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Russia Sanctions : रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी सीनेट सख्त, प्रतिबंध बिल को मिली पहली मंजूरी

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा कसने की तैयारी, अमेरिकी सीनेट ने बढ़ाया बड़ा कदम; जेलेंस्की भी रहे मौजूद

वॉशिंगटन: रूस-यूक्रेन युद्ध को चार साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन संघर्ष अभी भी जारी है। इसी बीच अमेरिका ने रूस पर आर्थिक दबाव और बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार को उस महत्वपूर्ण विधेयक (बिल) को आगे बढ़ाने के लिए प्रक्रियात्मक मंजूरी दे दी, जिसके तहत रूस से तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य वस्तुओं की खरीद जारी रखने वाले देशों पर सख्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इस अहम मतदान के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की भी सीनेट में मौजूद रहे और उन्होंने अमेरिकी सांसदों से मुलाकात कर यूक्रेन के समर्थन की अपील की।

रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी

अमेरिकी प्रशासन लंबे समय से रूस की आय के प्रमुख स्रोतों को निशाना बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य उन देशों पर दबाव बनाना है जो पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस से ऊर्जा और अन्य वस्तुओं का आयात जारी रखे हुए हैं। माना जा रहा है कि यदि यह कानून अंतिम रूप से पारित हो जाता है, तो रूस के साथ व्यापार करने वाले कई देशों पर आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम का असर केवल रूस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

सीनेट में 86-12 से मिला मजबूत समर्थन

रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों—रिपब्लिकन और डेमोक्रेट—का व्यापक समर्थन मिला। प्रक्रियात्मक मतदान में बिल के पक्ष में 86 वोट पड़े, जबकि 12 सीनेटरों ने इसका विरोध किया। यह परिणाम दर्शाता है कि रूस के खिलाफ कड़े कदम उठाने के मुद्दे पर अमेरिकी राजनीति में व्यापक सहमति बनी हुई है।

यह मतदान ऐसे समय हुआ जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की अमेरिकी दौरे पर थे। उन्होंने मतदान से पहले और बाद में कई सीनेटरों से मुलाकात की तथा यूक्रेन की मौजूदा सैन्य स्थिति और भविष्य की जरूरतों पर चर्चा की।

जेलेंस्की ने अमेरिका से मांगी और मदद

सीनेट में मौजूद रहने के दौरान राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अमेरिकी सांसदों को बताया कि यूक्रेन की सेना रूस के खिलाफ मोर्चे पर मजबूती से डटी हुई है और कई क्षेत्रों में बढ़त बनाने में सफल रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है और यूक्रेन को अमेरिका तथा उसके सहयोगी देशों से लगातार सैन्य और रक्षा सहायता की आवश्यकता है।

उन्होंने विशेष रूप से अत्याधुनिक एंटी-बैलिस्टिक डिफेंस सिस्टम और आधुनिक हथियारों की जरूरत पर जोर दिया, ताकि रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

ग्राहम और ब्लूमेंथल ने तैयार किया था विधेयक

इस विधेयक का मसौदा साउथ कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और कनेक्टिकट के डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने तैयार किया था। दोनों नेताओं ने 10 जुलाई को इस प्रस्ताव पर सहमति बनने की घोषणा की थी। यह विधेयक पिछले एक वर्ष से अधिक समय से विभिन्न स्तरों पर चर्चा और बातचीत के बाद तैयार किया गया।

हालांकि, इस घोषणा के अगले ही दिन लिंडसे ग्राहम का अचानक निधन हो गया। चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार उनकी मौत ‘एओर्टिक टियर’ (महाधमनी फटने) के कारण हुई। वह हाल ही में यूक्रेन की यात्रा से लौटे थे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात कर युद्ध की स्थिति पर चर्चा की थी।

ग्राहम को श्रद्धांजलि के बीच हुई मतदान प्रक्रिया

सीनेट में मतदान ऐसे समय हुआ जब दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम को श्रद्धांजलि दी जा रही थी। कई सांसदों ने माना कि रूस के खिलाफ कठोर प्रतिबंधों की इस पहल में ग्राहम की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इसलिए इस विधेयक पर आगे बढ़ना उनके प्रयासों को आगे ले जाने के रूप में देखा जा रहा है।

जेलेंस्की ने क्या कहा?

मतदान के बाद राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि वॉशिंगटन में उनकी अमेरिकी सीनेट के दोनों दलों के 60 से अधिक सांसदों के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सांसदों ने यूक्रेनी सैनिकों के साहस और रूस के हमलों का जवाब देने की क्षमता की सराहना की।

जेलेंस्की ने कहा कि बैठक में सबसे महत्वपूर्ण चर्चा एंटी-बैलिस्टिक डिफेंस सिस्टम को लेकर हुई और अमेरिका ने इस दिशा में सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि सीनेट में रूस पर प्रतिबंधों वाले विधेयक को 86 सांसदों का समर्थन मिलना दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में पहला बड़ा कदम है और यह भविष्य में शांति स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

वैश्विक स्तर पर पड़ सकता है असर

यदि यह विधेयक अमेरिकी संसद की आगे की प्रक्रिया पूरी कर कानून का रूप लेता है, तो रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। खासकर ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों को अपनी खरीद रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, अमेरिका का मानना है कि रूस की आय के स्रोतों को कमजोर कर यूक्रेन युद्ध पर दबाव बनाया जा सकता है।

फिलहाल यह विधेयक अपनी शुरुआती संसदीय प्रक्रिया में है, लेकिन इसे मिली मजबूत राजनीतिक समर्थन ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका रूस के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों को और अधिक सख्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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