
केप कैनावेरल: चांद की सतह को लेकर वैज्ञानिकों को एक ऐसी खोज मिली है, जिसने भविष्य के चंद्र अभियानों को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। वैज्ञानिकों ने चांद की सतह पर एक विशाल इंपैक्ट क्रेटर यानी टक्कर से बना गड्ढा खोजा है। इसकी चौड़ाई करीब 728 फीट यानी 222 मीटर और गहराई लगभग 141 फीट यानी 43 मीटर है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह क्रेटर करीब दो साल पहले किसी क्षुद्रग्रह या अंतरिक्ष से आए बड़े पिंड की चांद से टक्कर के कारण बना था।
इस खोज की खास बात यह है कि इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद वैज्ञानिकों को इसका पता तत्काल नहीं चल पाया। बाद में नासा के लूनर रिकॉनसेंस ऑर्बिटर (LRO) से मिली तस्वीरों और आंकड़ों का दोबारा अध्ययन करने के दौरान इस नए क्रेटर की पहचान हुई। इस खोज से चांद की सतह पर लगातार हो रही टक्करों और उसके कारण होने वाले बदलावों को समझने में वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।
728 फीट चौड़ा है नया क्रेटर
वैज्ञानिकों के मुताबिक नया क्रेटर चांद के उस हिस्से में स्थित है, जिसे पृथ्वी से देखा जा सकता है। इसकी चौड़ाई लगभग 222 मीटर और गहराई करीब 43 मीटर मापी गई है। इसका आकार इतना बड़ा है कि इसकी तुलना रोम के प्रसिद्ध कोलोसियम से भी की जा रही है।
इस क्रेटर को दिवंगत वैज्ञानिक थॉमस मैकगेटचिन के सम्मान में नाम दिया गया है। वह ह्यूस्टन स्थित लूनर एंड प्लेनेटरी इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक रह चुके थे। वैज्ञानिकों के अनुसार यह हाल के वर्षों में दर्ज किए गए सबसे बड़े नए इंपैक्ट क्रेटरों में से एक है और पिछले रिकॉर्ड वाले क्रेटर की तुलना में करीब तीन गुना बड़ा है।
100 किलोमीटर से ज्यादा इलाके पर पड़ा असर
यह टक्कर सिर्फ उस जगह तक सीमित नहीं रही, जहां क्रेटर बना। अध्ययन के मुताबिक टक्कर के दौरान चांद की सतह से बड़ी मात्रा में धूल, मिट्टी और चट्टानी सामग्री बाहर निकली और दूर तक फैल गई। इसका प्रभाव 100 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में देखा गया।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इतनी बड़ी टक्कर बेहद दुर्लभ घटना है। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर इस स्तर की घटना औसतन करीब 132 साल में एक बार होने की संभावना बताई गई है। यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे चांद की सतह को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण प्राकृतिक प्रयोग के तौर पर देख रहे हैं।
दो साल तक कैसे छिपी रही यह घटना?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी टक्कर वैज्ञानिकों की नजर से करीब दो साल तक कैसे बची रही। दरअसल, LRO लगातार चांद की सतह की तस्वीरें और वैज्ञानिक आंकड़े जुटाता है। मई 2024 में भी इस इलाके की तस्वीरें ली गई थीं, लेकिन उस समय उपलब्ध विशाल मात्रा में डेटा के बीच नए क्रेटर की पहचान नहीं हो सकी।
अगस्त 2025 में वैज्ञानिकों ने पुराने आंकड़ों का दोबारा विश्लेषण करते हुए सतह में आए इस बदलाव को पहचाना। इसके बाद LRO ने इलाके की अधिक विस्तृत तस्वीरें लीं। आगे के विश्लेषण से यह पुष्टि हुई कि यह वास्तव में हाल में बना नया इंपैक्ट क्रेटर है।
आसपास की मिट्टी में भी दिखा बड़ा बदलाव
एक अलग अध्ययन में वैज्ञानिकों को क्रेटर के आसपास करीब 7 किलोमीटर चौड़ा क्षेत्र मिला, जहां सतह की स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई दिए। टक्कर की ताकत इतनी ज्यादा थी कि चांद की ऊपरी मिट्टी और चट्टानी परतें उलट-पुलट गईं।
वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया की तुलना बाग की मिट्टी पलटने से की है। टक्कर के कारण सतह के नीचे मौजूद सामग्री ऊपर आ जाती है और ऊपर की मिट्टी नीचे चली जाती है। इससे चांद की सतह के लगातार बदलने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलती है।

चांद की मिट्टी पहले के अनुमान से ज्यादा तेजी से बदल रही है
LRO के लंबे समय से चल रहे अवलोकनों ने यह संकेत दिया है कि चांद की ऊपरी सतह स्थिर नहीं है। उल्कापिंडों और छोटे-बड़े अंतरिक्षीय पिंडों की लगातार टक्करों के कारण मिट्टी में बदलाव होता रहता है। वैज्ञानिकों के अनुसार चांद की ऊपरी करीब एक इंच यानी दो सेंटीमीटर मिट्टी उल्कापिंडों से आई सामग्री के कारण लगभग 80 हजार वर्षों में पलट सकती है।
इसका मतलब यह भी है कि अपोलो मिशनों के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा छोड़े गए पैरों के निशान हमेशा के लिए सुरक्षित रहने की धारणा सही नहीं मानी जा सकती। लंबे समय में लगातार होने वाली छोटी-बड़ी टक्करों से चांद की सतह बदलती रहती है।
भविष्य के मून बेस के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?
यह खोज ऐसे समय सामने आई है जब चांद पर भविष्य में मानव अभियानों और स्थायी ढांचे की योजनाओं पर काम चल रहा है। वैज्ञानिक अब यह समझना चाहते हैं कि ऐसी टक्करों के दौरान बाहर निकलने वाली चट्टानें और मलबा भविष्य में चांद पर बनाए जाने वाले किसी बेस के लिए कितना खतरा पैदा कर सकते हैं।
शोधकर्ताओं के मुताबिक अगला महत्वपूर्ण कदम यह पता लगाना है कि इस तरह की टक्कर से निकली सामग्री कितनी दूर तक पहुंच सकती है और संभावित मून बेस पर उसका प्रभाव कितना हो सकता है। इससे भविष्य के मिशनों के लिए सुरक्षित स्थान चुनने और मजबूत संरचनाएं तैयार करने में मदद मिल सकती है।
इस नई खोज ने यह साफ कर दिया है कि देखने में शांत नजर आने वाली चांद की सतह वास्तव में लगातार बदल रही है। अंतरिक्षीय पिंडों की टक्कर से होने वाले ये बदलाव भविष्य के मानव अभियानों के लिए वैज्ञानिकों को चांद के वास्तविक वातावरण को समझने में अहम जानकारी दे रहे हैं।




