
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए चरित्र सत्यापन से जुड़ा नया नियम चर्चा में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थियों के चरित्र और पिछली गतिविधियों की जांच से जुड़े प्रावधान सख्त किए हैं। नई नीति के तहत हिंसक तरीकों से मौजूदा व्यवस्था बदलने की गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले अभ्यर्थियों को सरकारी नियुक्ति के लिए अयोग्य माना जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर प्रदर्शन में शामिल होने वाले युवा को नौकरी नहीं मिलेगी। केवल राजनीतिक विचारधारा या किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना भी अपने आप में अयोग्यता का आधार नहीं है।
क्या है योगी सरकार का नया नियम?
नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से जारी नई नीति का उद्देश्य सरकारी नौकरी में चयनित अभ्यर्थियों का चरित्र सत्यापन अधिक व्यवस्थित बनाना है। यह व्यवस्था राज्य सरकार के विभागों के अलावा निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्त निकायों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती पर भी लागू होगी।
नियमों के मुताबिक, ऐसे संगठनों से जुड़े लोगों को नियुक्ति के लिए अनुपयुक्त माना जा सकता है, जिनका घोषित उद्देश्य हिंसक तरीके से मौजूदा सामाजिक व्यवस्था को बदलना है। ऐसी गतिविधियों में अभ्यर्थी की संलिप्तता सामने आने पर संबंधित अधिकारी चरित्र सत्यापन के आधार पर फैसला लेंगे।
क्या प्रदर्शन करने पर सीधे नौकरी चली जाएगी?
इस नियम को लेकर सबसे अहम बात यह है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसक गतिविधियों में अंतर किया गया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाना या किसी राजनीतिक विचारधारा का समर्थक होना अपने आप में सरकारी नौकरी के लिए अयोग्यता नहीं है।
सरकार की नीति स्पष्ट करती है कि केवल राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी उम्मीदवार को अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता। इसी तरह, सिर्फ एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने से भी अभ्यर्थी स्वतः नौकरी के लिए अयोग्य नहीं हो जाएगा। फैसला संबंधित मामले की परिस्थितियों और चरित्र सत्यापन में सामने आए तथ्यों के आधार पर किया जाएगा।
तीन साल की अवधि और उम्र से जुड़ा प्रावधान
नई नीति में गतिविधियों की समय-सीमा का भी उल्लेख है। रिपोर्टों के मुताबिक, 21 वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद सत्यापन से पहले के तीन वर्षों के भीतर ऐसी हिंसक गतिविधियों में भागीदारी को सक्रिय संलिप्तता का संकेत माना जा सकता है। हालांकि, यदि अभ्यर्थी के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव के ठोस प्रमाण मौजूद हों, तो उन पर भी विचार किया जा सकता है। इसलिए प्रत्येक मामले में तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों का महत्व रहेगा।
पुलिस को 30 दिन में देनी होगी सत्यापन रिपोर्ट
नई व्यवस्था के तहत पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाइयों को सत्यापन का काम तय समयसीमा में पूरा करना होगा। रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित अनुरोध मिलने के बाद सामान्यतः 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट भेजने का प्रावधान किया गया है। सामान्य मामलों में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर जांच की जा सकती है; हर अभ्यर्थी के घर जाकर पूछताछ करना अनिवार्य नहीं होगा।
यदि जांच रिपोर्ट में अभ्यर्थी के खिलाफ प्रतिकूल तथ्य सामने आते हैं, तो अंतिम निर्णय से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर अभ्यर्थी अपनी बात ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से रख सकता है। इसका उद्देश्य सत्यापन की प्रक्रिया में समयबद्धता के साथ निष्पक्षता बनाए रखना है। Jagran+2
गंभीर अपराध और गलत जानकारी देने पर भी सख्ती
चरित्र सत्यापन नीति में गंभीर आपराधिक मामलों और भर्ती में धोखाधड़ी को भी महत्व दिया गया है। हत्या, दुष्कर्म, दहेज हत्या, फिरौती के लिए अपहरण, पेपर लीक, सॉल्वर गैंग, फर्जी प्रमाणपत्र और संगठित अपराध जैसे मामलों में अभ्यर्थी की पात्रता मामले की कानूनी स्थिति और लागू प्रावधानों के अनुसार तय होगी।
आवेदन या स्व-घोषणा पत्र में गिरफ्तारी, अभियोजन या दोषसिद्धि से जुड़ी जानकारी मांगी गई हो, तो उसे सही-सही भरना जरूरी है। महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने या गलत जानकारी देने पर उम्मीदवारी रद्द हो सकती है और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
नए नियमों को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष की चिंता है कि चरित्र सत्यापन के प्रावधानों का इस्तेमाल विरोध करने वाले युवाओं को निशाना बनाने के लिए नहीं होना चाहिए। वहीं, सरकार का रुख है कि राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी को अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा और कार्रवाई हिंसक गतिविधियों तथा सत्यापन में सामने आए तथ्यों के आधार पर होगी।

नौकरी की तैयारी कर रहे युवा क्या ध्यान रखें?
अभ्यर्थियों को आवेदन में सही जानकारी देनी चाहिए, अपने दस्तावेज पूरे रखने चाहिए और भर्ती बोर्ड तथा संबंधित विभाग के निर्देशों का पालन करना चाहिए। किसी प्रदर्शन में भाग लेने को अपने आप सरकारी नौकरी से वंचित होने के बराबर नहीं समझना चाहिए। किसी विशेष मामले में पात्रता का निर्णय लागू नियमों, जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार की नई नीति सरकारी नौकरी के लिए चरित्र सत्यापन को सख्त और समयबद्ध बनाने की दिशा में कदम है। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नियमों को प्रत्येक मामले में किस तरह लागू किया जाता है और अभ्यर्थियों को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर कैसे मिलता है।




