
पूर्व भाजपा सांसद सुब्रत पाठक ने उठाए हार के कारणों पर सवाल, SIR को लेकर दिया बड़ा बयान

कन्नौज। लोकसभा सीट से पिछली बार भाजपा के सांसद रहे सुब्रत पाठक ने हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में मिली हार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने न केवल पार्टी के अंदरूनी कारणों पर सवाल उठाए बल्कि संगठनात्मक रणनीतियों में कमियों की ओर भी इशारा किया। उनके इस बयान से भाजपा कार्यकर्ताओं और सियासी गलियारों में हलचल मच गई है।
पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने कहा कि यदि भाजपा ने SIR (संगठन, इंटेलिजेंस और रिसोर्स) पर सही तरीके से ध्यान दिया होता, तो समाजवादी पार्टी (सपा) कन्नौज में कहीं नजर नहीं आती।
उनके शब्दों में —
“अगर हम लोगों ने SIR पर सही से ध्यान दिया होता, तो समाजवादी पार्टी दूरबीन लेकर भी ढूंढने को नहीं मिलती।”
इस बयान ने चुनावी रणनीति और संगठन की सक्रियता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुब्रत पाठक ने यह भी दावा किया कि कन्नौज संसदीय क्षेत्र की तीन विधानसभा सीटों में करीब 3 लाख वोट कटे, जो पूरी तरह भाजपा के नहीं थे। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि मतों का बिखराव भाजपा के पक्ष में नुकसानदेह साबित हुआ।
उन्होंने कहा —
“कन्नौज में करीब 3 लाख वोट कटे हैं, यह सभी वोट भाजपा के नहीं थे। इससे समझा जा सकता है कि अखिलेश यादव को आखिर कैसे जीत मिली।”
पूर्व सांसद ने कहा कि यदि भाजपा पूरी ताकत लगाती, तो 50 से 55 प्रतिशत तक वोट अपने पक्ष में ला सकती थी।
वहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के पक्ष में लगभग 90 प्रतिशत वोट सघन रूप से पड़े, जो संगठन की एकजुटता को दर्शाता है।
उन्होंने माना कि भाजपा को संगठनात्मक स्तर पर और मजबूती लाने की आवश्यकता है।
सुब्रत पाठक के इस बयान ने भाजपा के भीतर मंथन की स्थिति पैदा कर दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व सांसद का यह बयान संगठनात्मक समीक्षा की दिशा में एक संकेत है। वहीं, सपा कार्यकर्ताओं के बीच इस बयान को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
कन्नौज में सुब्रत पाठक का बयान न केवल भाजपा की रणनीति पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले संगठन के लिए चेतावनी भी माना जा रहा है।




