
उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में पहचान संबंधी गड़बड़ी सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग ने कार्रवाई की है। पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की कुछ प्रविष्टियों में मतदाता पहचान पत्र का विशिष्ट नंबर यानी EPIC ऑनलाइन खोजने पर दूसरे व्यक्ति का नाम और विवरण दिखाई दिया। जिला निर्वाचन अधिकारी की शुरुआती जांच में इस विसंगति की पुष्टि हुई। मामला लखनऊ में कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया गया, लेकिन पुष्टि की गई गड़बड़ी फिलहाल पीलीभीत सदर क्षेत्र से संबंधित है।
ERO और VRC ऑपरेटर को हटाने के निर्देश
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र संख्या 127 के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और मतदाता पंजीकरण केंद्र (VRC) ऑपरेटर को मतदाता सूची के काम से तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं। जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई करने को भी कहा गया है।
सभी जिलों की मतदाता सूचियों की जांच
निर्वाचन विभाग ने जांच को पीलीभीत तक सीमित नहीं रखा है। सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को अपने-अपने जिलों की विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में EPIC नंबर और दर्ज विवरण का मिलान कर 48 घंटे में रिपोर्ट देने को कहा गया है। पीलीभीत के अधिकारी को भी जिले की सभी विधानसभा सीटों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट भेजनी है। जांच का उद्देश्य ऐसी गड़बड़ियों की अन्य क्षेत्रों में मौजूदगी पता करना है। जांच रिपोर्ट के बाद आगे कार्रवाई होगी।
कांग्रेस ने 16 हजार से अधिक प्रविष्टियों पर सवाल उठाए
कांग्रेस नेताओं ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीलीभीत सदर की मतदाता सूची में व्यापक गड़बड़ी का आरोप लगाया। पार्टी के अनुसार, अप्रैल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की सूची जारी होने के बाद जुलाई से सितंबर के बीच 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए, जबकि उनके EPIC और क्रम संख्या कथित तौर पर वही रहे। कांग्रेस ने 804 मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा भी किया, जबकि वे क्षेत्र में रह रहे थे। इसके अलावा करीब 2,600 ऐसे लोगों के नाम जोड़े जाने का आरोप लगाया गया, जो कथित तौर पर उस क्षेत्र में नहीं रहते। ये पार्टी के दावे हैं; हर प्रविष्टि की जांच और अंतिम निष्कर्ष अलग विषय है।
सपा ने भी पहले उठाया था मुद्दा
कांग्रेस से पहले समाजवादी पार्टी ने भी पीलीभीत की मतदाता सूची में EPIC नंबर से जुड़ी विसंगतियों का मुद्दा उठाया था। पार्टी ने 19 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में ज्ञापन देकर शिकायत की कि ऑनलाइन EPIC नंबर डालने पर कुछ मामलों में दूसरे व्यक्ति का विवरण सामने आ रहा है। इसके बाद कांग्रेस ने भी उदाहरण और आंकड़े सार्वजनिक किए। हालांकि, मतदाता सूची में त्रुटि अपने आप में किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति की मिलीभगत साबित नहीं करती; इसके लिए जांच के निष्कर्ष जरूरी हैं।

मतदाता अपनी जानकारी कैसे जांचें?
मतदाता निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पर EPIC नंबर से अपना विवरण खोजकर नाम और अन्य जानकारी का मिलान कर सकते हैं। यदि नंबर डालने पर दूसरे व्यक्ति का विवरण दिखे या नाम-पता गलत हो, तो स्क्रीनशॉट और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखकर बूथ लेवल अधिकारी (BLO), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी या जिला निर्वाचन कार्यालय से शिकायत करें। आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्टि कराना जरूरी है।
मतदाता सूची चुनाव प्रक्रिया का बुनियादी दस्तावेज है। इसलिए ऐसी विसंगतियों की समय पर जांच, सही डेटा बहाल करना और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, ताकि कोई पात्र मतदाता अपने मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए।




