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लखनऊ में ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा: दो ठिकानों पर छापे, 82 करोड़ के मादक पदार्थ बरामद

लखनऊ में ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा, दो कार्रवाइयों में 82 करोड़ की बरामदगी

उत्तर प्रदेश की राजधानी में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार को लेकर अक्टूबर में सामने आई दो कार्रवाइयों ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। आठ दिन के भीतर दो रिहायशी ठिकानों पर कथित हेरोइन निर्माण इकाइयों का खुलासा हुआ। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में करीब 50 करोड़ रुपये की हेरोइन बरामद हुई, जबकि एंटी नार्कोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और दुबग्गा पुलिस की दूसरी कार्रवाई में करीब 32 करोड़ रुपये के मूल्य की संदिग्ध कच्ची मॉर्फीन मिली। दोनों मामलों में कुल अनुमानित बरामदगी 82 करोड़ रुपये की है। हालांकि, दोनों के बीच सीधा संबंध अभी स्थापित नहीं हुआ है।

जानकीपुरम में मिली तैयार हेरोइन

पहली कार्रवाई 4 अक्टूबर को लखनऊ के जानकीपुरम स्थित सीता विहार कॉलोनी में की गई। दिल्ली पुलिस की रोहिणी जिला स्पेशल स्टाफ टीम ने एक मकान पर छापा मारकर 6.275 किलोग्राम तैयार हेरोइन बरामद की। दिल्ली में नशीले पदार्थों की सप्लाई की जांच के दौरान लखनऊ में कथित निर्माण इकाई का पता चला। इस मामले में कुल 7.076 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 50 करोड़ रुपये आंकी गई। कार्रवाई से जुड़े मामले में चार लोगों की गिरफ्तारी की खबर दी गई।

छापेमारी के दौरान पुलिस को कथित रूप से हेरोइन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले रसायन, मिक्सर, गैस सिलिंडर, वजन मशीन और अन्य सामान भी मिला। जांचकर्ताओं को आशंका है कि तैयार पदार्थ दिल्ली-एनसीआर सहित दूसरे इलाकों में भेजा जाता था। पुलिस कच्चे माल के स्रोत, खरीदारों और आर्थिक लेन-देन की पड़ताल कर रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जांच की शुरुआत 16 सितंबर को दिल्ली के बेगमपुर में कथित डिलीवरी पकड़े जाने के बाद हुई थी। वहां से मिले सुरागों और पूछताछ के आधार पर पुलिस लखनऊ में कथित सप्लाई चैन तक पहुंची। इसके बाद निगरानी कर छापा लगाया गया।

दुबग्गा में 6.4 किलो संदिग्ध मॉर्फीन बरामद

दूसरी कार्रवाई 12 अक्टूबर की रात दुबग्गा क्षेत्र के महिपतमऊ गांव में हुई। ANTF की लखनऊ यूनिट और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने एक रिहायशी मकान पर छापा मारा। यहां से 6.4 किलोग्राम संदिग्ध कच्ची मॉर्फीन बरामद की गई। पुलिस के अनुसार, इसकी कीमत सरकारी दर से करीब 13 करोड़ रुपये और अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुमान से लगभग 32 करोड़ रुपये बताई गई। यह तैयार हेरोइन नहीं, बल्कि संदिग्ध कच्चा माल है। इस मामले में मोहम्मद जुबैर और मोहम्मद अमजद को गिरफ्तार किया गया, जबकि तीन अन्य कथित सहयोगियों की तलाश जारी बताई गई।

टीम ने पिस्तौल, कारतूस, नकदी, मोबाइल फोन, वाहन और रसायन भी बरामद किए। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में लखनऊ, बाराबंकी और बरेली तक सप्लाई के संकेत मिले हैं। इन दावों की पुष्टि होना बाकी है।

केमिकल सप्लाई और नेटवर्क की जांच

जांच एजेंसियों का ध्यान अब केवल बरामदगी तक सीमित नहीं है। अधिकारी कच्ची मॉर्फीन और रसायनों के स्रोत, मकानों के इस्तेमाल और सप्लाई के तरीकों का पता लगा रहे हैं। मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्यों से कथित सप्लायरों, ग्राहकों तथा आर्थिक लेन-देन की कड़ियां तलाशने की कोशिश है। जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि फोन में मौजूद नंबरों और कॉल डिटेल्स का संबंध किन लोगों से है। किसी संपर्क का नंबर सेव होने भर से उसका अपराध में शामिल होना साबित नहीं होता; हर व्यक्ति की भूमिका साक्ष्यों से जांची जाएगी।

आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं। समानताओं के बावजूद अधिकारियों ने दोनों मामलों का संबंध पुष्ट नहीं किया है।

आगे क्या?

पुलिस फरार बताए जा रहे लोगों की तलाश और कथित सप्लाई चेन की पहचान में जुटी है। जांच में कच्चे माल के स्रोत, सप्लाई की मंजिल और संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क की तस्वीर साफ हो सकती है। दोनों कार्रवाइयों ने शहर में ड्रग्स निर्माण पर निगरानी की जरूरत उजागर की है।

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