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India-US Relations: हर मुद्दे पर सहमति जरूरी नहीं, बोले मार्को रुबियो

India-US Relations: हर मुद्दे पर सहमति जरूरी नहीं, भारत दौरे पर बोले मार्को रुबियो

भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हर मुद्दे पर सहमति होना जरूरी नहीं है। कुछ मामलों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन रणनीतिक साझेदारी और राष्ट्रीय हितों से जुड़े विषयों पर सहयोग अहम है। रुबियो ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को मुंबई में आयोजित ‘फ्रीडम 250’ स्वागत समारोह में यह बात कही। जनसत्ता की रिपोर्ट

21वीं सदी की दिशा तय कर सकते हैं दोनों देश

रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो बड़े और प्रभावशाली देश हैं। दोनों की वैश्विक भूमिका 21वीं सदी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने कहा कि भविष्य को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर साथ काम कर दोनों देश वैश्विक घटनाक्रम को सकारात्मक दिशा दे सकते हैं।

उनके मुताबिक, मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन राष्ट्रीय हितों से जुड़े अहम मुद्दों पर तालमेल बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने भारत-अमेरिका के बीच ऐसे विषयों पर तालमेल को असाधारण बताया।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर साझा नजरिया

रुबियो ने मुक्त और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सहयोग का प्रमुख हिस्सा बताया। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों पर किसी एक देश का दबदबा या नियंत्रण नहीं होना चाहिए। उनके बयान की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार को लेकर समान प्राथमिकताएं हैं।

हालांकि, उनके बयान का अर्थ यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच सभी विवाद सुलझ गए हैं। व्यापार और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी है। रुबियो ने मतभेदों के बावजूद भारत को महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया।

जयशंकर से मुलाकात में व्यापार और ऊर्जा पर चर्चा

रुबियो ने मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर बातचीत की। संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायेद अल नहयान के साथ त्रिपक्षीय बैठक भी हुई। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, बैठक में क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा और साझा आर्थिक प्राथमिकताओं पर भी चर्चा हुई।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कई महीनों से बातचीत चल रही है। रुबियो ने पत्रकारों से कहा कि दोनों देश समझौते के बेहद करीब हैं और कुछ ही मुद्दे सुलझाने बाकी हैं। उन्होंने इसे जल्द अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद जताई। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, समझौते को जल्द पूरा करने के प्रयास जारी हैं।

वॉशिंगटन ने 2025 में भारतीय वस्तुओं पर ऊंचे टैरिफ लगाए थे, जिसके बाद व्यापार वार्ता प्रभावित हुई। इस साल फरवरी में दोनों पक्षों ने ढांचे पर सहमति बनाई, लेकिन अंतिम समझौते की शर्तों पर काम जारी है। भारत का कहना है कि अंतिम शुल्क दर उसके प्रतिस्पर्धी विनिर्माण देशों के अनुरूप होनी चाहिए।

रूसी तेल और टैरिफ बना चुनौती

हाल के महीनों में भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव का एक कारण भारत की रूसी कच्चे तेल की खरीद और अमेरिकी टैरिफ रहे हैं। अमेरिका ने पहले भारतीय उत्पादों पर भारी शुल्क लगाए थे, जबकि दोनों सरकारें व्यापार समझौते के जरिए विवाद कम करने की कोशिश कर रही हैं। हाल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों पर प्रस्तावित कुछ प्रतिबंध अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया। भारत भी इससे राहत पाने वाले देशों में शामिल है। रॉयटर्स की रिपोर्ट

रुबियो ने ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। उनके कार्यक्रम में रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ वेनेजुएला के कच्चे तेल के प्रसंस्करण और संभावित उत्पादन सहयोग पर चर्चा शामिल है। रॉयटर्स के अनुसार, दोनों देश ऊर्जा आपूर्ति के विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।

रुबियो की यात्रा में गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस रिफाइनरी का दौरा भी शामिल है। यह दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग परिसरों में से एक है और भारी किस्म के कच्चे तेल को संसाधित कर सकता है।

मतभेदों के बीच बातचीत जारी

भारत और अमेरिका रक्षा, तकनीक, व्यापार और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग आगे बढ़ाना चाहते हैं। हालांकि, टैरिफ और रूस से ऊर्जा आयात जैसे मुद्दों पर समझौते के लिए आगे भी बातचीत जरूरी होगी।

कुल मिलाकर, रुबियो ने स्पष्ट किया कि साझेदारी का अर्थ हर बात पर सहमत होना नहीं है। अहम यह है कि मतभेदों को संवाद से संभाला जाए और साझा हितों पर काम जारी रहे। वार्ता अब निर्णायक मोड़ पर है।

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