
स्मृति मंधाना की कप्तानी में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में 3-0 से क्लीन स्वीप कर लिया। मंगलवार, 20 अक्टूबर को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में भारत ने तीसरे मुकाबले में जिम्बाब्वे को 92 रन से हराया। जीत की नायिका पूर्व कप्तान हरमनप्रीत कौर रहीं, जिन्होंने 41 गेंदों में नाबाद 91 रन बनाए।
भारत ने बनाया 216 रन का बड़ा स्कोर
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने 20 ओवर में सात विकेट पर 216 रन बनाए। अनुष्का शर्मा ने 20 गेंदों में 28 रन जोड़े। इसके बाद शैफाली वर्मा और हरमनप्रीत कौर ने पारी को रफ्तार दी। शैफाली ने 37 गेंदों पर 69 रन बनाए, जिसमें छह चौके और पांच छक्के शामिल थे।
हरमनप्रीत ने शुरुआत संभलकर की, लेकिन बाद में जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर प्रहार किए। उन्होंने 25 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया। उनकी नाबाद 91 रन की पारी में 10 चौके और पांच छक्के शामिल रहे। वह शतक से केवल नौ रन दूर रह गईं, लेकिन उनकी बल्लेबाजी ने भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।
शैफाली-हरमनप्रीत की अहम साझेदारी
शैफाली और हरमनप्रीत ने तीसरे विकेट के लिए 84 रन जोड़े। जिम्बाब्वे की बेलव्ड बीजा ने चार ओवर में 50 रन देकर तीन विकेट लिए, लेकिन भारत को बड़े स्कोर तक पहुंचने से नहीं रोक सकीं।
जिम्बाब्वे 124 रन तक सिमटा
217 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए जिम्बाब्वे की टीम 20 ओवर में सात विकेट पर 124 रन ही बना सकी। शार्ने मेयर्स ने 49 गेंदों में 60 रन बनाए, जबकि बेलव्ड बीजा ने 50 गेंदों पर 44 रन जोड़े। दोनों ने पारी संभालने की कोशिश की, मगर जरूरी रन गति बढ़ती गई और भारतीय गेंदबाजों ने वापसी का मौका नहीं दिया।
भारत की ओर से नंदनी शर्मा ने चार ओवर में 18 रन देकर तीन विकेट झटके। निकी प्रसाद, दीप्ति शर्मा, क्रांति गौड़ और अरुंधति रेड्डी ने भी विकेट लेकर जिम्बाब्वे की चुनौती कमजोर की। भारत ने मुकाबला 92 रन से जीता। हरमनप्रीत को शानदार बल्लेबाजी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
तीनों मैचों में भारत का दबदबा
भारत ने पहला मुकाबला चार विकेट से और दूसरा नौ विकेट से जीता था। तीसरे मैच में जीत ने 3-0 का परिणाम पक्का किया। स्मृति मंधाना ने इस मुकाबले में ओपनिंग के लिए अनुष्का शर्मा को भेजा और निकी प्रसाद तीसरे नंबर पर उतरीं। कुछ प्रयोग सफल नहीं रहे, लेकिन अनुभवी बल्लेबाजों ने टीम को संभाला।
पारी के बाद भावुक हुईं हरमनप्रीत
हरमनप्रीत की यह पारी इसलिए खास रही क्योंकि उन्होंने हाल में सभी प्रारूपों की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया था। इससे पहले उनके बल्ले से लगातार 10 मैचों में अर्धशतक नहीं आया था। पारी के बाद प्रसारक से बातचीत के दौरान वह भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि वह मैदान पर अपने खेल का आनंद लेना चाहती हैं और जितनी देर संभव हो बल्लेबाजी करना चाहती थीं। उन्होंने पूर्व भारतीय कोच डब्ल्यू.वी. रमन के प्रोत्साहन और बल्लेबाजी कोच के सहयोग को श्रेय दिया। हरमनप्रीत ने कहा कि अब कप्तानी का दबाव नहीं है और उनका ध्यान बल्लेबाजी पर मेहनत करने पर है।

आगे की तैयारी के लिए अहम जीत
यह क्लीन स्वीप भारत का आत्मविश्वास बढ़ाएगा। हरमनप्रीत की फॉर्म में वापसी, शैफाली की आक्रामक बल्लेबाजी और नंदनी की गेंदबाजी सीरीज की प्रमुख उपलब्धियां रहीं। भारत अब आगामी मुकाबलों में यही लय बनाए रखना चाहेगा। अब भारतीय टीम का ध्यान आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों पर रहेगा।




