 2026 का पंचांग

  • दिन: शुक्रवार
  • तिथि: वैशाख अमावस्या
  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 अप्रैल की रात (लगभग)
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 17 अप्रैल दोपहर/शाम तक (लगभग)
  • नक्षत्र: (स्थान अनुसार परिवर्तन संभव)
  • योग: आडल योग (अशुभ)

⚠️ क्या है ‘आडल योग’ और इसका प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ‘आडल योग’ को अशुभ योगों में गिना जाता है। यह योग नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं का संकेत देता है।

  • इस दौरान नए कार्य, यात्रा या शुभ शुरुआत से बचना चाहिए
  • पूजा-पाठ तो किया जा सकता है, लेकिन शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना जरूरी है
  • यह योग सुबह लगभग 6 घंटे तक प्रभावी रहेगा

🛕 पूजा का शुभ मुहूर्त

आडल योग समाप्त होने के बाद पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है।

  • शुभ समय (अनुमानित): सुबह 11 बजे के बाद से दोपहर तक
  • विशेष कार्य:
    • पितरों के लिए तर्पण
    • गंगा स्नान या पवित्र नदी स्नान
    • दान (अन्न, वस्त्र, जल)
    • पीपल वृक्ष की पूजा

🌊 वैशाख अमावस्या का महत्व

वैशाख अमावस्या को पितृ तर्पण और दान के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान और पूजा से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

 

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